प्रियंका के नजदीकी नेता ने की पायलट की पैरवी:आचार्य प्रमोद कृष्णम बोले- राजस्थान में भी होना चाहिए बदलाव, 2018 में सचिन पायलट के साथ नाइंसाफी हुई, उन्हें सीएम बनना चाहिए

जयपुरएक महीने पहले

पंजाब में मुख्यमंत्री बदलने के बाद अब उसका असर राजस्थान की सियासत पर भी पड़ने लगा है। पंजाब में हुए बदलाव के बाद राजस्थान में अब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के विरोधी खेमे को मुखर होकर आवाज उठाने का मौका दे दिया है। प्रियंका गांधी के नजदीकी यूपी कांग्रेस के नेता और कल्कि पीठाधीश आचार्य प्रमोद कृष्णम ने पंजाब की तर्ज पर राजस्थान में भी सीधे मुख्यमंत्री बदलने की मांग की है। इससे सियासी हलचल बढ़ गई है। पायलट खेमे के नेता दबी जुबान में मुख्यमंत्री बदलने की मांग करते रहे हैं, लेकिन आचार्य प्रमोद खुलकर पायलट की पैरवी कर रहे हैं।

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा- मैं कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भावनाओं की बात कर रहा हूं। राजस्थान के कार्यकर्ताओं में यह चर्चा आम है कि पायलट के साथ नाइंसाफी हुई। सचिन पायलट ने नेतृत्व का आश्वासन मान कर काम किया। आज तक पायलट ने हाईकमान के हर निर्देश का पालन किया है।

गहलोतजी ने कहा था नए लोग आगे आएं, अब उन्हें अपने बयान का मान रखना चाहिए
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने भास्कर से कहा कि सचिन पायलट ने राहुल गांधी से तीन घंटे मुलाकात की है, यह बहुत कुछ कहती है। पूरे देश में बदलाव की बयार है, यह रुकनी नहीं चाहिए और रुकेगी भी नहीं। परिवर्तन संसार का नियम है, न कोई हमेशा सीएम बना रह सकता है न ही पीएम। लोग आते जाते रहते हैं। बीजेपी जब पांच-पांच मुख्यमंत्री बदल सकती है तो कांग्रेस क्यों नहीं? अशोक गहलोत बहुत सम्मानित नेता हैं। उन्होंने खुद कहा था कि नए लोग आगे आएं, गहलोत जी को अब अपने बयान का मान रखना चाहिए।

पायलट को छोड़ सभी प्रदेशाध्यक्षों को मुख्यमंत्री बनाया
प्रमोद कृष्णम ने कहा कि राजस्थान में 2018 का विधानसभा चुनाव हुआ था तो सचिन पायलट राजस्थान कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष थे। अशोक गहलोत भी उस वक्त पार्टी में बड़े और जिम्मेदार ओहदे पर थे। वे वरिष्ठ नेता हैं, आज मुख्यमंत्री हैं, अशोक जी की कार्यप्रणाली में कहां गुरेज है? 2018 में पायलट राजस्थान कांग्रेस के तो मध्यप्रदेश में कमलनाथ, छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल प्रदेशाध्यक्ष थे, पंजाब चुनाव से पहले कैप्टन अमरिंदर प्रदेशाध्यक्ष थे। सचिन पायलट को छोड़कर सारे राज्यों में उस समय के प्रदेशाध्यक्षों को मुख्यमंत्री बनाया। राजस्थान में सचिन पायलट का हक था।

पायलट ने केंद्रीय नेतृत्व की बात मानकर त्याग किया
प्रमोद कृष्णम ने कहा कि विधानसभा चुनावों की जीत के बाद मुख्यमंत्री बनना सचिन पायलट का हक था। सचिन पायलट ने कांग्रेस नेतृत्व की बात मानकर उस समय त्याग किया। यह सचिन पायलट का बलिदान था, उस वक्त उनके साथ नाइंसाफी हुई। आज कांग्रेस के कार्यकर्ता मानते हैं कि सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनना चाहिए। प्रमोद कृष्णम ने सचिन पायलट के जन्मदिन पर भी 7 सितंबर ट्वीट कर इशारों में उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की मांग की थी। उस समय लिखा था परिवर्तन की बयार है, उपहार तैयार है, शुभ घड़ी का इंतजार है।

कांग्रेस में अब खेमेबंदी तेज होने के आसार
पंजाब के बाद अब राजस्थान में भी खेमेबंदी तेज होने के आसार हैं। राजस्थान में बदलावों की शुरूआत मंत्रियों और पार्टी पदाधिकारियों से होने की संभावना है। पहले मंत्री बदलेंगे और पार्टी में खाली पदों पर नियुक्तियां होंगी। इसके बाद टॉप लेवल पर बदलाव की संभावना है। सरकार और संगठन में पदों को लेकर आगे खींचतान और बढ़ने के आसार बन रहे हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खेमा राजस्थान के सियासी हालात को अलग बताकर किसी भी तरह के बदलाव को सिरे से नकार रहा है। सचिन पायलट समर्थक नेता बदलाव की पैरवी कर रहे हैं।

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