राजस्थान में कांग्रेस की बढ़त का ट्रेंड ​बरकरार:पंचायत समिति चुनाव के नतीजे गहलोत सरकार के पक्ष में, जनता ने अलार्मिंग सिग्नल भी दिया, भरतपुर-सिरोही के नतीजे कांग्रेस के लिए सियासी चेतावनी वाले

जयपुर3 महीने पहले

पंचायत समित चुनाव के नतीजों में कांग्रेस बढ़त बनाने में कामयाब रही है। सत्ताधारी पार्टी के स्थानीय चुनावों में बढ़त का कांग्रेस ने रिकॉर्ड कायम रखा है। 78 पंचायत समितियों के चुनावों में कांग्रेस 60 फीसदी से ज्यादा जगहों पर प्रधान बना सकती है। कांग्रेस को 23 जगह स्पष्ट बहुमत मिला है। बीजेपी को 14 जगह स्पष्ट बहुमत मिला है, बाकी जगह निर्दलीयों के सहयोग से जोड़तोड़ से प्रधान बनेंगे। ग्रामीण जनता के इस जनमत को प्रेक्षक फिलहाल ​सरकार के पक्ष में मानकर चल रहे हैं। बीजेपी ने कड़ी टक्कर दी है।

जानकारों के मुताबिक, पंचायत चुनावों की इस जीत से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को सियासी तौर पर फायदा मिला है। गहलोत इस जीत को अपनी सरकार के ढाई साल के कामकाज पर जनता की मुहर के तौर पर पेश करेंगे। विपक्ष के आरोपों पर कांग्रेस अब इन नतीजों से जवाब देगी। 77 लाख ग्रामीण मतदाताओं ने अपना रुख साफ कर दिया है। इन नतीजों ने गहलोत सरकार के साथ मंत्री-विधायकों को भी राहत दी है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृह जिले जोधपुर में भी कांग्रेस इज्जत बचाने में कामयाब रही है।

पंचायती राज चुनावों में सत्ता में रहने का फायदा

पंचायत चुनाव के नतीजों को लेकर सियासी जानकारों का मानना है कि कांग्रेस अपनी प्रतिष्ठा बचाने में कामयाब रही है। राजस्थान में कई बार यह ट्रेंड रहा है कि जिस पार्टी की सरकार होती है, लोकल चुनावों में वही जीतती है। हांलाकि पिछले जिला परिषद चुनाव में बीजेपी बढत तमें रही थी इसलिए कई बार यह ट्रेंड टूट जाता है। 1564 पंचायत समिति वार्डों के चुनाव हुए थे। उनमें से 42 फीसदी वार्ड कांग्रेस ने जीते हैं। बीजेपी 35 फीसदी वार्ड ही जीत सकी है।

भरतपुर और सिरोही के नतीजों ने कांग्रेस के लिए बजाया अलार्म

भरतपुर की 12 पंचायत समितियों में कांग्रेस और बीजेपी को एक भी पंचायत समिति में बहुमत नहीं मिला है। भरतपुर में सभी जगह निर्दलीयों का ही बहुमत है। बताया जाता है कि भरतपुर में कांग्रेस विधायकों और मंत्रियों ने रणनीति के तहत अपने समर्थक उम्मीदवारों को बिना कांग्रेस के सिंगल के निर्दलीय लड़वाया और अब प्रधान के चुनाव में कांग्रेस में शामिल करने की रणनीति है। नगरपालिका चुनावों के वक्त भी भरतपुर जिले में कई जगह कांग्रेस ने बिना सिंबल निर्दलीय ही पार्षद लड़वाए थे। सिरोही जिले में केवल आबूरोड पंचायत समिति को छोड़ सब जगह कांग्रेस हार गई है। कांग्रेस समर्थक निर्दलीयों के इलाकों में कांग्रेस साफ हो गई है।

कांग्रेस को मिला बीजेपी पर सियासी हमला करने का मुद्दा

पंचायती राज चुनावों में कांग्रेस को फिलहाल राहत दी है। सियासी नैरेटिव को अपने पक्ष में करने का कांग्रेस के पास एक अच्छा मौका है। बीजेपी पर हमला करने के लिए कांग्रेस को एक बड़ा मुद्दा मिल गया है। कांग्रेस इसे केंद्र सरकार के खिलाफ ग्रामीण जनता के आक्रोश के रूप में पेश कर सकती है। किसान आंदोलन और बढ़ती महंगाई के साथ पेट्रोल-डीजल, गैस की बढ़ती कीमतों से जोड़कर अब कांग्रेस बीजेपी पर और हमलावर रुख अपनाएगी।

बीजेपी में खींचतान का कारण बनेंगे नतीजे

पंचायती राज चुनाव के नतीजों से बीजेपी के भीतर खींचतान तय है। बीजेपी का एक खेमा पंचायती राज चुनाव में कमजोर प्रदर्शन के लिए प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया खेमे पर सवाल उठाएगा। सतीश पूनिया के क्षेत्र में बीजेपी का प्रदर्शन जरूर ठीक रहा, लेकिन प्रदेश स्तर पर प्रदर्शन को लेकर सवाल उठेंगे।

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