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राजस्थान के 10 हॉटस्पॉट पर अब वॉटर पुलिस:UP, बिहार, उत्तराखंड की तर्ज पर अब राजस्थान में भी नदी, नालों, बांध और झरनों पर तैनात होंगे SDRF के जवान; 10 चौकियां बनीं

जयपुर9 दिन पहले
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राजस्थान में डूबती जिंदगियां बचाने के लिए इन जिलों में 10 जगहों पर स्थापित होंगी SDRF की चौकियां। - Dainik Bhaskar
राजस्थान में डूबती जिंदगियां बचाने के लिए इन जिलों में 10 जगहों पर स्थापित होंगी SDRF की चौकियां।

यूपी, बिहार, उत्तराखंड की तरह अब राजस्थान में भी नदी, नालों, बांध और झरनों पर जिंदगी बचाने वाली जल पुलिस नजर आएगी। पानी में हादसे वाले 10 हॉटस्पॉट पर राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की चौकियां स्थापित की जाएंगी। इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। वर्तमान में SDRF की कंपनियां राजस्थान में 7 संभाग मुख्यालय पर तैनात हैं। फिलहाल संभाग मुख्यालय से जिलों के अंदरुनी कस्बों में आपदा होने पर बचाव राहत दल को जल्द पहुंचने में मुश्किल आती है।

कई बार 300 किलोमीटर तक की दूरी तय करनी पड़ती है। ऐसे में हादसा होने के बाद कई बार लागों को समय पर बचाना मुश्किल हो जाता था। इसलिए प्रदेश के 10 हॉटस्पॉट को चिह्नित कर वहां SDRF की चौकियां बनाने का निर्णय लिया गया है। ADG सुमित बिस्वास के निर्देशन में कमांडेंट IPS पंकज चौधरी को यह कमान सौंपी गई है।

SDRF राजस्थान की टीम।
SDRF राजस्थान की टीम।

ये है 10 हॉटस्पॉट, जहां सबसे ज्यादा डूबने की घटनाएं होती हैं।

1. सिलीसेढ़ झील के पास जिला अलवर

अलवर मुख्यालय से 12 किलोमीटर दूर सिलीसेढ़ स्थित है।
अलवर मुख्यालय से 12 किलोमीटर दूर सिलीसेढ़ स्थित है।

अलवर में हर साल दुर्घटनावश या आत्महत्या के इरादों से लगभग 15 से 20 व्यक्तियों के पानी में डूबने की घटनाएं होती है। इनमें अकेले सिलीसेढ़ में 10 से 12 दुर्घटनाएं हर साल होती है। जिला अलवर में SDRF कंपनी द्वारा अब तक 10 रेस्क्यू अभियान चलाकर 10 मृत एवं एक जीवित व्यक्ति का रेस्क्यू किया है।

2. किशनगंज जिला बारां

बरसात में उफनाई पार्वती नदी का फाइल फोटो।
बरसात में उफनाई पार्वती नदी का फाइल फोटो।

बारां जिले के किशनगंज क्षेत्र में पार्वती नदी एवं परवन नामक बरसाती नदियां होने के कारण इस क्षेत्र में मानसून के समय बाढ़ के अलावा नदियों में डूबने व आत्महत्या की घटनाएं काफी अधिक होती है। यहां SDRF टीम कोटा मुख्यालय से भिजवाई जाती है, जो करीब 130 किलोमीटर दूर पड़ता है। पिछले 5 वर्षों में किशनगंज क्षेत्र के अलावा आसपास के क्षेत्रों में SDRF टीम द्वारा 56 अभियान चलाकर 193 लोगों को सुरक्षित बचाया गया। 38 व्यक्तियों के शव को रेस्क्यू कर स्थानीय प्रशासन को सुपुर्द किया गया।

3. अकलेरा जिला झालावाड़​​​​​​​​​​​​​​

अकलेरा क्षेत्र में परवन नदी बारिश में उफान पर रहती है। (फाइल फोटो)
अकलेरा क्षेत्र में परवन नदी बारिश में उफान पर रहती है। (फाइल फोटो)

झालावाड़ जिले के अकलेरा क्षेत्र में परवन नदी, नेवज नदी, गुलन्डी नदी एवं छापी नदी आदि बरसाती नदियां होने के कारण इस क्षेत्र में मानसून के समय बाढ़ के अलावा नदियों में डूबने की घटनाएं काफी अधिक होती है। पिछले 5 वर्षों में अकलेरा क्षेत्र के अलावा आसपास के क्षेत्रों में SDRF टीम द्वारा 26 अभियान चलाकर 46 लोगों को सुरक्षित बचाया गया एवं 27 व्यक्तियों के शवों को रेस्क्यू कर निकाला गया।

4. पुराना चंबल पुल जिला धौलपुर
चंबल नदी का बहाव क्षेत्र होने के कारण जिला धौलपुर में पुराना चंबल नदी पुल के आसपास नदी में डूबने जैसी घटनाएं घटित होती रहती है। SDRF टीम द्वारा पिछले कई वर्षों में 6 रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर 8 शवों को बाहर निकाला गया तथा सर्च ऑपरेशन चलाकर डेड बॉडी की तलाश की गई। लेकिन किसी भी शव की बरामदगी नहीं हुई। यहां कोतवाली इलाके में दमोह झरना पर्यटन क्षेत्र होने के कारण लोगों के डूबने इत्यादि की घटनाएं होती रहती है।

