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पशुपालन व चिकित्सा विभाग फेल:बारिश के साथ बढ़ने लगे स्क्रब टाइफस के मरीज, लापरवाही ऐसी कि रोकथाम की तैयारी ही नहीं

जयपुर12 दिन पहलेलेखक: सुरेन्द्र स्वामी
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घास काटने गए या अन्य बाहरी कार्य के दौरान व्यक्ति संक्रमित कीट (चिगर्स) द्वारा काटे जाने पर इस बीमारी से ग्रसित हो सकता है।  - Dainik Bhaskar
घास काटने गए या अन्य बाहरी कार्य के दौरान व्यक्ति संक्रमित कीट (चिगर्स) द्वारा काटे जाने पर इस बीमारी से ग्रसित हो सकता है। 

प्रदेश में वर्ष -2012 से माइट या पिस्सू के काटने से फैलने वाली जानलेवा स्क्रब टाइफस बीमारी पर नियंत्रण करने में पशुपालन व चिकित्सा विभाग फेल साबित हो रहा है। पिछले 9 साल से न केवल लगातार केस मिल रहे हैं, बल्कि मौतें भी हो रही है। लेकिन दोनों ही विभागों का बीमारी को रोकने में पहले से किसी तरह की योजना नहीं बनाते। अब तक 8953 पॉजिटिव में से 131 लोग दम तोड़ चुके हैं।

2019 में तो आंकड़ा 3 हजार के पार होने पर स्वास्थ्य मंत्रालय ने बीमारी रोकने के लिए पॉलिसी तैयार करने तक आदेश दे दिया था। बारिश के आने के साथ ही स्क्रब टाइफस के मामले आने पर ही विभाग सतर्क होते है। इस बार कोरोना के बीच माइट या पिस्सू के काटने से फैलने वाली स्क्रब टाइफस ने दस्तक दे दी है। जयपुर, अलवर, भरतपुर, दौसा, झुंझुनूं, करौली, सवाईमाधोपुर, टोंक और उदयपुर में स्क्रब टाइफस का खतरा मंडराने लगा है। अभी तो एक-एक मामले देखने को मिल रहे है, लेकिन बारिश के बाद में और ज्यादा केस मिलने की संभावना है।

चिकित्सा विभाग के निदेशक डॉ. केके शर्मा का कहना है कि पॉजिटिव आने पर पशुपालन विभाग को सूचना देते है। जिससे वो स्प्रे कर सकें। पशुपालन विभाग की जिम्मेदारी है कि जहां-जहां भी स्क्रब टाइफस के पॉजिटिव केस मिले है, वहां के आसपास के घरों और पशुओं पर स्प्रे करना चाहिए।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुधीर भंडारी का कहना है कि स्क्रब टाइफस बीमारी डेंगू और स्वाइन फ्लू से भी अधिक घातक है। इसके लक्षण चिकनगुनिया के समान होते है। लेकिन समय पर इलाज नहीं मिले तो अपनी जान से हाथ धो बैठता है।

एसएमएस के मेडिसन के डॉ. रमन शर्मा व डॉ. पुनीत सक्सेना का कहना है कि जयपुर समेत विभिन्न जिलों में हर साल मौसमी बीमारियां जैसे मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया और स्क्रब टाइफस के केस मिल रहे हैं। प्रदेश के कुछ जिलों में बारिश होने से स्क्रब टाइफस के मामले आने लगे है। घास काटने गए या अन्य बाहरी कार्य के दौरान व्यक्ति संक्रमित कीट (चिगर्स) द्वारा काटे जाने पर इस बीमारी से ग्रसित हो सकता है।

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