REET पेपर जिसको मिला, उसी ने बेचा:40 लाख से लेकर 3 लाख तक में बिका, 20 दिन में 20 गिरफ्तार, मास्टरमाइंड अब भी फरार

जयपुर2 महीने पहलेलेखक: विष्णु शर्मा, विक्रम सिंह सोलंकी

REET 2021 परीक्षा लीक का असली मास्टरमाइंड अब तक सामने नहीं आ सका है। एसओजी की जांच में रोज नए खुलासे आ रहे हैं और रोजाना नए चेहरे सामने आ रहे हैं। 20 दिनों में एसओजी ने पेपर लीक में जुड़े जेईएन से लेकर हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल तक 20 चेहरों को बेनकाब कर दिया है। जो पेपर 40 लाख से बिकने शुरू हुआ, वो अंत तक 3 लाख तक पहुंच गया, लेकिन अब भी बड़ा सवाल बना हुआ है कि आखिरकार भर्ती परीक्षा का मुख्य मास्टरमाइंड कौन है।

एसओजी की जांच में रोजाना एक-एक कड़ी खुलती जा रही है। जांच में अब सामने आया है कि भजनलाल ने ही पृथ्वीराज को एक दिन पहले वॉट्सऐप पर पेपर दिया था। भजनलाल पश्चिमी राजस्थान में नकल कराने वाली कई बड़ी गैंग से जुड़ा हुआ है। कांस्टेबल भर्ती से लेकर कई भर्तियों में नाम आ चुका है। पेपर कहां से और कैसे लीक कराया, ये अभी क्लियर नहीं है। एसओजी भजनलाल को पकड़ने के लिए दबिश दे रही है। एसओजी ने पृथ्वीराज, बत्तीलाल, रवि मीना, रवि पागड़ी, शिवदास मीना को रिमांड पर ले रखा है।

26 सितंबर को गंगापुर सिटी में सेंटर से पेपर लीक का खुलासा हुआ। अब तक आरोपियों के पकड़ने का सिलसिला जारी है। दैनिक भास्कर ने अब तक की जांच में पकड़े गए आरोपियों का रिकॉर्ड खंगाला। चौंकाने वाली बात है कि पेपर लीक होने के बाद आगे जान-पहचान के आधार पर आगे बढ़ता ही चला गया। पेपर लीक प्रकरण में किस-किस की क्या भूमिका रही…

भजनलाल फिलहाल फरार है। जो अब तक मास्टरमाइंड माना जा रहा है।
भजनलाल फिलहाल फरार है। जो अब तक मास्टरमाइंड माना जा रहा है।

भजनलाल बिश्नोई : जालोर का रहने वाला है। कांस्टेबल से लेकर कई भर्तियों के पेपर लीक में नाम सामने आ चुका है। डमी कैंडिडेट बैठाने पर एक बार पकड़ा भी जा चुका है। अब तक की जांच में पता लगा कि भजनलाल ने पेपर लीक किया था। उसने ही पृथ्वीराज को वॉट्सऐप पर पेपर दिया था। दोनों के बीच में 40 लाख रुपए में डील हुई थी, लेकिन बाड़मेर और जालोर में किस-किस को पेपर बेचा गया, भजनलाल के पकड़े जाने पर ही खुलासा होगा।

बत्तीलाल और पृथ्वीराज इन्होंने भजनलाल से मिले पेपर को आगे पहुंचाया।
बत्तीलाल और पृथ्वीराज इन्होंने भजनलाल से मिले पेपर को आगे पहुंचाया।

पृथ्वीराज मीणा : भजनलाल का नाम सामने आने से पहले पृथ्वी को ही मास्टरमाइंड माना जा रहा था। इसे आगरा से पकड़ा गया है। यह सवाईमाधोपुर में आदलवाड़ा का रहने वाला है। पश्चिमी राजस्थान में 10 साल तक नरेगा में नौकरी की। नेटबंदी के पहले ही पेपर को बत्तीलाल को वॉट्सऐप पर भेज दिया। वह नरेगा में जेईएन है। उसकी गत अप्रैल से सवाईमाधोपुर में पोस्टिंग है।

बत्तीलाल मीणा : पेपर लीक का खुलासा होने पर बत्तीलाल को ही मास्टरमाइंड माना जा रहा था। यह सवाईमाधोपुर में एचेर का रहने वाला है। नेटबंदी से पहले ही पृथ्वीराज ने वॉट्सऐप कॉल किया था। बत्तीलाल ने 3 से 12 लाख रुपए में डील कर आगे पेपर बेचा। पहले संजय मीणा और आशीष मीणा को पेपर भेजा। बत्तीलाल कई नेताओं का करीबी है। बत्तीलाल ने जब पेपर लीक किया। तब लोकेशन जयपुर थी। इसे उत्तराखंड से गिरफ्तार किया था।

देशराज मीना : 26 सितंबर को सबसे पहले गंगापुर में देशराज मीना की गिरफ्तारी हुई। वह 15 लाख रुपए में पेपर का सौदा करते हुए गिरफ्तार हुआ था। इनके बीच वॉट्सऐप पर चैटिंग और कॉल होना सामने आया। 15 लाख रुपए में पेपर का सौदा कर रहे दलाल देशराज का संपर्क पुलिस कांस्टेबल देवेंद्र सिंह, हेड कांस्टेबल यदुवीर सिंह और सवाईमाधोपुर के रहने वाले आशीष मीणा नाम के युवक के मोबाइल को सर्विलांस पर ले रखा था।

