VIDEO में देखिए मानवता के सौदागरों को:3500 रुपये का रेमडेसिविर इंजेक्शन बेच रहे 30 हजार में, सच छुपाने के लिए वायल पर लिखा बैच नंबर खुरचा; फिर मार्कर से मिटाया, ड्रग कंट्रोलर खामोश

जयपुर6 महीने पहलेलेखक: संदीप शर्मा/इमरान खान
इस तरह हो रही है रेमडेसिविर की कालाबाजारी।

कोरोनाकाल में जयपुर में कालाबाजारी का रावण 10 मुंह बाए अट्टहास कर रहा है। व्यवस्था को मुंह चिढ़ाते ये गुनहगार इतने बेखौफ हैं कि हमारे हिस्से की दवा की खुलेआम कालाबाजारी कर रहे हैं। अस्पतालों के ये ब्लैकिए रेमडेसिविर की होम डिलीवरी तक कर रहे हैं।

आम आदमी के लिए इन दवाओं की किल्लत हो, पर इन गुनहगारों से आप जितने चाहें, उतने इंजेक्शन खरीद सकते हैं। महामारी के इस दौर में जरूरतमंदों को 899 से 3490 रुपये तक की कीमत वाले ये इंजेक्शन 30 हजार रुपये तक में बेच रहे हैं। इनके सामने जिम्मेदार सिस्टम भी घुटने टेक चुका है। हैरत की बात है कि रेमडेसिविर की ब्लैक मार्केटिंग की सूचना जयपुर के ड्रग विभाग के अधिकारियों को दी गई। फिर भी कुछ नहीं हुआ। दैनिक भास्कर के 2 रिपोर्टरों ने अपने 2 सहयोगियों के साथ मिलकर इस पूरे खेल का पर्दाफाश किया है। स्टिंग में सबकुछ साफ हो गया है। हैरानी की बात यह कि निजी अस्पतालों के साथ-साथ प्रदेश के सबसे बड़े कोविड अस्पताल RUHS में भी रेमडेसिविर की कालाबाजारी सामने आई है।

10 गुना ज्यादा दाम बताए, मजबूरी बताई ताे 5 गुना पर माना

जालूपुरा निवासी एक महिला काे काेराेना का संक्रमण हुआ। 2 दिन में ही फेफड़ों का संक्रमण करीब 70% पहुंच गया। मुरलीपुरा के निजी डॉक्टरों ने रेमडेसिविर लाने को कहा। सीमएचओ ऑफिस समेत शहर से कहीं नहीं मिला तो फिर अचानक 29 अप्रैल को महिला के भतीजे इकारामुद्दीन को किसी ने बताया कि एक अस्पताल का कर्मचारी 5 गुना अधिक दर पर देने को तैयार है। इस पर भास्कर रिपोर्टर, राज. मुस्लिम परिषद संस्थान के अध्यक्ष युनूस चाैपदार और संजू सैफ ने 9928350551 नंबर पर डील की और उसे भट्‌ठा बस्ती बुलाया।

मार्कर से गुनाह मिटाया बोला- काला रंग है ही ऐसा

नंबर पर कॉल किया गया तो युवक ने भट्टा बस्ती स्थित थाने के सामने एक बिल्डिंग मैटेरियल सप्लायर्स की दुकान के पास बुलाया। पहुंचे तो देखा कि युवक के गले में सीके बिरला हॉस्पिटल का आईडी कार्ड था। गोल-गोल घुमाने के बाद युवक एक गली में ले गया। मोलभाव शुरू हुआ। 20 हजार रुपये में बात बन गई। पहले उसने पैसे लिए, फिर इंजेक्शन दिए। वायल देने से पहले डिब्बी खोलकर उस पर लिखा बैच नंबर मार्कर से मिटा दिया। यह क्या कर रहे हो, पूछने पर वो बोला- क्या करें, काला रंग है ही ऐसा। सबकुछ छिपा देता है। मजबूरी है।

मुस्कुराते हुए नोट गिने बोला- और चाहिए तो बता देना

खुद को अस्पताल का कर्मचारी बताने वाला शख्स नोट हाथ में लेने के बाद चेहरे पर अजीब मुस्कान लिए हुए था। जाने से पहले बोला...और भी चाहिए होगा तो बता देना...दे दूंगा। अपने पास इंजेक्शन की कोई कमी नहीं है। हां...पैसे पूरे लाना। इंजेक्शन लेने के बाद भास्कर सहयोगी वहां से निकले और इंक रिमूवर और पेट्रोल से मार्कर का निशान हटाया। इंजेक्शन महिला मरीज काे लगा दिया, लेकिन उसकी खाली वायल और रैपर सुरक्षित रख लिया, जिस पर बैच नम्बर साफ दिख रहा है। इसका पूरा वीडियो भास्कर के पास है।

