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केंद्र और राज्य के बीच त्रिपक्षीय करार:देश को खनिज क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में राजस्थान का बड़ा योगदान : गहलाेत

जयपुर3 महीने पहले
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केंद्र और राज्य के बीच त्रिपक्षीय करार पर हस्ताक्षर के दौरान मुख्यमंत्री गहलोत। - Dainik Bhaskar
केंद्र और राज्य के बीच त्रिपक्षीय करार पर हस्ताक्षर के दौरान मुख्यमंत्री गहलोत।
  • पोटाश खनन से बीकानेर, हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर क्षेत्र में आएगी खुशहाली
  • सीएम बोले- पोटाश से प्रदेश को मिलेगी नई पहचान

राजस्थान में पोटाश के भंडार के व्यावहारिक अध्ययन के लिए गुरुवार को केंद्र और राज्य के बीच त्रिपक्षीय करार पर हस्ताक्षर हुए। इस दौरान सीएम अशाेक गहलोत ने कहा- देश को खनिजों के मामले में आत्मनिर्भर बनाने में राजस्थान का बड़ा योगदान है।

राजस्थान खनिजों का खजाना है। हमारा प्रयास है कि इनका समुचित दोहन हो और राजस्थान खनन के क्षेत्र में नंबर वन राज्य बने। इसके लिए प्रदेश की खनिज संपदा की खोज के लिए कंसलटेंट नियुक्त भी किया जाएगा। गहलोत ने कहा कि पोटाश के मामले में अभी हमारा देश पूरी तरह आयात पर निर्भर है।

हर साल करीब 5 मिलियन टन पोटाश के आयात पर लगभग 10 हजार करोड़ रूपए की विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है। राजस्थान के गंगानगर, हनुमानगढ़ एवं बीकानेर क्षेत्र में फैले पोटाश के भंडारों से हम इस खनिज के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकेंगे। आज हुआ एमओयू पोटाश के खनन की दिशा में बढ़ा कदम साबित होगा।

पोटाश के बारे में वह सबकुछ जो आपका जानना जरूरी है

  • कहां होता है : कनाड़ा, रूस, बेला रूस, चीन, इजरायल में होता है।
  • भारत में उत्पादन : देश में पोटाश कहीं नहीं होता। हालांकि, 2015 में कुल 22,508 अरब टन भंडार का अनुमान लगाया था, जिसमें राजस्थान का योगदान 95% है। अभी हर साल करीब 5 अरब टन पोटाश आयात करते हैं। इस पर 10,000 करोड़ की विदेशी मुद्रा का भार आता है।
  • लाभ क्या होगा : पाेटाश खनन में बीकानेर, गंगानगर और हनुमानगढ़ में उरर्वक उद्योग, ग्लास उद्योग आएंगे, जिससे राेजगार आसपास के लाेगाें काे राेजगार मिलेगा। रायल्टी के ताैर पर केंद्र और राज्य सरकार की आय बढ़ेगी।
  • पोटाश की कहां जरूरत पड़ती है : कृषि के क्षेत्र में पोटाशयुक्त उर्वरक की जरूरत पड़ती है।

वैक्सीनेशन साइट्स की संख्या 167 सेे बढ़कर 350 हाेगी : सीएम
जयपुर। सीएम अशाेक गहलोत ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्यकर्मी उत्साह के साथ खुद आगे आकर कोरोना की वैक्सीन लगवा रहे हैं। टीकाकरण के राष्ट्रीय औसत के मुकाबले राजस्थान आगे है और अब तक वैक्सीनेशन पूरी तरह सुरक्षित रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा किए गए मूल्यांकन में राजस्थान देश का एकमात्र राज्य है जो टीकाकरण के सभी मानकों पर बेहतर प्रदर्शन के कारण ग्रीन कैटेगरी में है।

उन्होंने निर्देश दिए हैं कि भारत सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक प्रदेश में वैक्सीनेशन साइट की संख्या बढ़ाकर प्रथम चरण का टीकाकरण जल्द से जल्द पूरा किया जाए। गहलोत गुरूवार को मुख्यमंत्री निवास पर वीसी के माध्यम से टीकाकरण अभियान की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने रविवार से वैक्सीनेशन साइट की संख्या 167 सेे बढ़ाकर 350 करने और जरुरत के अनुरूप इनकी संख्या और बढ़ाने के निर्देश दिए। सीएम ने कहा कि विशेषज्ञाें की राय में कोरोना का खतरा पूरी तरह टला नहीं है। ऐसे में हमारे हैल्थ वर्कर्स का शत-प्रतिषत टीकाकरण जल्द से जल्द होना जरूरी है ताकि भविष्य में कोरोना की नयी लहर आए तो वे पूरी सुरक्षा एवं आत्मविश्वास के साथ लाेगाें के जीवन की रक्षा कर सकें।

अनुमत 10 प्रतिशत मात्रा के विरुद्ध प्रदेश में मात्र 3.40 प्रतिशत ही वेस्टेज
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के शासन सचिव सिद्धार्थ महाजन ने बताया कि भारत सरकार की गाइडलाइन में विभिन्न कारणों से वैक्सीन की 90% मात्रा के उपयोग का लक्ष्य निर्धारित किया गया है लेकिन राजस्थान में अभी तक 96.59 प्रतिशत वैक्सीन का उपयोग किया है। प्रदेश में वैक्सीन का वेस्टेज प्रतिशत मात्र 3.40 रहा है।

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