35 हजार में बच जाती 11 जिंदगियां!:आसमानी बिजली हादसे में सरकार की जानलेवा चूक, आमेर महल पर लगा ही नहीं था तड़ित चालक

जयपुर3 महीने पहलेलेखक: गोवर्धन चौधरी
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आकाशीय बिजली हादसे में सरकार की बड़ी चूक सामने आई है। भास्कर की पड़ताल में पता चला कि जयपुर के आमेर महल के जिस वाॅच टावर पर आसमानी बिजली गिरी, उस पर तड़ित चालक लगा ही नहीं था। एक तड़ित चालक पर 35 हजार रुपए का मामूली खर्च ही आता है। सुरक्षा का यह उपाय किया गया होता तो शायद 11 लोगों की जानें बच जातीं। नियमों में भी ऐसा है कि प्रदेश के ऊंचाई पर मौजूद स्मारकों और पर्यटन स्थलों के अलावा ऊंची इमारतों पर तड़ित चालक(थंडर स्टिक) अनिवार्य रूप से लगाया जाना चाहिए।

इस पूरे मामले में सरकारी विभागों की जानलेवा लापरवाही रही है। राजस्थान में बिजली गिरने से जानमाल के नुकसान की यह सबसे बड़ी घटना मानी जा रही है। एक्सपर्ट्स का भी मानना है कि तड़ित चालक होता तो वहां मौतें नहीं होतीं। आमेर किला, नाहरगढ किला, हवामहल सहित राजधानी के ऊंचाई पर मौजूद मॉन्यूमेंट्स पर लाइटनिंग रॉड (तड़ित चालक) नहीं लगे हैं, जबकि नाहरगढ़,आमेर की पहाड़ियों के अलावा राजधानी के सभी पर्यटन स्थल ऊंचाई पर हैं। यहां बारिश के दिनों में बिजली गिरने का खतरा बना रहता है।

बिल्डिंग बायलॉज में है थंडर स्टिक लगाने का प्रावधान

प्रदेश में मल्टीस्टोरी बिल्डिंग्स पर थंडर स्टिक लगाने की अनिवार्यता है। बिल्डिंग बायलॉज में इसका प्रावधान है। राजस्थान सहित सभी प्रदेशों में इसका प्रावधान है, लेकिन इन्हें जांचने की व्यवस्था नहीं है। प्रदेश के मॉन्यूमेंट्स (ऐतिहासिक धरोहर, स्मारक) सरकार के अधीन आते हैं, लेकिन इन पर थंडर स्टिक लगाने की दिशा में कभी ध्यान ही नहीं दिया गया।

घटनास्थल पर मृतकों और घायलों के जूते-चप्पल पड़े रहे।
घटनास्थल पर मृतकों और घायलों के जूते-चप्पल पड़े रहे।

मौसम विभाग के पूर्व डीजी बोले- इमारतों पर तड़ित चालक बहुत जरूरी
इस घटना के बाद प्रदेश के पर्यटक स्थलों और मॉन्यूमेंट्स पर आकाशीय बिजली से बचाव का इंफ्रास्ट्रक्चर लगाने और सावधानियों की तरफ ध्यान खींचा है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक आकाशीय बिजली से बचाव के लिए प्रदेश भर में ऊंची इमारतों, मॉन्यूमेंट्स और पर्यटक स्थलों पर तड़ित चालक लगाने की जरूरत है।

आमेर महल के सामने वॉच टावर पर गिरी बिजली।
आमेर महल के सामने वॉच टावर पर गिरी बिजली।

मौसम विभाग के पूर्व महानिदेशक और अंतर्राष्ट्रीय मौसम ​वैज्ञानिक डॉ. लक्ष्मण सिंह राठौड़ ने भास्कर से कहा, आकाशीय बिजली से जनहानि को रोकने के लिए हमें तीन बातों पर फोकस करना होगा। पहला- जितने भी मॉन्यूमेंट्स हैं, उनके इंफ्रास्ट्रक्चर को रिव्यू करके वहां तड़ित चालक लगाए जाएं। तड़ित चालक आकाशीय बिजली का चार्ज सीधा जमीन में भेज देता है।

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दूसरा अहम बिंदु है जागरूकता का। नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA ) की गाइडलाइन का प्रसार-प्रसार हो। तीसरा बिंदु है- बिजली जनित हादसों से पीड़ितों के रेस्क्यू की नए सिरे से एसओपी तैयार हो। आकाशीय बिजली से घायल अस्पताल जाएं तो जख्म के हिसाब से ही नहीं, मेंटल ट्रॉमा का भी इलाज हो।

थंडर स्टिक (तड़ित चालक)
थंडर स्टिक (तड़ित चालक)

थंडर स्टिक या तड़ित चालक देते हैं सुरक्षा

तड़ित चालक या थंडर स्टिक तांबे की बनी स्टिक होती है। थंडर स्टिक को तांबे या धातु के तार से जोड़ा जाता है। उस तार को जमीन में गाड़ा जाता है। थंडर स्टिक या लाइटनिंग कंडक्टर पर बिजली गिरती है, तो धातु के तार के जरिए उसका चार्ज जमीन में पहुंचा दिया जाता है। इससे उस भवन को नुकसान नहीं पहुंचता। आकाशीय बिजली के खतरे वाले राज्यों में हर सरकारी भवन पर तड़ित चालक लगा रहता है।

मौसम विभाग के पूर्व महानिदेशक व मौसम वैज्ञानिक डॉ. लक्ष्मण सिंह राठौड़।
मौसम विभाग के पूर्व महानिदेशक व मौसम वैज्ञानिक डॉ. लक्ष्मण सिंह राठौड़।

एक से ज्यादा थंडर स्टिक की भी पड़ सकती है जरूरत
एक थंडर स्टिक लगाने में करीब 35 हजार रुपए की लागत आती है। इसकी कीमत राज्यवार अलग-अलग हो सकती है। एक्सपर्ट के मुताबिक, भवन बड़े हों तो एक से ज्यादा थंडर स्टिक लगाने की जरूरत होती है। महल, किलों में कई थंडर स्टिक की जरूरत होती है। घरों में भी सबसे ऊंचे कोने में थंडर स्टिक लगाना जरूरी होता है।

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