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सिटी प्रोजेक्ट पर कोविड इफेक्ट:‘द्रव्यवती’ के 47 किलोमीटर के पक्के नाले में ‘रिवर’ तो नहीं बही, ‘फ्रंट’ पर मलबे-गंदगी में अब सिर्फ जलकुंभी का ‘विकास’

जयपुर3 महीने पहलेलेखक: महेश शर्मा
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लॉकडाउन से पहले ही प्रोजेक्ट पर महामारी छाई थी, अब तो सरकार ने हाशिये पर रख दिया है। - Dainik Bhaskar
लॉकडाउन से पहले ही प्रोजेक्ट पर महामारी छाई थी, अब तो सरकार ने हाशिये पर रख दिया है।
  • विवादों का इलाज सरकार को करना है, फौरी तौर पर फिर जेडीए में उन अफसर-इंजीनियरों की कमेटी बनाई जो सीधे तौर पर प्रोजेक्ट से जुड़े हैं, सोमवार को मीटिंग-मीटिंग खेलेंगे
  • जब दूसरे सभी प्रोजेक्ट पर लॉकडाउन हट रहा , तो यहां महामारी का इलाज शुरू ही नहीं

1400 करोड़ रुपए खर्च कर ‘द्रव्यवती’ को पक्के नाले के तौर पर तैयार किया। इसके बाद ‘रिवर’ तो बही नहीं, इसके पूरे ‘फ्रंट’ पर गंदे पानी में जलकुंभी जरूर पनप गई। प्रोजेक्ट शुरू हुआ तब नदी के 47 किमी में ‘गंगा’ बहाने के दावे थे, इसके उलट पूरा एरिया अब बास मार रहा है। लॉकडाउन से पहले ही प्रोजेक्ट पर महामारी छाई थी, अब तो सरकार ने हाशिये पर रख दिया है।

जेडीए स्तर पर एक कमेटी की खानापूर्ति कर छोड़ दी गई। कमेटी में जेडीए के उन्हीं अफसरों को शामिल किया गया है, जिनकी वैसे ही सीधे तौर पर काम कराने की जिम्मेदारी है। यूडीएच मंत्री ने जून 2019 में प्रोजेक्ट का विजिट किया था, लेकिन काम शुरू कराने की आक्रामकता के बजाए शांति से निकल गए। प्रोजेक्ट अक्टूबर 2018 में पूरा होना था, इसके बाद से केवल तारीखें मिलती आ रही हैं।

अफसर-इंजीनियरों की कमेटी के साथ सोमवार को मीटिंग होगी

सरकार ने फौरी तौर पर अप्रैल में डायरेक्टर इंजीनियरिंग प्रथम और फाइनेंस, डिप्टी डायरेक्टर लॉ, एसीई, एडवोकेट अमित कुडी और पीडीकोर को शामिल कर 7 दिन में रिपोर्ट मांगी जबकि एडवोकेट-कंसल्टेंट को छोड़ सभी की सीधे काम लेने की भूमिका है। सबको हालात पता होने से अभी तक केवल यह किया है कि सोमवार को संबंधित टाटा प्रोजेक्ट लि. को पत्र लिख कॉल किया है, ताकि उनकी आपत्तियां जान सकें, जिनके विवादों का निपटारा सरकार स्तर पर होना है।

जानिए प्रोजेक्ट से जुड़े 3 मेजर विवाद, जिनका समाधान सरकार के पास

1. जड़ में केवल पैसा

  • 170 एम-एलडी के 5 एसटीपी। पानीपेच (20 एमएलडी), शिप्रापथ (15 एमएलडी), रीको एरिया-तरुछाया नगर (100 एमएलडी), गोनेर (10 एमएलडी) और बंबाला (25 एमएलडी) हैं।
  • 3 पार्क: पानीपेच (बर्ड पार्क), शिप्रा पथ (लैंड स्कैप), बंबाला पुलिया (बॉटनीकल गार्डन)। केवल यही काम पूरे हैं, जिनका कंपनी प्रतिमाह 3 करोड़ के हिसाब से बिजली बिल, मेंटिनेंस बता जेडीए को सौंपना चाहती है।

2. सरकार बदलते ही 102 करोड़ के क्लेम बदले

  • टाटा प्रो. लि. ने एडिशनल आइटम की बदौलत 102 करोड़ के क्लेम किए हुए थे। सरकार बदली तो जेडीए ने दुबारा किए आंकलन में इन्हें 45 करोड़ पाया। पहले तो कंपनी ने जो मिला उसे लिया, फिर बचे हुए की मांग।
  • 3. 55 करोड़ रुपए के काम अभी बाकी
  • जेडीए के मुताबिक कंपनी स्तर पर अभी तक करीब 55 करोड़ के काम बाकी हैं। कंपनी ने शर्त रखी है कि पहले ऊपर के 2 मसलों का हल निकालो।

विवादों से परे ये बकाया कार्यों की फेहरिस्त

  • बरसाती पानी के साथ जा रहे मलबे-गंदगी को साफ करने का सिस्टम विकसित नहीं। रैंप बना रहे पर पूरा मैकेनिज्म नहीं।
  • गोनेर के आगे 11.5 किमी में रामचंद्र पुरा डैम से ढूंढ नदी तक किसानों के पानी से जुड़े विवाद।
  • मिलिट्री एरिया, हसनपुरा में भी रेलिंग, क्लैडिंग, फुटपाथ के काम
  • सुशीलपुरा से लेकर गूलर डेम तक मेंटिनेंस बकाया।
  • 3 जगह (दो देहलावास एसटीपी के पास, एक गोनेर पुलिया के पहले) 750 मीटर में कोर्ट स्टे ।

कमेटी की रिपोर्ट पर सरकार का एक्शन

जेडीए को निर्देशित किया गया है कि महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को जल्द पूरा कराए। फिलहाल एक कमेटी बनाई गई है, वो जो रिपोर्ट देगी। उसके आधार पर यदि सरकार स्तर पर कोई बात होगी तो शॉर्टआउट करेंगे।
-कुंजीलाल मीणा, प्रमुख सचिव, यूडीएच

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