आंकड़े नहीं, संक्रमण रोके विभाग:राजस्थान स्टेट की रिपोर्ट में कोरोना से 1293 मौतें, स्थानीय में 1820 दर्ज; हैल्थ विभाग ने 527 मौतें छिपाईं

जयपुरएक वर्ष पहले
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मरीजों के आंकड़े काले और मौत के आंकडे लाल रंग से। - Dainik Bhaskar
मरीजों के आंकड़े काले और मौत के आंकडे लाल रंग से।
  • स्थानीय रिपोर्ट में स्टेट रिपोर्ट के मुकाबले 21,242 मरीज ज्यादा

राजस्थान में कोरोना की तरह इसके आंकड़ों का संक्रमण भी बढ़ता जा रहा है। एक ही विभाग दो-दो तरह की रिपोर्ट जारी कर रहा है। स्थानीय स्तर पर जारी हैल्थ विभाग की रिपोर्ट के आंकड़े कहते हैं- प्रदेश में कोरोना से कुल 1820 मौतें हो चुकी हैं। जबकि राज्य स्तर पर जयपुर से हैल्थ विभाग द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक अब तक कुल 1293 लोगों ने ही कोरोना से दम तोड़ा है।

बड़ा सवाल ये है कि आखिर 527 मौतों का सच क्यों छिपाया जा रहा है? जबकि कोरोना छिपाने की नहीं, बताने की बीमारी है। यही नहीं, मरीजों की संख्या के आंकड़ों में भी स्थानीय रिपोर्ट और स्टेट रिपोर्ट में बड़ा अंतर है।

स्थानीय रिपोर्ट की मानें तो प्रदेश में अब तक 1,30,715 लोग संक्रमित हो चुके हैं। वहीं, स्टेट रिपोर्ट के हिसाब से कुल मरीजों का आंकड़ा 1,09,473 है। यानी स्टेट रिपोर्ट में 21,242 संक्रमित कम दिखाए गए हैं।

क्या कहता है हैल्थ विभाग

भास्कर ने जब स्टेट और स्थानीय रिपोर्ट के आंकड़ों में अंतर को लेकर हैल्थ विभाग के आला अफसरों से सवाल किया तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि हम स्थानीय आंकड़ों का विश्लेषण करते हैं, जब वे पूरी तरह सही पाए जाते हैं, तभी उन्हें शामिल किया जाता है। कई बार आंकड़े बाद में भी अपडेट किए जाते हैं।

स्थानीय सीएमएओ ने कहा, हम सही आंकड़े ही भेजते हैं

भास्कर ने जब स्थानीय सीएमएचओ से पूछा कि राज्य स्तर पर कोरोना के आंकड़े कैसे जांचे जाते हैं, तो उनका जवाब था कि हमें ये तो नहीं पता लेकिन हम अपनी ओर से बिल्कुल सही आंकड़े ही भेजते हैं। हालांकि, अधिकांशत: समय से सूची न पहुंचने के कारण मरीजों की संख्या व मौतें उसी दिन अपडेट नहीं हो पातीं, जो बाद में शामिल की जाती हैं।

स्थानीय रिपोर्ट में कुल 1.30 लाख रोगी, जबकि स्टेट रिपोर्ट में 1.09 लाख मरीज

मौतों के आंकड़ों में ही नहीं बल्कि मरीजों की संख्या में भी स्थानीय और स्टेट रिपोर्ट में 21 हजार से ज्यादा मरीजों का भारी अंतर आ रहा है। स्थानीय रिपोर्ट कहती है कि प्रदेश में अब तक कुल 1,30,715 मरीज सामने आ चुके हैं, जबकि स्टेट रिपोर्ट में यह आंकड़ा 1,09,473 ही है।

गौर करने वाली बात ये भी मरीजों का ये आंकड़ा दोनों ही जगह हैल्थ विभाग की ओर से ही जारी किया जा रहा है। इसके बावजूद यह अंतर व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। आखिर किस आंकड़े को सच माना जाए और किसे गलत? लोगों के लिए समझना मुश्किल है।

जयपुर, कोटा, अजमेर, भरतपुर में स्थानीय रिपोर्ट बैन है...वरना ये आंकड़े और बढ़ जाते

भास्कर ने कोटा में 24 घंटे के संक्रमितों के आंकड़े में बड़े अंतर को उजागर किया था। उसके बाद कोटा, जयपुर, अजमेर और भरतपुर में स्थानीय रिपोर्ट जारी करने पर ही बैन लगा दिया गया। बता दें कि 30 अगस्त को भास्कर ने सवाल उठाया था कि कोटा में 711 मरीज मिले या 200 रोगी।

क्योंकि स्टेट रिपोर्ट के हिसाब से कोटा में 200 संक्रमित मिले थे, जबकि स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक यह आंकड़ा 711 तक पहुंच गया था। यानी तीन गुने से भी ज्यादा का अंतर। अगर एक दिन में यह अंतर था, तो कोरोनाकाल के 6 माह में कितना अंतर होगा।

एक्सपर्ट से समझें : कोरोना के आंकड़े छिपाना गलत क्यों और बताना सही क्यों?

  • यदि आप कोरोना को छिपाते हैं तो खुद के साथ परिवार के सदस्यों को भी खतरे में डाल रहे हैं।
  • ये परिवार के सदस्य ही कॉलेज, ऑफिस, बाजार में जाते हैं और सैकड़ों लोगों से मिलते हैं। यहां वे और लाेगों को बीमारी देंगे और सुपर स्प्रेडर्स का काम करेंगे।
  • कोरोना एक ड्रॉपलेट इंफेक्शन है।
  • पर्सन टू पर्सन तेजी से फैलता है।
  • परिस्थितियां व मौसम ऐसा है कि सर्दी, खांसी, जुकाम और बुखार के केस तेजी से बढ़ रहे हैं।

भास्कर एक्सपर्ट पैनल: डॉक्टर अजीत सिंह, (मेडिसिन), डॉ. प्रवीण मंगलूनिया, (मेडिसिन), डॉ. सतीश जैन (ईएनटी स्पेशलिस्ट)

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