मानसून की विदाई के साथ मौसमी बीमारियों का कहर:डेंगू, मलेरिया के बाद साथ ही लेप्टोस्पाईरोसिस, वायरल फीवर के केस बढ़े; SMS में ओपीडी की संख्या 8 हजार तक पहुंची

जयपुर19 दिन पहले
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SMS हॉस्पिटल के धन्वन्तरी ओपीडी में लगी मरीजों की भीड़। - Dainik Bhaskar
SMS हॉस्पिटल के धन्वन्तरी ओपीडी में लगी मरीजों की भीड़।

राजस्थान में मानसून की विदाई होने के साथ ही साथ ही मौसमी बीमारियों का कहर शुरू हो गया। मौसम बदलाव के साथ ही जहां लोगों को वायरल फीवर, सामान्य बुखार तो हो ही रहा है, वहीं डेंगू, मलेरिया के साथ ही लेप्टोस्पाईरोसिस के केस भी बढ़ने लगे है। लेप्टोस्पाईरोसिस भी एक तरह का बुखार है जो लेप्टोस्पाइरा नाम के बैक्टीरिया से फैलता है। बढ़ती मौसमी बीमारियों को देखते हुए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को इनकी रोकथाम के लिए जन जागरुकता अभियान चलाने के निर्देश दिए है।

जयपुर के सवाई मानसिंह हॉस्पिटल (SMS) में तो इन दिनों ओपीडी में सबसे ज्यादा मौसमी बीमारियों से पीड़ित मरीज दिखाने आ रहे हैं। इस कारण यहां ओपीडी की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में लगभग डेढ़ गुना बढ़ गई है। सामान्य दिनों में SMS में ओपीडी में मरीजों की संख्या 4 से 5 हजार रहती है, जो इन दिनों बढ़कर 8 हजार तक पहुंच गई है। इन दिनों लेप्टोस्पाईरोसिस के केसों ने थोड़ी चिंता बढ़ा दी है।

एसएमएस हॉस्पिटल के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर और यूनिट हेड डॉ. पुनीत सक्सेना की माने तो लेप्टोस्पाईरोसिस के केस में 90 फीसदी मरीजों में बुखार के साथ-साथ मांसपेशियों में दर्द के लक्षण होते है। इसके अलावा 5-10 फीसदी मरीजों में सिरदर्द, पेट दर्द, उल्टी दस्त, आंखों का एकदम से लाल होना, शरीर पर लाल चकते आ जाना जैसे लक्षण दिखते है। इस बैक्टीरिया की चपेट में आने वाले व्यक्ति के लक्षण 5-10 दिन बाद दिखते हैं।

केस बिगड़ने पर फेल हो सकते हैं किडनी व लीवर
डॉ. सक्सेना ने बताया कि इस बीमारी में अगर कोई मरीज लापरवाही करता है और इलाज समय पर नहीं करवाता, तो केस बिगड़ भी जाते हैं। जिसके बाद उसे हाई डोज के एंटी बॉयोटिक्स इंजेक्शन देने पड़ते हैं। वहीं मरीज के किडनी व लीवर के फेलियर होने और दिमागी बुखार से ग्रसित होने के चांस ज्यादा बढ़ जाते हैं। उन्होंने बताया कि यह बीमारी मुख्य रूप से पशुओं के जरिए फैलती है। किसी व्यक्ति के हाथ-पांव में कटे-फटे भाग पर इस बीमारी से संक्रमित पशु के मल-मूत्र या जहां यह मल-मूत्र गिरा है उस मिट्‌टी के संपर्क में आने पर फैलता है।

इसके अलावा आपके हाथ गंदे हैं और आप उन्हीं हाथों से आंख, नाक, मुंह साफ करते हैं तो इससे भी इस बीमारी के फैलने का खतरा रहता है। पशुपालन करने वालों, नहरी क्षेत्र में रहने वाले और खेतों में काम करने वाले लोगों को ज्यादा सावधान रहना चाहिए। साथ ही समय-समय पर हाथ-पांव अच्छे से साबुन से धोते रहना चाहिए।

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