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आतंकियों की इनसाइड स्टोरी:गोधरा और भरतपुर में हुए दंगों का बदला लेने के लिए रच रहे थे राजस्थान में आतंक की साजिश

जयपुरएक महीने पहले
जयपुर की जिला कोर्ट में मंगलवार शाम को सजा सुनाते वक्त दोषियों को कोर्ट रूम में भारी सुरक्षा बंदोबस्त के बीच ले जाया गया।
  • राजस्थान की ATS और SOG पुलिस ने वर्ष 2014 में आईएम के 12 आतंकियों को पकड़ा था
  • जयपुर, सीकर व जोधपुर में शॉपिंग मॉल, राष्ट्रीय स्मारकों की रैकी कर आतंकी घटना की रची थी साजिश

जयपुर की जिला कोर्ट ने मंगलवार को सिमी के 12 को आतंकियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। ये सभी सभी इंजीनियरिंग के स्टूडेंट्स थे और इन पर आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन के लिए काम करने का आरोप था। इन आतंकियों ने गोधरा कांड और भरतपुर के गोपालगढ़ में हुए दंगों का बदला लेने के लिए राजस्थान में आतंकी घटना को अंजाम देने की साजिश रची थी। लेकिन, 2014 में इनकी ये साजिश बेनकाब हो गई।

2014 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल से मिले इनपुट के बाद राजस्थान की ATS और SOG ने इन्हें पकड़ा था। टीम ने झोटवाड़ा व प्रताप नगर और सीकर से IM नेटवर्क से जुड़े 13 युवकों को पकड़ कर उनके मंसूबों को नाकाम कर दिया। पिछले करीब ढाई महीने से चली लगातार बहस के बाद मंगलवार को जिला जज ने 12 आरोपियों को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके अलावा एक जने को साक्ष्यों के अभाव में एक आरोपी को बरी कर दिया।

कोर्ट ने 7 साल पहले पकडे़ गए 13 में से 12 इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स को आतंकी माना

जयपुर की जिला कोर्ट में पुलिस सुरक्षा में राजस्थान के गुनाहगार
जयपुर की जिला कोर्ट में पुलिस सुरक्षा में राजस्थान के गुनाहगार

दिल्ली में पकड़े गए मोहम्मद वकास ने किया था खुलासा
राजस्थान सरकार की तरफ से लोक अभियोजक लियाकत खान ने बताया कि दिल्ली में 54/2011 में आतंकी गतिविधियों के खिलाफ एक मुकदमा दर्ज हुआ था। जिसमें मोहम्मद वकास ने पूछताछ में खुलासा किया था कि इंडियन मुजाहिदीन के तहसीन भटकल और यासीन भटकल ने जयपुर में कुछ लोगों को बम बनाने की ट्रेनिंग दी है। जो कि आतंकी घटनाओं को अंजाम दे सकते हैं। तब राजस्थान एसओजी में 22 मार्च 2014 मुकदमा दर्ज हुआ। उसके बाद एसओजी के एएसपी अनंत कुमार ने मामले की जांच शुरू की।

केस ऑफिसर स्कीम के तहत अनुसंधान पूरा किया, 175 गवाह और 500 से ज्यादा सबूत

इस केस में कार्रवाई करते हुए ATS और SOG पुलिस ने जयपुर व सीकर से इंडियन मुजाहिदीन के नेटवर्क से जुड़े 13 युवकों को पकड़ा गया। जिनमें ज्यादातर इंजीनियरिंग स्टूडेंट थे। इनको बम बनाने की ट्रेनिंग दी जा रही थी। इस मामले को केस ऑफिसर स्कीम के तहत लेकर ATS के पुलिस इंस्पेक्टर रमेश पारीक को केस ऑफिसर अनुसंधान अधिकारी बनाया गया। इस केस में अभियोजन पक्ष ने आरोपियों के खिलाफ 175 गवाह करवाए। 506 से ज्यादा सबूत इकट्‌ठा कर कोर्ट को सौंपे गए। करीब ढाई महिने से केस में बहस की। इस पर आज जिला जज उमाशंकर व्यास ने फैसला सुनाया।