राजस्थान में SDRF का रेस्क्यू ऑपरेशन।
राजस्थान में SDRF का रेस्क्यू ऑपरेशन।

5. बांसवाड़ा- बांसवाड़ा जिले का माही डेम
गेमन पुलिया के आस-पास के क्षेत्र में मानसून के समय बाढ़ के हालात हो जाते हैं तथा गेमन पुलिया पर आए दिन पानी में डूबने के हादसे होते रहते हैं। यहां SDRF टीम उदयपुर मुख्यालय से भिजवाई जाती है जो करीब 165 किलोमीटर दूर पड़ता है। अब तक पिछले 5 वर्षों में बांसवाड़ा जिले में कुल 13 रेस्क्यू ऑपरेशन चलाए जा चुके हैं। जिसमें 12 डेड बॉडी व 2 को जीवित बाहर निकाला जा चुका है।

6. फतेहसागर झील
फतेहसागर झील एक मुख्य पर्यटन स्थल है। फतेहसागर पर आए दिन तैराकी प्रतियोगिता वे नाव प्रतियोगिता चलती रहती है जिसके चलते दुर्घटना होने की बहुत संभावना रहती है। इसके अलावा उदयपुर के बड़ी तालाब में इकोटोन पार्क में भी अक्सर डूबने की घटनाएं घटित होती रहती है।

मानसून में राजस्थान में जलभराव के नजारे।
मानसून में राजस्थान में जलभराव के नजारे।

7. आनासागर झील अजमेर
अजमेर शहर के मध्य में स्थापित होने के कारण अजमेर शहर का संपूर्ण बरसाती पानी इसी झील में आता है। अजमेर शहर में ख्वाजा साहब का विश्वविख्यात उर्स का मेला लगता है व पुष्कर मेला लगता है। लाखों जायरीन हर वर्ष आते रहते हैं, जो इस झील में स्नान करते हैं। जिससे कभी-कभी जायरीनों के डूबने की घटनाएं होती रहती है। पिछले 5 वर्षों में किशनगंज थाना वेद गंज थाना में कुल 78 लोगों की इस झील में डूबने से मौतों का आंकड़ा है। अब तक कुल 5 रेस्क्यू किए गए हैं जिनमें 5 डेड बॉडी व एक कटा हुआ पैर का रेस्क्यू किया गया है।

8. सांचौर, जिला जालोर
जालोर जिले का सांचौर क्षेत्र बरसाती नदियों तथा नर्मदा नहर से सिंचित इलाका होने के कारण इस क्षेत्र में मानसून के समय बाढ़ के अलावा नर्मदा नहर में डूबने की घटनाएं काफी अधिक होती है। जिसके लिए निकटतम एसडीआरएफ टीम जोधपुर मुख्यालय से भिजवाई जाती है। जो करीब 300 किलोमीटर दूर पड़ता है। पिछले 5 वर्षों में सांचौर क्षेत्र में SDRF टीम द्वारा 10 बचाव अभियान चलाकर 102 लोगों को सुरक्षित व 10 व्यक्तियों के शव निकाले गए हैं।

9. कायलाना झील जिला जोधपुर

करीब दो-तीन किलोमीटर इलाके में फैले इस जल स्रोत में अक्सर आत्महत्या जैसी घटनाएं भी होती रहती है।
करीब दो-तीन किलोमीटर इलाके में फैले इस जल स्रोत में अक्सर आत्महत्या जैसी घटनाएं भी होती रहती है।

कायलाना झील राजीव गांधी लिफ्ट कैनाल से जुड़ा हुआ जोधपुर शहर का एक मुख्य जल स्त्रोत है। जहां पर अक्सर डूबने की घटनाएं होती रहती है। करीब दो-तीन किलोमीटर इलाके में फैले इस जल स्रोत में अक्सर आत्महत्या जैसी घटनाएं भी होती रहती है। पिछले 5 सालों में SDRF द्वारा कायलाना झील में 13 बचाव अभियान चलाकर 13 शव बरामद किए गए हैं। पिछले 5 सालों में कायलाना झील में डूबने की कुल 43 घटनाएं हुई है। यहां चौकी स्थापित की जाएगी।

10. मसीतावाली हेड जिला हनुमानगढ़​​​​​​​​​​​​​​

इंदिरा गांधी नहर में घग्घर नदी में डूबने की घटनाएं काफी अधिक होती है।
इंदिरा गांधी नहर में घग्घर नदी में डूबने की घटनाएं काफी अधिक होती है।

हनुमानगढ़ जिले में इंदिरा गांधी नहर में घग्घर नदी में डूबने की घटनाएं काफी अधिक होती है। इंदिरा गांधी नहर में अक्सर मनुष्य दुर्घटनावश या आत्महत्या के इरादे से व्यक्ति अकेला या वाहन सहित गिरते रहते हैं। पिछले 5 वर्षों में 17 घटनाओं में रिपोर्ट दर्ज हुई। यहां वर्ष भर में 10-15 घटनाएं हो जाती है। पिछले 5 वर्षों में इस क्षेत्र में SDRF द्वारा 3 बचाव अभियान चलाकर 9 शव बरामद किए गए।

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