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स्कूलों से लेकर नीट-जेईई तक में नकल:केंद्र सरकार के आग्रह पर आगे आए स्टार्टअप, दिए 122 सुझाव, सीबीएसई एग्जाम भी एआई से हो सकते हैं

जयपुरएक महीने पहलेलेखक: अभयदीप शर्मा
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दिसंबर में सुझावों पर मंथन होगा, अगले साल मार्च तक आ सकते हैं परीक्षाओं के नए नियम। - Dainik Bhaskar
दिसंबर में सुझावों पर मंथन होगा, अगले साल मार्च तक आ सकते हैं परीक्षाओं के नए नियम।

केंद्र सरकार देश में स्कूली परीक्षाओं में बड़े बदलाव करने की तैयारी में है, अगले साल मार्च तक इनकी घोषणा संभव है। योजना के तहत सीबीएसई की परीक्षाओं के लिए आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जरिए ऑनलाइन प्रॉक्टोरिंग जैसे उपायों की मदद ली जाएगी। दरअसल, कोरोना और नकल व पेपर लीक के कारण सुरक्षित तरीके से परीक्षाएं कराना बड़ी चुनौती बना हुआ है।

इसलिए ‘स्टार्टअप इंडिया’ के जरिए केंद्र सरकार ने परीक्षाओं को लेकर सुझाव मांगे थे। इसमें आईआईटी और आईआईएम के अलावा अन्य संस्थानों ने 122 सुझाव दिए। इसमें सबसे प्रमुख था ऑनलाइन प्रॉक्टोरिंग से परीक्षाएं कराना, क्योंकि अभी कई परीक्षाएं इसी तकनीक के जरिए कराई जा रही हैं और इससे नकल-पेपर लीक पर काफी हद तक काबू पाया गया है।

बता दें, नकल-पेपर लीक समस्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी नाराजगी जता चुका है। फरवरी में कोर्ट ने कर्नाटक में पेपर लीक मामले की सुनवाई करते हुए कहा था, ‘हम उन मामलों से गुजर रहे हैं जहां शिक्षा प्रणाली विकृत की गई है।’

शरीर के हर मूवमेंट की निगरानी करती है ऑनलाइन प्रॉक्टोरिंग

सामान्य परीक्षाओं की तरह ऑनलाइन प्रॉक्टेड परीक्षा में भी समय तय रहता है। इसमें घर, किसी सेंटर पर कम्प्यूटर या मोबाइल से भी परीक्षा दे सकते हैं। संस्थान परीक्षार्थी को एक लिंक देता है, इसी पर परीक्षा ली जाती है। लिंक पर क्लिक करने के बाद परीक्षार्थी कोई दूसरा ब्राउजर उस सिस्टम पर नहीं खोल सकता जिस पर परीक्षा दे रहा है।

साथ ही स्क्रीन की मिररिंग भी नहीं हो सकती है। सॉफ्टवेयर परीक्षार्थी के सिस्टम में लगे वेब कैमरे से वीडियो और ऑडियो दोनों की निगरानी करता है। यह सॉफ्टवेयर परीक्षार्थी के हाव-भाव और शरीर के मूवमेंट तक की निगरानी करता है।

कोरोना के कारण बदलाव शुरू हुआ है

इंटरनेशनल बैचलरेट (आईबी) जैसे अंतरराष्ट्रीय स्कूल बोर्ड प्रॉक्टोरिंग से ही परीक्षाएं करा रहे हैं। देश में परीक्षाओं का सिस्टम बदलने की कवायद कोरोना के बाद शुरू हुई है। इसके लिए एआई का सहारा लिया जा रहा है। इसमें स्टार्टअप इंडिया के जरिए महत्वपूर्ण सुझाव मिले हैं, दिसंबर में इन पर मंथन होगा।’- डॉ. जवाहर सूरी शेट्‌टी, केंद्र सरकार के सलाहकार

ऑनलाइन प्रॉक्टोरिंग का चलन और बढ़ेगा

प्रॉक्टोरिंग से नकल या पेपर लीक की संभावना न के बराबर है। इसमें कई सुरक्षा उपाय किए जाते हैं। अभी देश में आरटीयू, आईआईटी, एकेयू, डीटीयू जैसे संस्थान परीक्षाओं में ऑनलाइन प्रॉक्टरिंग का सहारा ले रहे हैं। कोरोना महामारी से उपजे हालात के चलते इसका चलन आगे और बढ़ने की संभावना है।’- डॉ. नीरज जैन, डिप्टी रजिस्ट्रार, आरटीयू

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