बीच में ही छोड़ दी इंजीनियरिंग की पढ़ाई

  • माे. सज्जाद (सीकर) : वकार और आकिब ने अपने साथ जोड़ा।
  • मो. आकिब (सीकर) : निजी कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग कर रहा था। पहले मारूफ फिर वकार के संपर्क में आया। मुंबई में ट्रेनिंग ली। मारूफ के साथ मिल सीकर के कई जगह के नक्शे बनाए।
  • मोहम्मद उमर (सीकर) : काेटा में रहकर मेडिकल की तैयारी कर रहा था। मारुफ व जोधपुर में पकड़ा गया बरकत इसके परिवार से हैं।
  • अब्दुल वाहिद गौरी (सीकर): तहसील के सामने टाइपिस्ट का काम करता था। नक्शे बनाने का काम जानता था। इसी ने नक्शे बनाए।
  • मोहम्मद वकार (सीकर) : आतंकियों के संपर्क में आते ही सिविल इंजीनियरिंग डिप्लोमा की पढ़ाई बीच में छोड़ दी थी।
  • अब्दुल माजिद (सीकर): महज 21 साल की उम्र में स्लीपर सेल से जुड़ गया। आतंकियों के लिए कहने पर कुछ भी कर सकता था।

जोधपुर में तैयार कर लिया था आईएम का बड़ा नेटवर्क

  • अशरफ अली खान (जाेधपुर) : त्रिपोलिया बाजार स्थित अशरफ का हीरा गोल्ड ऑफिस दो साल तक आतंकियों का अड्‌डा बना रहा। यहीं पर मारूफ, अमार, वकार अजहर आते और रुकते थे। जोधपुर शहर के युवकों से भी साजिशों पर मंथन किया जाता था। अशरफ व साकिब ने आईएम नेटवर्क तैयार किया। मंडोर में शपथ दिलाई।
  • मो. साकिब अंसारी (जाेधपुर): प्रताप नगर थानांतर्गत बरकतुल्लाह कॉलोनी निवासी मोहम्मद साकिब कंप्यूटर का जानकार था। रियाज भटकल के कहने पर साकिब ने मारूफ के लिए 12 जून 2013 को एक एंड्रायड फोन व सिम खरीदा और इसके लिए रियाज ने पाक से ही अभिजीत नाम का फर्जी आईडी कार्ड काम में लिया था।
  • बरकत अली (जाेधपुर) : बरकत अली तेली कंस्ट्रक्शन ठेकेदारी करते हुए आतंकियों के संपर्क में आया था। उसे आकाओं ने आतंकी गतिविधियों के लिए पैसा देने का काम दिया गया। रियाज के कहने पर मारूफ ने जेहाद का चंदा एकत्र करना शुरू किया। साकिब के साथ बरकत ने भी तालमहल व लाल किले की रैकी की थी।

पाकिस्तान से जुड़े थे तार, 6 नामजद आरोपी चल रहे हैं फरार
एसओजी ने स्लीपर सेल में शामिल 6 लोगों को नामजद कर उनके खिलाफ केस को पैंडिंग रखा गया। जब उनकी गिरफ्तारी होगी, तब उनके खिलाफ अनुसंधान किया जाएगा। पकड़े गए संगठन के तार पाकिस्तान से जुड़े हुए थे। दिल्ली में हुई पूछताछ के बाद ये खुलासे हुए थे। इनके कब्जे से भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री व बम बनाने के उपकरण बरामद किए गए थे।

