सरकार के खिलाफ संविदाकर्मियों ने निकाला कैंडल मार्च:बोले- कॉन्ट्रेक्चुअल हायरिंग टू सिविल पोस्ट रूल्स में करें संशोधन, आंदोलन की चेतावनी

जयपुर2 महीने पहले
स्टेच्यू सर्किल पर कैंडल मार्च निकाल विरोध दर्ज करते संविदाकर्मी।

जयपुर के स्टैचू सर्किल पर संयुक्त संविदा मुक्ति मोर्चा ने शनिवार को कैंडल मार्च निकाला। इस दौरान शमशेर खान भालू ने कहा कि राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने संविदा कर्मियों के साथ वादाखिलाफी की है। इसलिए जल्द से जल्द राजस्थान कॉन्ट्रेक्चुअल हायरिंग टू सिविल पोस्ट रूल्स 2022 में संशोधन किया जाए। ताकि प्रदेश के लाखों संविदा कर्मियों को राहत मिल सके। लेकिन अगर सरकार ने हमारी मांग नहीं मानी। तो हम राहुल गांधी के भारत जोड़ो यात्रा में पहुंच कांग्रेस सरकार की वादाखिलाफी बताएंगे।

दरअसल, पिछले दिनों सरकार ने सरकारी विभागों में काम कर रहे 1 लाख 10 हजार से ज्यादा संविदाकर्मियों को नियमित करने का फैसला किया गया था। जिसमें शिक्षाकर्मी, पैराटीचर्स और ग्राम पंचायत सहायक को कॉन्ट्रैक्चुअल सर्विस रूल्स के दायरे में लेने का 21 अक्टूबर को ही फार्मूला तय किया था। जिसके तहत जिन संविदाकर्मियों का पहले का वेतन ज्यादा होगा। तो उन्हें मिलने वाले वेतन में दो सालाना इंक्रीमेंट जोड़कर नया वेतन तय किया करने का प्रावधान है।

वहीं संविदा पर शुरुआती वेतन 10 हजार 400 रुपए हर महीने तय होगा। ऐसे में 9 साल सर्विस पूरी करने पर 18 हजार 500 और 18 साल की सर्विस पूरी होने पर 32 हजार 300 रुपए का वेतन मिलेगा। इसके साथ ही जिन संविदा कर्मचारियों का पहले से मिलने वाला वेतन संरक्षित किया गया है। उनकी 9 और 18 साल की सर्विस की गिनती इन नियमों के आने की तारीख से होगी। पहले की सर्विस 9 और 18 साल की गिनती में शामिल नहीं होगी। जिसको लेकर संविदारकर्मी विरोध कर रहे है।

कैबिनेट सब कमेटी की रिपोर्ट के बाद बनाए थे नियम

कांग्रेस सरकार बनने के बाद ​संविदाकर्मियों को नियमित करने के लिए मंत्री बीडी कल्ला की अध्यक्षता में कैबिनेट सब कमेटी बनाई गई थी। कैबिनेट सब कमेटी की सिफारिश के आधार पर संविदाकर्मियों को नियमित करने के लिए नियम बनाए गए थे।

संविदाकर्मी सरकारी कर्मचारियों की तरह वेतन-पेंशन की मांग कर रहे थे, लेकिन कल्ला कमेटी ने दूसरा फार्मूला निकाला। सरकारी विभागों में काम करने वाले संविदाकर्मियों को नियमित करने के लिए राजस्थान कॉन्ट्रैक्चुअल सर्विस रूल्स 2021 बनाए गए। अब इन नियमों के दायरे में संविदाकर्मियों को लिया जाएगा।

सरकार ने बीच का रास्ता निकाला

संविदाकर्मी परमानेंट सरकारी नौकरी और उसी हिसाब से पद और वेतन की मांग कर रहे थे। संविदा कर्मचारियों को नियमित करने के मौजूदा फार्मूले में सवंदाकर्मी सरकार के परमानेंट कर्मचारी नहीं माने जाएंगे, उन्हें संविदा कर्मचारी माना जाएगा फर्क इतना सा है कि उन्हें अब इंक्रीमेंट मिलता रहेगा और उनकी जॉब सिक्योरिटी हो जाएगी।

जब सरकार किसी पद को स्थायी करेगी तब 5 साल से संविदापर काम कर रहे कर्मचारियों में से स्क्रीनिंग करके उन्हें ही इस पद पर परमानेंट करने का प्रावधान है।

1 लाख 10 हजार 279 संविदाकर्मी होंगे नियमित

राजस्थान में मौजूदा समय में शिक्षा विभाग के शिक्षा कर्मी, पैराटीचर्स, ग्राम पंचायत सहायक, अंग्रेजी माध्यम टीचर सहित कुल 41 हजार 423 संविदाकर्मी नियमित होंगे। इसी तरह ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग के राजीविका और मनरेगा के कुल 18 हजार 326 संविदाकर्मी, अल्पसंख्यक विभाग के 5 हजार 697 मदरसा पैरा टीचर्स, हेल्थ डिपार्टमेंट के 44 हजार 833 संविदाकर्मियों सहित कुल 1 लाख 10 हजार 279 संविदाकर्मी नियमित होंगे।