RUHS से भी 60 हजार रु. में दो वायल खरीदे, वहां से कई गायब हैं

कालाबाजारी का मामला आया सबसे बड़े कोविड केयर अस्पताल RUHS से। भास्कर ने आरयूएचएस में भर्ती एक मरीज के परिजन की मदद से रेमडेसिविर की वायल खरीदी। वायल बेचने वाला स्टाफ इतना शातिर कि उसने वायल के न केवल बैच नंबर मिटाए, बल्कि उन्हें कुरच दिया ताकि पता नहीं चल सके कि यह बैच नंबर की वायल RUHS आई थी।

भास्कर की मदद कर रहे तनुज ने पहली वायल खरीदी, लेकिन देने वाले ने कहा पहली वायल के बाद ही और वायल देगा। RUHS से एक वायल खो-जाना बड़ी बात नहीं थी तो वह वायल किसी जरूरतमंद को देकर अन्य वायल खरीदी। इसके बाद अन्य दो वायल और खरीदी गई। दैनिक भास्कर के पास अभी RUHS स्टाफ से खरीदी गई दो वायल हैं और अस्पताल इनकी गिनती करा सकता है।

RUHS के पास न केवल दो बल्कि और भी कई वायल कम निकलना तय है। मालूम हो कि भास्कर के मददगार तनुज ने 58 हजार में दो और फिर 30 हजार में एक और वायल खरीदी।

कालाबाजारी करने वालों पर सख्ती, लेकिन चेन नहीं टूट रही है

  • सिरोही में रेमेडिसिविर इंजेक्शन काे सरकारी सप्लाई से लेकर 50 से 70 हजार रुपये में जरूरतमंदाें काे बेचा जा रहा था।
  • एसओजी ने चार दिन पहले शनिवार रात काे शिवंगज में डिकाॅय कर मेडिकल संचालक व उसके सहयाेगी काे गिरफ्तार कर लिया।
  • जाेधपुर के नर्सिंगकर्मी, गुजरात गांधीधाम में स्थित एक अस्पताल के नर्सिंगकर्मी व जाेधपुर में एमआर का काम करने वाले युवक काे काे भी गिरफ्तार किया गया था।
  • पुलिस ने आठ रेमेडिसिविर इंजेक्शन बरामद किए हैं। इसके बाद जाेधपुर के गाेयल अस्पताल में कार्यरत नर्सिंग कर्मी आदित्य प्रकाश वैष्णव, जाेधपुर में ही एमआर का काम करने वाले रिषभ दाधिच तथा गांधीधाम अस्पताल में नर्सिंगकर्मी राहुल को पकड़ा गया।
  • 21 अप्रैल को जयपुर पुलिस की क्राइम ब्रांच की टीम ने 3 दिनों तक 48 मेडिकल स्टोर पर जांच कर नकली रेमेडेसिविर बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया था।
  • गुड़गांव से 2200 रुपये के हिसाब से इंजेक्शन की डोज लाते थे और 15 हजार रुपये में बेचते थे।
  • उदयपुर पुलिस ने भी 21 अप्रैल को ही गीतांजलि अस्पताल के डॉक्टर समेत 2 लोगों को रेमडेसिविर की कालाबाजारी करते हुए गिरफ्तार किया था।

RUHS में मरीजों को रेमडेसिविर के इंजेक्शन कम लगाए गए हैं

RUHS से पैक वायल बाहर तभी आ सकती है जब भर्ती मरीजों के वायल नहीं लगे और इन वायल लगाना दिखा दिया जाए। RUHS में जो गंभीर मरीज भर्ती हैं, उन्हें रेमडेसिविर लगाया ही नहीं गया। रेमडेसिविर को बाहर 35 हजार रुपये में बेच दिया गया।

विभाग-कमेटी ने मामले में क्या किया

रेमडेसिविर इंजेक्शन जगह-जगह ब्लैक में बेचा जा रहा है। ऐसा भी नहीं कि अधिकारियों को जानकारी नहीं। यहां तक कि जानकारी देने के बाद भी ड्रग विभाग के उच्चाधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। ड्रग कंट्राेलर को सूचना देने के लिए कई बार फोन किए, लेकिन उन्होंने किसी तरह की मदद नहीं की।

सवाल- ड्रग कंट्रोलर राजाराम जी! इस कालाबाजारी को रोकना आप ही का काम है; ऐसे लोगों पर आखिर कार्रवाई क्यों नहीं करते?

हमारे रिपोर्टर ने इन्हें 3 दिन में 10 बार फोन किया, इन्होंने उठाया नहीं; साहब! जनता जवाब चाहती है। यह स्पेस आपके लिए छोड़ा गया है। आपके जवाब का इंतजार रहेगा...

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