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राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला:रिश्वत मामले में MDS यूनिवर्सिटी के VC पद से हटाए गए डॉ. रामपाल को राहत, कोर्ट ने चांसलर के आदेश को रद्द किया

जयपुर2 वर्ष पहले
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सितंबर 2020 में वीसी के निजी बॉडीगार्ड को 2.20 लाख रुपए की रिश्वत लेते पकड़ा था, जिसके बाद वीसी को निलंबित कर दिया था। - Dainik Bhaskar
सितंबर 2020 में वीसी के निजी बॉडीगार्ड को 2.20 लाख रुपए की रिश्वत लेते पकड़ा था, जिसके बाद वीसी को निलंबित कर दिया था।

राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर बैंच ने आज अजमेर की MDS यूनिवर्सिटी के VC पद से डॉ. रामपाल सिंह को 9 दिसंबर 2020 को हटाने वाले आदेश को रद्द कर दिया। हालांकि, अदालत ने राज्य सरकार को छूट दी है कि वह तय प्रक्रिया का पालन कर सिंह के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। जस्टिस SP शर्मा ने यह आदेश डॉ. रामपाल सिंह की याचिका को शुक्रवार को निस्तारित करते हुए दिया।

दरअसल इस मामले में अदालत ने पक्षकारों की बहस पूरी होने के बाद मामले में 28 जनवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। मामले में अदालत ने कहा कि प्रार्थी के 48 घंटे से ज्यादा न्यायिक अभिरक्षा में रहने के चलते उन्हें निलंबित करना सही है, लेकिन उन्हें सुनवाई का मौका दिए बिना बर्खास्त करने को सही नहीं मान सकते। राज्य सरकार ने इस केस में चांसलर को गलत सलाह दी है कि चालान पेश हो चुका है, जबकि उस समय केवल चालान दायर करने का निर्णय ही हुआ था। वहीं सरकार के एएजी ने भी माना है कि प्रार्थी को पद से हटाने की सलाह के दौरान चालान पेश नहीं हुआ था। इसलिए चांसलर द्वारा वीसी पद से प्रार्थी को हटाने वाले आदेश को सही नहीं मान सकते।

याचिका में कहा था कि प्रार्थी को 5 अक्टूबर 2018 को एमडीएस यूनिवर्सिटी के पद पर नियुक्त किया था। एसीबी ने सितंंबर 2020 में उसके ड्राइवर को 2.20 लाख रुपए की रिश्वत के साथ पकड़ा था। इस आधार पर बाद में प्रार्थी को निलंबित किया और 9 दिसंबर को राज्य सरकार की सलाह पर वीसी पद से हटा दिया।

इसे हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि बर्खास्तगी से पहले प्रार्थी का पक्ष नहीं सुना गया। जबकि एमडीएस विवि संशोधन अधिनियम के तहत उसे सुनवाई का पर्याप्त मौका दिया जाना था। वहीं बर्खास्तगी आदेश में मामले की जांच नहीं कर उसे सीधे ही पद से हटाया है और इसका सही कारण भी नहीं बताया। जब हटाने की प्रक्रिया कानून में है तो उस प्रक्रिया को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। जवाब में सरकार ने कहा कि प्रार्थी के जेल में होने के चलते उन्हें नोटिस नहीं दिया। वहीं असहज स्थिति से बचने के लिए उन्हें हटाया था, लेकिन अदालत ने प्रार्थी को वीसी पद से हटाने वाले आदेश को रद्द कर दिया।

कंटेंट: संजीव शर्मा, जयपुर

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