जन संकल्प से हारेगा कोरोना:परिवार के सात लोग संक्रमित हुए; तनाव से ऊपर उठे, योग से भगाया रोग

जयपुर6 महीने पहले
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  • गंभीर कोरोना संक्रमण होने के बावजूद अपनी इच्छाशक्ति से कोरोना को हराने वालों की जांबाज कहानियां, पढ़िए आज चौथी कड़ी में दिनेश जायसवाल की कहानी।

मेरी शुरू से ही एक आदत है कि मैं हर विषय में दो पहलू देखता हूं। पॉजिटिव के साथ-साथ उस विषय के निगेटिव पहलुओं पर भी ध्यान देता हूं। कोरोना सबको डरा रहा था। सोशल मीडिया पर देखें तो कोरोना के डरावने आंकड़े, टीवी ऑन करें तो ऑक्सीजन, बेड की जद्दोजहद। इन सबसे तो मन घबरा ही रहा था। फिर ऑफिस में और जान-पहचान में कुछ लोगों की कोरोना से मौत की खबरें सुनीं।

इसी दौरान अचानक पिता रामेश्वर प्रसाद (75) और मां लाड देवी (72) को जुखाम, बुखार हो गया, जबकि वे घर ही रहते हैं। कभी बाहर ही नहीं निकले। लक्षण देखकर जब जांच कराई तो कोरोना पॉजिटिव होने का पता लगा। एक बार तो मानो डर की कोई सीमा नहीं थी। इसके बाद मैं, पत्नी, बेटा, छोटे भाई की पत्नी और उनकी बेटी भी पॉजिटिव आ गए। पॉजिटिव आए तो लोगों से राय ली और अपने आप को 14 दिन के लिए क्वारेन्टाइन कर लिया। सकारात्मक सोच से सब ठीक हो गया।

3 ऑक्सीमीटर और 7 थर्मामीटर खरीदे, हर घंटे सबका एग्जामिनेशन करने लगे
ऑक्सीजन की कमी के बारे में देख ही रहे थे। परिवार के 7 जनों को कोरोना होते ही 3 ऑक्सीमीटर और 7 थर्मामीटर खरीद लिए। हर घंटे सबका एग्जामिनेशन करने लगे। शुरुआत के 3 दिन तेज बुखार के साथ मानसिक तनाव में गुजरे। इसी बीच एक रात को पत्नी का ब्लड प्रेशर बढ़ गया, जिसे एसएमएस इमरजेंसी में ले गए। फिर एक बार बच्चे को खांसी तेज हुई तो आरयूएचएस में पहुंचे।

हमने शुरू के 3 दिन डर-डर के जिए हैं, लेकिन हर जगह धरती के भगवान यानी डॉक्टरों ने हमें फुल सपोर्ट किया है और अभी सब स्वस्थ हैं।

ठीक होने के बाद भी एहतियात बरत रहे हैं
हम सभी अलग-अलग आइसोलेट हैं। योग से रोग भागा। ठीक होने के बाद भी कुछ दिन तक एहतियात बरत रहे हैं। सब दवाइयों से लेकर केयर करने तक एक-दूसरे की मदद कर रहे। महामारी से हमें एक सबक मिला है कि इससे डरकर जितना तनाव लेंगे, यह बॉडी पर उतना ही प्रभाव डालेगी। हम सब अब पॉजिटिव मन से सावधानी बरतते हुए डॉक्टरों द्वारा बताई गई दवाइयां लेते रहे हैं। - जैसा अर्पित शर्मा को बताया।

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