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कंट्रोवर्सी:नहींं हुआ है स्कैम, फर्स्ट के बाद सेकेंड लिस्ट जारी करके यूपीएससी रिकमेंड करता है कैंडिडेट्स को

जयपुर2 महीने पहले
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प्रतीकात्मक फोटो।
  • परिणाम के साथ ट्विटर पर ट्रेंड हुआ “UPSC_Scam”, यूपीएससी ने बताया नियम का प्रावधान

(पूजा शर्मा) हाल में यूपीएससी सिविल सर्विसेस 2019 का परिणाम आया है। रिजल्ट वाले दिन ही यह कंट्रोवर्सी में बदल गया। हैशटैग “UPSC_Scam” 1 लाख ट्वीट्स के साथ ट्विटर पर ट्रेंड करता रहा। मामला घोषित वेकेंसी और यूपीएससी रैंक लिस्ट में 98 सीट्स के अंतर से जुड़ा था।

विभिन्न सेवाओं जैसे आईएएस, आईपीएस, आईएफएस आदि में इस साल के लिए सरकार द्वारा घोषित वेकेंसी की संख्या 927 थी। यूपीएससी ने 4 अगस्त को परिणाम में सिर्फ 829 कैंडिडेट्स को रिकमेंड किया। आयोग ने एक समेकित आरक्षित सूची का भी जिक्र किया।

यहां 98 सीटों का अंतर ट्वीटर व फेसबुक पर बहस का विषय बन गया। कईयों ने बैकडोर एंट्री का आरोप लगाया। लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक इस प्रक्रिया में कुछ भी असामान्य नहीं है। इस साल कोई यूपीएससी स्कैम नहीं हुआ है। यही प्रक्रिया यूपीएससी में पिछले सालों में भी अपनाई गई है। 4 अगस्त को यूपीएससी ने फर्स्ट रैंक लिस्ट जारी की थी। आयोग बाकी की वेकेंसियों को भरने के लिए कुछ महीनों बाद एक आरक्षित सूची (2 रैंक लिस्ट) जारी करेगा।

सिविल सर्विसेज परीक्षा के नियमों के अनुसार पूरी होती है प्रक्रिया
2018 में सरकार द्वारा घोषित वेकेंसी की संख्या 812 थी। 5 अप्रैल 2019 को जारी फर्स्ट रैंक लिस्ट के जरिए यूपीएससी ने 759 उम्मीदवारों को नियुक्ति के लिए रिकमेंड किया। उसके बाद 11 अक्टूबर 2019 को सभी वेकेंसियों को भरने के लिए आयोग ने 53 कैंडिडेट्स की आरक्षित सूची जारी की। समेकित आरक्षित सूची यूपीएससी द्वारा सिविल सर्विसेज परीक्षा नियमों के नियम 16(4) व (5) के अनुसार कायम रखी जाती है।

क्याें बनती हैं 2 रैंक लिस्ट, रिजरवेशन है कारण
वेकेंसी के दो प्रकार हैं- जनरल मेरिट और रिजर्व्ड सीट्स। जनरल मेरिट सीट्स सभी के लिए व रिजर्व्ड ओबीसी, एससी व एसटी छात्रों द्वारा भरी जाती है। अगर जनरल मेरिट में परीक्षा पास करने वाला आरक्षित वर्ग का उम्मीद्वार कैडर या जनरल कैटेगरी रैंक के आधार पर आवंटित सेवा से संतुष्ट नहीं है तो वह आरक्षित श्रेणी की सीट चुन सकता है। ऐसे में जनरल कैटेगरी सीट खाली हो जाती है।

आयोग तब रिजर्व सूची में से जनरल कैटेगरी कैंडिडेट को चुनता है और सीट भरी जाती है। अगर आरक्षित श्रेणी का उम्मीदवार आरक्षित सीट नहीं चुनकर जनरल मेरिट सीट चुनता है तो वेटिंग लिस्ट में से रिजरवेशन कैटेगरी के अन्य कैंडिडेट को चुना जाता है।

आवंटन डीओपीटी करता है
हर साल यूपीएससी सभी घोषित वेकेंसियों को भरने की कोशिश करता है। हालांकि यूपीएससी का रोल सिर्फ योग्य कैंडिडेट्स को नियुक्ति के लिए रिकमेंड करना है। सेवाओं का आंवटन डिपार्टमेंट ऑफ पर्सोनल एंड ट्रेनिंग(डीओपीटी) के द्वारा किया जाता है। कैंडिडेट द्वारा प्राप्त की गई रैंक, कैटेगरी व सर्विस को लेकर उसकी प्राथमकिता के आधार पर सेवाओं का आवंटन किया जाता है।

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