वर्ल्ड ट्रेड पार्क सहित शॉपिंग मॉल्स, मंदिर व राष्ट्रीय स्मारक निशाने पर थे
इन्होंने आतंकी वारदातों को अंजाम देने के लिए जयपुर में मुख्य मंदिर, राष्ट्रीय इमारतों व शॉपिंग मॉल सहित कई नामी जगहों की रैकी की थी। इनमें जेएलएन मार्ग मालवीय नगर स्थित एक शॉपिंग मॉल भी शामिल था। लेकिन पहले ही ये स्लीपर सेल पकड़ा गया। यहीं पर इंडियन मुजाहिदीन की स्लीपर सेल को एक्टिव कर नए लड़कों को तैयार किया गया था। इनमें ज्यादातर इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स थे, ताकि वे तकनीक की जानकारी रखने से आसानी से बम बनाकर तैयार कर सकें।

लोक अभियोजक लियाकत खान ने बताया कि पुलिस के अनुसंधान में पूछताछ के दौरान ऐसे मैसेज सामने आए। जिनको डपलप करने पर पता चला कि गुजरात में 2002 के गोधरा कांड के बाद हुए दंगे और राजस्थान के भरतपुर जिले में करीब 8 साल पहले गोपालगढ़ के दंगों को बदला लेने के लिए बम ब्लास्ट करने की साजिश कर रहे थे। इसके लिए जयपुर, जोधपुर और सीकर को चुना गया था।

जिला अदालत ने 12 आतंकियों को सुनाई यह सजा:
अदालत ने मंगलवार को फैसला सुनाते हुए धारा 121 यानी देशद्रोह के तहत सभी 12 आतंकियों को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया है। विस्फोटक अधिनियम के तहत दर्ज मुकदमों में भी दोषी मानते हुए 10 साल की सजा सुनाई है। इसके अलावा यूएपी एक्ट में भी सभी 12 दोषियों को 10 साल की सजा का फैसला सुनाया है।

इसके अलावा धारा 121 के तहत सभी को एक लाख रुपए का जुर्माना व अन्य धाराओं में दर्ज मुकदमों में 50-50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। इसके अलावा जुर्माना नहीं जमा कराने पर एक साल के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतने का फैसला सुनाया। अभियोजन पक्ष ने धारा 121 के तहत आजीवन कारावास की सजा देने मांग की थी।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ढाई माह से नियमित सुनवाई हो रही थी
लोक अभियोजक लियाकत अली खान ने बताया कि 178 गवाहों के बयान दर्ज कराए थे, 500 से ज्यादा दस्तावेजों को प्रदर्श करवाया था। सुप्रीम कोर्ट ने एक आरोपी की एसएलपी पर 26 मई 2020 को केस में ट्रायल जल्द कर फैसला देने के लिए कहा था। ढाई माह से नियमित सुनवाई हो रही थी। कोर्ट ने 12 अभियुक्तों को आईपीसी की धारा 121 यानी देश के खिलाफ युद्द करना या युद्द करने के प्रयास में उम्रकैद की सजा दी है।

वहीं आईपीसी की धारा 121 ए, 122, 465, 468, 471 और 120बी के साथ ही विधि विरूद्ध क्रियाकलाप निवारण अधिनियम की धारा 16, 17, 18, 18ए, 18बी, 19, 20 और 23 एवं विस्फोटक अधिनियम की धारा 4, 5 और धारा 6 के तहत भी कैद व जुर्माने की सजा दी हैं। ये सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

सीधे सबूत नहीं थे, इलेक्ट्राॅनिक गैजेट से डेटा निकालकर सबूत जुटाए : आईओ
मामले के जांच अधिकारी आरपीएस अनंत कुमार अभी एएसपी मुख्यालय उदयपुर में तैनात हैं। तब एटीएस में थे। बोले- केस में सीधे एविडेंस नहीं थे। आरोपियों से इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं बरामद की गईं। डेटा निकलवाया। उन्होंने भरतपुर, आगरा, पाली, जयपुर, जोधपुर सहित कुछ अन्य जगहों से सामग्री खरीदी थी। इनके विदेशियों से चैट, पहचान परेड समेत अन्य जानकारी व एफएसएल रिपोर्ट सहित अन्य एविडेंस जुटाए। फिर 180 दिन के पहले ही 5500 पेज का चालान पेश कर दिया।

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