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जेडीए में 2 साल में 14 ईओ नहीं टिके:पहली बार संविदा पर रिटायर्ड इंस्पेक्टर, संविदाकर्मी को फील्ड पोस्टिंग देने का नहीं है नियम

जयपुर9 महीने पहलेलेखक: इमरान खान
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रिटायर्ड पुलिस निरीक्षक श्रीचंद सिंह। - Dainik Bhaskar
रिटायर्ड पुलिस निरीक्षक श्रीचंद सिंह।

जेडीए ने यूं ताे हजाराें कर्मचारी संविदा पर लगा रखे हैं लेकिन पहली बार किसी रिटायर्ड पुलिस अधिकारी काे प्रवर्तन शाखा में जाेन प्रवर्तन अधिकारी (ईओ) का जिम्मा देकर हैरत में डाल दिया है। क्योंकि जेडीए में किसी भी जाेन में उपायुक्त और जाेन प्रवर्तन अधिकारी सुनियाेजित विकास की धुरी हाेते हैं और अवैध निर्माण, अतिक्रमणाें के प्रति जवाबदेह हाेते हैं।

सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि रिटायर पुलिस अधिकारी श्रीचंद सिंह काे ऐसे जाेन की जिम्मेदारी दी है, जाे अवैध निर्माण की शिकायताें में सबसे आगे है। फील्ड अधिकारी के रूप में संविदा पर रिटायर अधिकारी काे लगाने और अवैध निर्माण के लिहाज से सबसे सेंसिटिव जाेन-14 की जिम्मेदारी देने पर प्रवर्तन शाखा के अधिकारियाें ने जेडीए के आला अधिकारियाें के समक्ष माैखिक विरोध भी दर्ज कराया है।

मई में यहीं से रिटायर हुए... 57,000 रुपये की नाैकरी छाेड़ अब 15 हजार की सैलरी में आए रिटायर्ड इंस्पेक्टर, जिम्मा भी सबसे अहम जोन 14 का

जेडीए रीजन के 18 जाेन में फिलहाल 11 ईओ कार्यरत हैं। इनमें से 4 ईओ के पास 2-2 जाेन की जिम्मेदारी है। बीते डेढ़-दाे साल में प्रवर्तन शाखा में 14 जाेन ईओ ज्वाइनिंग के बाद 4-6 महीने भी नहीं टिक सके और ट्रांसफर करवा लिया। जबकि श्रीचंद सिंह इसी साल मई में जेडीए की प्रवर्तन शाखा से ही रिटायर हुए थे। इसके बाद सेंट्रल डिटेक्टिव स्कूल में 57 हजार रुपए पे-माइनस वेतन पर नाैकरी ज्वाइन की। यह नाैकरी छाेड़कर अब 15 हजार की काॅन्ट्रैक्ट सैलरी पर प्रवर्तन अधिकारी का काम देखेंगे।

बड़ा सवाल; संविदाकर्मी की जवाबदेही जेडीए कैसे तय करेगा?
जेडीए का कामकाज ज्यादातर संविदा कर्मचारियाें के भराेसे चल रहा है। इस बीच संविदा पर रहते कई अधिकारी-कर्मचारियाें के गड़बड़झाले भी सामने आ चुके हैं। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि प्रवर्तन अधिकारी के रूप में रिटायर्ड पुलिस अधिकारी की जवाबदेही कैसे तय होगी? तकनीकी रूप से संविदा पर लगा कर्मचारी-अधिकारी सहायक के रूप में अपनी सेवाएं दे सकता है लेकिन किसी प्रकरण की जांच नहीं कर सकता।

जबकि प्रवर्तन अधिकारी काे अवैध निर्माण, अतिक्रमण से जुड़े प्रकरणाें की जांच कर रिपाेर्ट आला अधिकारियों काे भेजनी हाेती है। साथ ही काेर्ट में संबंधित प्रकरण का चालान पेश करना हाेता है।