पायलट-गहलोत में बहुत कुछ बाकी:सचिन पायलट ने राजस्थान में महापंचायत के मंच पर 16 विधायकों के साथ शक्ति प्रदर्शन किया; न्योते के बावजूद गहलोत नहीं पहुंचे

जयपुर8 महीने पहले
मंच पर पायलट का पगड़ी पहनाकर स्वागत किया गया। इस महापंचायत में बहुत भीड़ जुटी। एक विधायक ने कहा कि ये रैली नहीं रैला है।

जयपुर के कोटखावदा में शुक्रवार को हुई किसान महापंचायत से एक बार फिर ये साफ हो गया कि राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत और सचिन पायलट का टकराव खत्म नहीं हुआ है। अभी बहुत कुछ बाकी है। महापंचायत में सचिन पायलट ने 16 विधायकों को मंच पर बैठाया, भारी भीड़ जुटाकर कांग्रेस हाईकमान को जमीन पर अपनी पकड़ और ताकत का अहसास कराया।

इस कार्यक्रम में अशोक गहलोत, राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और गहलोत खेमे के कई नेताओं को बुलाया गया था, लेकिन कोई नहीं पहुंचा। बताया गया कि जयपुर में ही दोपहर 12 बजे सीएम का अपना कार्यक्रम था इसलिए वे नहीं आए।

3 वजहों से साफ दिखाई पड़ा पायलट और गहलोत का टकराव
पहली: गहलोत खेमे में जो गए थे, महापंचायत में उनकी हूटिंग

महापंचायत में पायलट समर्थक विधायक विश्वेंद्र सिंह, हेमाराम चौधरी, मुरारीलाल मीणा, बृजेंद्र सिंह ओला, रमेश मीणा, वेद प्रकाश सोलंकी, हरीश मीणा, जीआर खटाणा, इंद्राज गुर्जर, राकेश पारीक, अमर सिंह जाटव, सुरेश मोदी, मुकेश भाकर मौजूद रहे। पायलट समर्थक विधायक पीआर मीणा,दीपेंद्र सिंह शेखावत, रामनिवास गावड़िया और भंवरलाल शर्मा महापंचायत में नहीं पहुंच सके।

महापंचायत में पहुंचे इन 14 विधायकों के अलावा 2 और विधायकों की मौजूदगी ने चौंका दिया। ये थे निवाई विधायक प्रशांत बैरवा और पूर्व कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष नारायण सिंह के पुत्र वीरेंद्र सिंह जो दांतारामगढ से विधायक हैं। प्रशांत बैरवा जैसे ही पहुंचे तो पायलट समर्थकों ने इनके खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। वजह ये कि बैरवा पहले पायलट खेमे में थे, लेकिन पिछले साल जुलाई में जो टकराव पायलट और गहलोत में हुआ, उस वक्त उन्होंने गहलोत का दामन थामा था। मंच पर उनकी मौजूदगी से सवाल ये उठा कि क्या वो फिर पायलट खेमे में लौट रहे हैं। जहां तक बात वीरेंद्र सिंह की है, तो पहले भी उनका झुकाव पायलट की तरफ ही रहा है।

दूसरी: विधायक का तंज कसा कि मेहनत कोई और करे.. इसी पर बजीं तालियां
पायलट समर्थक विधायक विश्वेंद्र सिंह ने स्पीच के दौरान गहलोत पर तंज कसा। उन्होंने कहा, 'पहले हमारी 99 सीट आईं, फिर 101 हो गईं। मेहनत कोई करे....।' विश्वेंद्र के इतना कहते ही पूरी महापंचायत में तालियां और पायलट के समर्थन में नारेबाजी होने लगी। फिर विश्वेंद्र सिंह ने कहा, 'आप मुझसे ज्यादा होशियार हैं। राहुल गांधी आगाज करके गए हैं। पायलट की यह रैली नहीं रैला है।'

तीसरी: महापंचायत में न जाना पड़े इसलिए गहलोत ने अपना कार्यक्रम रख दिया
पायलट ने मुख्यमंत्री गहलोत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा समेत गहलोत मंत्रिमंडल के सभी 20 मंत्रियों को न्योता भेजा था। इनमें से कोई नहीं पहुंचा। पायलट की महापंचायत का समय तो तय था, लेकिन मुख्यमंत्री का कार्यक्रम पहले से तय नहीं था। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि ऐन वक्त उप-चुनाव वाली 4 विधानसभाओं में सीएम के लोकार्पण और शिलान्यास का कार्यक्रम रखा गया। रणनीति के तहत एक तीर से दो निशाने साधे गए। पहला पायलट की महापंचायत पर लोगों और मीडिया का अटेंशन ज्यादा न हो। इसके अलावा मुख्यमंत्री और समर्थकों को महापंचायत में न जाने का बहाना भी मिल जाए।

पायलट ने महापंचायत में कहा- किसानों की सुनने वाला दिल्ली में कोई नहीं
पायलट ने कहा, 'देश का किसान खून के आंसू रो रहा है, लेकिन दिल्ली की सरकार में किसान की कोई सुनने वाला नहीं है। हमें केंद्र के खिलाफ लड़ना होगा। किसान को सहानुभूति नहीं सहयोग चाहिए। हम केंद्र की तानाशाही के खिलाफ मजबूती से लड़ेंगे, किसान और नौजवान आज एक साथ खड़े हैं। हमारे नेता राहुल गांधी राजस्थान आए थे, प्रियंका गांधी यूपी में हर जगह घूम रही हैं।'