कोरोना ने मोक्ष भी रोका:जयपुर में श्मशान की कोठरी में 'लॉक' अस्थियों को सवा साल से विसर्जन का इंतजार, चिता को अग्नि देने के बाद लौटकर नहीं आए परिजन

जयपुर6 महीने पहलेलेखक: विष्णु शर्मा
जयपुर के आदर्श नगर मोक्षधाम में कोरोना से जान गंवाने वाले लोगों की अस्थियां इस तरह रखी हुई है।

कोरोना के कहर ने जिंदगी को तो बेपटरी किया ही है। मौत के बाद मोक्ष की मान्यता के रास्ते भी रोक दिए हैं। महामारी में मोक्ष के लिए अस्थियां अपनों के लौटकर आने का इंतजार कर रही हैं। किसी को नहीं पता आखिर मोक्षयात्रा पर लगा यह लॉकडाउन कब खत्म होगा? सवा-सवा किलो वजनी ये अस्थियां श्मशान की कोठरी में लॉक है। वहां प्लास्टिक के डिब्बों-थैलियों और कपड़े लगी मटकियों में बंद हैं।

इन अस्थियों को गंगा में प्रवाहित कर मोक्षयात्रा पर ले जाने वाले अपने भागीरथों का इंतजार है। परिजनों ने अपनों को अंतिम विदाई दी। लेकिन चिता को अग्नि देकर लौट चुके लोग करीब सवा साल बाद भी अपनों की अस्थियां लेने के लिए दोबारा मोक्षधाम नहीं आए। उनके कदम अब लौटकर आने में ठिठक गए हैं।

चांदपोल मोक्षधाम में अस्थि कलशों पर जमी धूल की मोटी परत।
चांदपोल मोक्षधाम में अस्थि कलशों पर जमी धूल की मोटी परत।

भास्कर पड़ताल में सामने आया कि जयपुर के आदर्श नगर मोक्षधाम में सबसे ज्यादा ऐसी अस्थियां रखी हैं। इसके अलावा, चांदपोल मोक्षधाम में भी ऐसे अस्थि कलश है, जिनकी कोरोना से मौत होने की वजह से पिछले कई महीनों से मोक्ष के लिए विसर्जन नहीं हो सका। मोक्ष के इंतजार में कोठरी में बंद इन अस्थि कलशों पर धूल की मोटी परत जम गई है। इनमें कुछ अस्थि कलशों पर मृतकों के नाम, उनके गांव का नाम, मौत की दिनांक लिखी है।

श्री नाथ गोशाला चेरिटेबल ट्रस्ट के महासचिव आर.के. सारा बताते हैं कि पिछले साल करीब कोरोना से जान गंवा चुके लगभग 1500 शवों का अंतिम संस्कार आदर्श नगर मोक्षधाम में नि:शुल्क किया गया था। दाहसंस्कार के बाद काफी लोग अस्थियां लेने नहीं आए। इनमें काफी ऐसे थे जिन्होंने दोबारा संपर्क तक नहीं किया, न हीं अस्थियों की सुध ली।

वहीं, कुछ परिजन जयपुर या इससे बाहर के राज्यों के थे। उन्होंने लॉकडाउन, कोरोना महामारी, कोरोना पॉजिटिव होने से खुद के क्वारैंटाइन होने की मजबूरियां बताकर अस्थि कलश बाद में लेने आने को कहा था। लेकिन, वे लोग दोबारा नहीं आए।

राधा देवी नाम की महिला का अस्थि कलश, ट्रस्ट के ऑफिस में रखा हुआ है।
राधा देवी नाम की महिला का अस्थि कलश, ट्रस्ट के ऑफिस में रखा हुआ है।

मृतकों के परिजनों को फोन करेंगे, पत्र लिखेंगे कि सात दिन में कलश ले जाएं
आरके सारा ने बताया कि हम अंतिम प्रयास करेंगे। जिनके फोन नंबर उपलब्ध हैं। उनको फोन करेंगे। मीडिया में भी सूचना देंगे। साथ ही, मृतक के सगे संबंधियों के उपलब्ध पते पर पत्र लिखेंगे कि वे सात दिन में अपने अस्थि कलश ले जाएं। अन्यथा संस्था अस्थियों का विधि विधान से विर्सजन कर देगी। अभी पिछले साल के करीब 50 अस्थि कलश आदर्श नगर मोक्षधाम में विसर्जन के इंतजार में हैं।

परिजनों ने कहा-अभी कोरोना है, हम अस्थियां बाद में ले जाएंगे, दोबारा नहीं लौटे
ट्रस्ट के ही वीरेंद्र शर्मा व संजय सैन ने बताया कि पिछले साल मार्च में कोरोना की वजह से मौतों का सिलसिला शुरू हुआ। तब लॉकडाउन लगा हुआ था। ऐसे में मृतकों के परिजन अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सके। हमें ही अंतिम क्रिया करनी पड़ी। ऐसे में मृतकों के परिजन कहते थे कि हम कोरोना की वजह से अस्थियां लेने नहीं आ सकते हैं, इसलिए आप लोग ही अस्थियां रख लो। हम बाद में आकर ले जाएंगे।

डिब्बों थैलों में बंद अस्थियां मोक्ष विसर्जन के इंतजार में रखी हुईं।
डिब्बों थैलों में बंद अस्थियां मोक्ष विसर्जन के इंतजार में रखी हुईं।

कोरोना से 3806 मौतें, इस साल 28 अप्रैल को सबसे ज्यादा 121 मौतें
राजस्थान में कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमण जान पर भारी पड़ रहा है। मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ ही ऑक्सीजन युक्त बेड्स की किल्लत होने लगी है। फेफड़ों में संक्रमण भी तेजी से फैल रहा है। ऐसे में अब प्रदेश में रोजाना 75 से 85 मौत हो रही हैं। 27 अप्रैल को मौतों का रिकॉर्ड टूट गया। 24 घंटे में सबसे ज्यादा 121 मौत हुई। इनमें कल सबसे ज्यादा जोधपुर में 22 और जयपुर में 21 लोगों ने कोरोना से दम तोड़ा।

जयपुर के मोक्षधाम में कोरोना से मृतकों की कई चिताएं एक साथ जलती देखी जा सकती हैं।
जयपुर के मोक्षधाम में कोरोना से मृतकों की कई चिताएं एक साथ जलती देखी जा सकती हैं।

चिता के करीब एक हजार डिग्री सेल्सियस तापमान में मर जाता है वायरस
चिकित्सकों के मुताबिक, वैज्ञानिक शोधों में दावा किया गया है कि कोविड19 वायरस करीब 80 डिग्री तापमान में नष्ट हो जाता है। एक व्यक्ति की चिता में करीब 1000 डिग्री सेल्सियस से भी ज्यादा तापमान होता है। ऐसे में दाहसंस्कार के बाद अस्थियों (फूल) में वायरस होने की गुंजाइश नहीं रहती है। मृतकों के सगे संबंधियों और परिवार के लोगों को चाहिए कि वे चिता जलाने के दौरान भले ही मोक्षधाम में मौजूद नहीं हों, लेकिन बाद में अस्थियों को चुनकर विसर्जित कर सकते हैं।

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