राहत के बीच आफत:रिहायशी कॉलोनियों में संचालित अस्पताल में भर्ती मरीजों से मिलने आने वाले लोगों से कोरोना फैलने का खतरा

जयपुर6 महीने पहले
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बनीपार्क स्थित एक आवास में मौजूद परिवार जो घर में रहकर भी मास्क पहने है। - Dainik Bhaskar
बनीपार्क स्थित एक आवास में मौजूद परिवार जो घर में रहकर भी मास्क पहने है।

प्रदेश में कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है। कोरोना की घातकता को देखकर जो लोग इस बीमारी को हल्के में ले रहे थे, उनमें भी बीमारी को लेकर डर बैठ गया है। प्रशासन ने लोगों को घरों पर रहकर खुद को सुरक्षित रखने की अपील की है। जयपुर में अब कुछ लोग खुद को घरों पर भी सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे। इसके पीछे कारण उनके आस-पास के घरों में संचालित छोटे-छोटे अस्पताल या नर्सिंग होम है। ये अस्पताल उन लोगों को तो राहत पहुंचा रहे है, जिन्हे शहर में कोविड अस्पतालों में उपचार के लिए बेड्स नहीं मिल रहे, लेकिन इनमें भर्ती मरीजों से मिलने आने वाले परिजनों से अस्पतालों के आस-पास बने मकानों में रहने वाले लोगों में कोरोना के फैलने का खतरा मंडराने लगा है।

लोग घरों में रहकर भी मास्क पहनने को मजबूर हो रहे है। जयपुर के बनीपार्क, वैशाली नगर सहित कई ऐसी जगह है, जहां रिहायशी कॉलोनियों में छोटे-छोटे नर्सिंग होम और अस्पताल संचालित है। जयपुर में प्रमुख बड़े अस्पतालों में कोविड बेड्स फुल होने के कारण रिहायशी इलाकों में संचालित इन अस्पतालाें में भी अब कोविड के मरीज भर्ती होने लगे है।

एक अस्पताल के बाहर मरीजों से मिलने आए परिजनों की भीड़।
एक अस्पताल के बाहर मरीजों से मिलने आए परिजनों की भीड़।

इन अस्पतालों में कोविड मरीज और उनके परिजनों व अन्य मिलने-जुलने वाले लोग भी बड़ी संख्या में आ रहे है। इस कारण अस्पताल व गली मोहल्लों में गाड़ियों व लोगों की दिनभर भीड़ लगी रहती है। इसके कारण लोगों काे मजबूरन अब घरों में रहकर भी मास्क पहनना पड़ता है।

बनीपार्क निवासी एडवोकेट शोभित तिवाड़ी ने बताया कि उनके घर के ठीक सामने एक निजी अस्पताल है, जहां बड़ी संख्या में कोरोना मरीज भर्ती है। अब लोग उनके मिलने-जुलने वाले आते है तो घर के बाहर गाड़ी लगाकर खड़े रहते है, जिससे घर के बच्चों-बुजुर्गो को संक्रमण का खतरा बना रहता है।

इसी तरह मानसरोवर निवासी रोहित बताते है कि उनके घर से कुछ दूरी पर एक निजी अस्पताल है, जहां बड़ी संख्या में कोरोना के मरीज भर्ती है। इन मरीजों के पास मिलने आने वाले परिजन अक्सर पूरे दिनभर गली में इधर-उधर घूमते रहते है, जिसके कारण हमे भी संक्रमित होने का खतरा बना रहता है। ऐसे में सरकार को एक गाइडलाइन तय करनी चाहिए कि कोरोना मरीजों का इलाज केवल उन्ही अस्पताल में हो जो रिहायशी एरिया में संचालित न हो, ताकि कॉलोनी में रहने वाले लोगों को खतरा न हो।

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