जयपुर में तूफान ने तोड़ा 75 साल का रिकॉर्ड:ताउते से भी तेज थी हवा की रफ्तार, रात का पारा 19 डिग्री से नीचे आया

जयपुर3 महीने पहले

75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आए अंधड़ ने पिछले साल तबाही मचाने वाले चक्रवात ताउते को भी मात दे दी। आंधी-तूफान के साथ बारिश, ओले से आग बरसाने वाली मई में AC जैसी ठंडक हो गई। यह 75 के रिकॉर्ड में पहली बार है जब जयपुर में न्यूनतम तापमान 18.9 डिग्री सेल्सियस रहा। आजादी के बाद सोमवार की रात मई की सबसे ठंडी रात थी। पिछले 10 साल का रिकॉर्ड देखें तो दो बार भी ऐसा रहा जब मई में जयपुर का न्यूनतम तापमान 19 से 20 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज हुआ।

पिछले साल मई महीने में जब अरब सागर में उठे चक्रवाती तूफान ताउते का असर जयपुर में भी पड़ा था, तब जयपुर में 43MM रिकॉर्ड बारिश हुई थी। उस समय लगातार दो-तीन दिन तक तेज बारिश का दौर चला था, लेकिन तब भी तापमान 19 डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं गया था।

सोमवार रात आया तूफान इतना तेज था कि कई जगह टीन शेड उड़ गए।
सोमवार रात आया तूफान इतना तेज था कि कई जगह टीन शेड उड़ गए।

जयपुर मौसम केंद्र के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि कल जिस तरह का थंडर स्टॉर्म एक्टिविटी रही, ये अमूमन कई सालों बाद देखने को मिली है। इस दौरान 75KM से ज्यादा स्पीड की तेज हवाएं चली, जो पिछले साल आए चक्रवात ताउते से भी तेज थीं। चक्रवात ताउते में तूफान की रफ्तार करीब 60 किलोमीटर प्रति घंटा थी।

जयपुर में 2021 में जब ताउते चक्रवात आया था तब 20 मई को न्यूनतम तापमान 19.4 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क गया था। इसी तरह 14 मई 2014 को भी तापमान 19.8 डिग्री सेल्सियस से नीचे गया था।

जयपुर समेत पूरे राजस्थान में जगह-जगह पेड़ गिर गए।
जयपुर समेत पूरे राजस्थान में जगह-जगह पेड़ गिर गए।

इन शहरों में भी रही ठंडक
जयपुर के अलावा सोमवार रात राज्य के 7 शहरों में ठंडक का अहसास हुआ। इसमें अजमेर, पिलानी, सीकर, बूंदी, चूरू, हनुमानगढ़ और अलवर शामिल हैं। सबसे कम 17 डिग्री सेल्सियस तापमान सीकर जिले में रहा। इसके अलावा टोंक, चित्तौड़गढ़, धौलपुर, गंगानगर, नागौर और करौली में न्यूनतम तापमान 20 से 23 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा।

बुधवार से लगेगा नौतपा
ज्योतिषियों के अनुसार बुधवार को ज्येष्ठ कृष्ण दशमी पर सूर्य रोहिणी नक्षत्र पर आएगा, जिसके साथ नौतपा की शुरुआत होगी। ज्योतिषाचार्य विनोद शास्त्री ने बताया कि इस दौरान अगर धरती अच्छे से तपती है तो मानसून अच्छा रहने की संभावना होगी। इस बीच अगर आंधी-बारिश होती है तो आशंका रहती है कि मानसून में बारिश कम होगी। उन्होंने बताया कि आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद और आश्विन इन चार महीनों को मानसून सीजन माना जाता है।

आषाढ़ के पहले पखवाड़े की नौपता के पहले दिन से तुलना की जाती है यानी अगर नौपता का पहला दिन तेज गर्म रहा तो मानिए- आषाढ़ को पहलो पखवाड़े में अच्छी बारिश हो सकती है। इस तरह नौपता के 9 दिन इन चार महीनों के पखवाड़ों के समान माने जाते हैं। नौपता में मौसम कैसा रहेगा उसे देखकर ही भविष्य के मानसून का अंदाजा लगाया जाता है।

प्रदेश के प्रमुख शहरों का सोमवार रात का न्यूनतम तापमान

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