संजय मीणा।
संजय मीणा।

संजय मीणा : एसओजी ने देवेंद्र और यदुवीर गुर्जर से पूछताछ के बाद जयपुर में जगतपुरा से संजय मीणा को गिरफ्तार किया। बत्तीलाल ने ही आरोपी संजय मीणा को रीट का पेपर उपलब्ध करवाया था। संजय मीणा सवाईमाधोपुर जिले में मलारना डूंगर के पास का रहने वाला था। संजय मीणा ने गंगापुर सिटी में कांस्टेबल देवेंद्र गुर्जर को पेपर उपलब्ध करवाने के लिए दिलखुश नाम के युवक से मिलने को कहा था।

दिलखुश मीणा
दिलखुश मीणा

दिलखुश मीणा : दिलखुश मीणा ने आशीष के जरिए कांस्टेबल देवेंद्र गुर्जर को पेपर और आंसर-की उपलब्ध करवाई। संजय मीणा की गिरफ्तारी के बाद दिलखुश मीणा और एक नाबालिग को सवाईमाधोपुर में 26 सितंबर को पकड़ा गया। दिलखुश गिरोह के मास्टरमाइंड बत्तीलाल के साथी संजय मीणा के गांव भारजा नदी, मलारना डूंगर, सवाईमाधोपुर का रहने वाला है। संजय मीणा ने ही दिलखुश को पेपर उपलब्ध करवाया था। पेपर मिलने की खुशी में वह उत्तर ही नहीं लिख सका।

कांस्टेबल देवेंद्र गुर्जर और हेड कांस्टेबल यदुवीर गुर्जर
कांस्टेबल देवेंद्र गुर्जर और हेड कांस्टेबल यदुवीर गुर्जर

कांस्टेबल देवेंद्र गुर्जर और हेड कांस्टेबल यदुवीर गुर्जर
26 सितंबर को रीट लेवल 2 की परीक्षा सुबह 10 बजे से थी, लेकिन करीब डेढ़ घंटे पहले ही सुबह 8 बजकर 32 मिनट पर पेपर कांस्टेबल देवेंद्र गुर्जर के पास आ गया। उसकी पत्नी लक्ष्मी गुर्जर एग्जाम में बैठी थी। उसने ही हेड कांस्टेबल यदुवीर सिंह को पेपर दे दिया था। उसकी पत्नी सीमा गुर्जर भी शामिल थी। हेड कांस्टेबल यदुवीर सिंह के साथ सरकारी क्वार्टर में बैठकर पेपर सॉल्व किया था।

आशीष मीणा : भारजा नदी, सवाईमाधोपुर के रहने वाले आशीष मीणा ने अपनी दोनों बहनों ऊषा और मनीषा के लिए पेपर लिया। आशीष ने परीक्षा केंद्र के समीप ही अपनी दोनों बहनों को कार में नकल करवाई। बत्तीलाल ने आशीष को भी पेपर भेजा था। नेट बंद होने से आशीष ने कांस्टेबल देवेंद्र को गंगापुर सिटी में ही करौली रेलवे फाटक पर बुलाया। कांस्टेबल देवेंद्र ने अपने मोबाइल फोन से आशीष के मोबाइल फोन में मौजूद पेपरों की फोटो खींची। देवेंद्र के मोबाइल फोन में पेपर के 33 फोटो मिले।

रवि और शिवा चाकेरी। इन्हें भी पेपर लीक के मामले में गिरफ्तार किया गया।
रवि और शिवा चाकेरी। इन्हें भी पेपर लीक के मामले में गिरफ्तार किया गया।

शिवा चकेरी : बत्तीलाल का सबसे नजदीकी है। सवाईमाधोपुर में बाबा गैंग का सदस्य है। बीटेक तक पढ़ाई कर चुका है। जयपुर में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है। इसे बत्तीलाल के साथ उत्तराखंड में केदारनाथ से गिरफ्तार किया गया।

रवि पागड़ी : यह पृथ्वीराज मीणा का काफी करीबी है। बिजली विभाग में हैल्पर है। अभ्यर्थियों से पेपर उपलब्ध करवाने के लिए सौदा करता था। गैंग के साथी रवि जीनापुर के निजी स्कूल में परीक्षार्थियों को लेकर पहुंचा। वहां परीक्षा से पहले पेपर सॉल्व करवाया।

रवि जीनापुर : निजी स्कूल संचालक है। स्कूल में परीक्षा से पहले लीक हुए रीट परीक्षा के पेपर को रवि के ही स्कूल में सॉल्व करवाया। इसके बाद 18 परीक्षार्थियों को पेपर देने के लिए स्कूल भेजा गया। आरोप है कि रवि ने ही पेपर पहले ही सॉल्व करवाने के बाद आसपास के परीक्षा केंद्र तक परीक्षार्थियों को छुड़वाने की व्यवस्था की।

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