6 अक्टूबर तक मेयर बनी रहेंगी शील धाबाई:UDH मंत्री शांति धारीवाल की मंजूरी के बाद स्वायत्त शासन विभाग ने जारी किया आदेश; सौम्या गुर्जर के निलंबन के बाद 7 जून को मिला था प्रभार

जयपुर4 महीने पहले
जयपुर नगर निगम ग्रेटर की कार्यवाहक मेयर शील धाबाई और मंत्री शांति धारीवाल।

जयपुर नगर निगम ग्रेटर की कार्यवाहक मेयर शील धाबाई के कार्यकाल को गहलोत सरकार ने 2 महीने (60 दिन तक) के लिए बढ़ा दिया है। कार्यकाल 6 अगस्त को पूरा हो रहा था। नया आदेश गुरुवार को नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल की मंजूरी मिलने के बाद जारी किया गया। सौम्या गुर्जर को मेयर पद से निलंबित किए जाने के बाद सरकार ने शील धाबाई को 7 जून को कार्यवाहक मेयर बनाया था। नगर पालिका अधिनियम तहत राज्य सरकार 60 दिन के लिए कार्यवाहक महापौर बना सकती है। इसके बाद अगर जरूरत पड़ती है तो उस कार्यकाल को और आगे बढ़ा सकती है। इसी नियम के तहत कार्यकाल आगे बढ़ाया गया है।

यह हुआ था मामला
राज्य सरकार ने ग्रेटर निगम आयुक्त यज्ञमित्र सिंह देव के साथ अभद्रता व मारपीट मामले में 6 जून को पूर्व महापौर सौम्या गुर्जर व पार्षद पारस जैन, अजय चौहान, रामकिशोर प्रजापत और शंकर शर्मा को निलंबित किया था। 7 जून को शील धाभाई को कार्यवाहक महापौर बनाने के आदेश हुए।

सुप्रीम कोर्ट में है मामला
सरकार के निलंबन के फैसले को सौम्या गुर्जर और उनकी पार्टी भाजपा ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रखी है। इस पर 24 अगस्त को सुनवाई प्रस्तावित है। सौम्या की तरफ से लगाई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए राज्य सरकार, स्वायत्त शासन निदेशालय और कार्यवाहक मेयर शील धाभाई को नोटिस जारी कर उनका पक्ष रखने के लिए कहा है। सुप्रीम कोर्ट से पहले सौम्या गुर्जर ने अपने निलंबन के मामले को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने सस्पेंशन ऑर्डर में दखल देने से इनकार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया था।

17 जनप्रतिनिधियों पर गिर चुकी है गाज
जयपुर नगर निगम में मेयर और चार पार्षदों को निलंबित करने का मामला नया नहीं है। मौजूदा गहलोत सरकार के ढाई साल के कार्यकाल में अब तक 17 जनप्रतिनिधियों पर भी गाज गिर चुकी है। इनमें से 16 जनप्रतिनिधि भाजपा के हैं और एक कांग्रेस का। इनमें एक महापौर, नगर परिषदों के 5 सभापति व एक उप सभापति, नगरपालिकाओं के चार अध्यक्ष और चार पार्षद शामिल हैं। हालांकि, अभी अलवर के मामले में सरकार जांच प्रक्रिया में ही अटकी है। भाजपा राज में (1 जनवरी 2015 से दिसंबर 2018 के बीच) 16 जनप्रतिनिधि निलंबित हुए थे, जिसमें 11 कांग्रेस के थे।

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