ब्लैक फंगस का हमला:दांतों और जबड़े में फैला, दो सौ में से 125 की सर्जरी, 30 का तो ऊपरी जबड़ा पूरा निकालना पड़ा

जयपुरएक वर्ष पहलेलेखक: सुरेन्द्र स्वामी
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कोरोना-ब्लैक फंगस का खौफ कम हुआ है लेकिन आरयूएचएस कॉलेज ऑफ डेंटल साइंस में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। - Dainik Bhaskar
कोरोना-ब्लैक फंगस का खौफ कम हुआ है लेकिन आरयूएचएस कॉलेज ऑफ डेंटल साइंस में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।

कोरोना-ब्लैक फंगस का खौफ कम हुआ है लेकिन आरयूएचएस कॉलेज ऑफ डेंटल साइंस में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। यहां के डॉक्टरों के पास कोरोना काल में ब्लैक फंगस के 200 मरीज पहुंचे, जिनमें से 125 की सर्जरी करनी पड़ी। ब्लैक फंगस इनके दांतों-जबड़ों तक फैल गया था। इनमें से 30 का तो ऊपरी जबड़ा तालू सहित निकालना पड़ा। हालांकि सभी सर्जरी सफल रहीं। दावा है कि सरकारी क्षेत्र में ऐसे ऑपरेशन इतनी संख्या में सिर्फ जयपुर में हुए हैं।

जबड़े का हिस्सा गल गया था, 50 का आधा और 45 का गला हुआ हिस्सा निकाला

आरयूएचएस कॉलेज ऑफ डेंटल साइंस के डॉक्टरों ने बताया कि इन मरीजों में ब्लैक फंगस ऊपरी जबड़े, तालू, ऊपरी दांतों तक पहुंच गया था। पोस्ट कोविड मरीजों के दांतों-जबड़ों में अधिक संक्रमण पर जबड़ा ही निकालना पड़ा। सर्जरी वालों में से 30 मरीजों का ऊपरी जबड़ा (कंपलीट मेक्सिलेक्टोमी) तालू के साथ निकालना पड़ा। 50 मरीजों का आधा जबड़ा (यूनीलेटरल) और 45 मरीजों का गला हुआ हिस्सा (सेगमेंटल) निकाला गया।

न डायबिटीज और न स्टेराइड लिया, फिर भी ब्लैक फंगस
कुछ मरीज ऐसे थे, जिन्हें कोरोना नहीं था पर ब्लैक फंगस था। इनमें युवा अधिक थे। डॉ. संकल्प मित्तल ने बताया, कुछ मरीजों को न डायबिटीज थी, न स्टेराइड लिया मगर ब्लैक फंगस था।

शुगर पर बड से भी खतरा
जिन मरीजों में शुगर लेवल ज्यादा हो, उन्हें कोरोना जांच के लिए नाक में डालने वाले बड से भी खतरा है। बड के अनस्ट्रेलाइज्ड होने पर नाक की परत छील देने पर ब्लैक फंगस फैल सकता है।

दांत हिलने लगें तो ढिलाई न बरतें, डॉक्टर को दिखाएं
विशेषज्ञों ने चेताया, कोरोना से उबरने के बाद दांत हिलने के पीछे चोट, संक्रमण सहित कई कारण संभव हैं। सफेद धब्बों, मसूड़ों में दर्द की अनदेखी न करें। दांत हिलने लगे तो डॉक्टर को दिखाएं।

ये हैं लक्षण

  • नाक में दिक्कत महसूस होना
  • सिरदर्द
  • चेहरे के 1 हिस्से में दर्द या सूजन
  • चेहरा सुन्न
  • चेहरे का रंग बदल सकता है
  • सांस लेने में दिक्कत
  • खांसने पर खून आना
  • धुंधला नजर आना

सभी का जीवन बचाया
समय पर तालू, जबड़ा और गला हुआ हिस्सा निकालकर सभी मरीजों का जीवन बचाया है। सरकारी स्तर पर ब्लैक फंगस के मरीजों की सबसे ज्यादा सर्जरी करने वाला यह पहला अस्पताल है। शरीर के अन्य अंगों में फैलने पर जान का खतरा बढ़ता है। - डॉ. विनय कुमार, विभागाध्यक्ष, ओरल एंड मेक्सिलो फेशियल सर्जरी, आरयूएचएस कॉलेज ऑफ डेंटल साइंस, जयपुर