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कोटा एसीबी ने जयपुर में घूसखोर को पकड़ा:राज्य परिवहन प्राधिकरण का अफसर मांग रहा था 50 हजार रुपए की रिश्वत, 15 हजार रुपए की पहली किश्त लेते ट्रेप, पीड़ित से कहा- सरकारी डिपार्टमेंट में सिस्टम होता है, सबको देना पड़ता है

जयपुर2 वर्ष पहले
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जयपुर में कोटा एसीबी की गिरफ्त में आया घूसखोर सांख्यिकी अधिकारी - Dainik Bhaskar
जयपुर में कोटा एसीबी की गिरफ्त में आया घूसखोर सांख्यिकी अधिकारी

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो कोटा की टीम ने सोमवार को जयपुर में राज्य परिवहन प्राधिकरण के एक अफसर को 15 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद उसके आवास और अन्य ठिकानों पर तलाशी ली जा रही है। एसीबी के डीजी बीएल सोनी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी सत्यनारायण रावत है। वह राज्य परिवहन प्राधिकरण (एसटीए) के सचिव कार्यालय में सांख्यिकी अधिकारी है। वह सेक्टर 10, मालवीय नगर जयपुर का रहने वाला है। अभी जगतपुरा में ही महादेव नगर में रहता है।

डीजी बीएल सोनी के मुताबिक सत्यनारायण रावत के खिलाफ रंगबाड़ी योजना, कोटा में रहने वाले जितेंद्र खत्री ने एसीबी कोटा कार्यालय में शिकायत दर्ज करवाई थी कि उसकी ट्यूर एवं ट्रैवल फर्म है। जिसका बाइक रेंटल सर्विस सर्टिफिकेट बनाने के लिए सांख्यिकी अधिकारी सत्यनारायण रावत 50 हजार रुपए की रिश्वत मांग रहा है। वह काम करने की एवज में लगातार रिश्वत देने का दबाव बना रहा है और प्रमाण पत्र नहीं बना रहा है।

तब एसीबी कोटा के एएसपी ठाकुर चंद्रशील कुमार के नेतृत्व में शिकायत का सत्यापन किया गया। जिसमें आरोपी रावत ने पीड़ित को रिश्वत की रकम लेकर जयपुर में अपने ऑफिस बुलाया। रिश्वत में पहली किश्त के रुप में 15 हजार रुपए देना तय हुआ था। ऐसे में ज्योंही पीड़ित जितेंद्र खत्री ने सत्यनारायण को रिश्वत की रकम सौंपी। तभी इशारा मिलते ही एसीबी टीम ने उसे धरदबोचा। इसके बाद एंटी करप्शन एक्ट के तहत केस दर्ज कर आरोपी के घर और अन्य ठिकानों पर तलाशी की जा रही है।

पीड़ित से कहा- सरकारी डिपार्टमेंट में सिस्टम होता है, तीन अफसर है, सबको देना पड़ता है

एएसपी चंद्रशील ठाकुर ने बताया कि शिकायत के सत्यापन के लिए हुई बातचीत में पीड़ित जितेंद्र खत्री ने घूसखोर सत्यनारायण से रिश्वत की रकम कम करने को कहा। तब सत्यनारायण रावत ने कहा कि सरकारी डिपार्टमेंट में सिस्टम होता है। चैनल होता है। तीन अधिकारी साइन करते है। जिनको भी देना पड़ता है। फिक्स होता है। तब सत्यनारायण ने जितेंद्र खत्री से 50 के बजाए 40 हजार रुपए लेकर काम करने को कहा। इसके बाद परिवादी जितेंद्र ने 30 हजार रुपए देने को कहा। तब सौदा दो किश्तों में रिश्वत देना तय हुआ। इसमें 15 हजार रुपए सर्टिफिकेट जारी करने के पहले और 15 हजार रुपए काम होने के बाद तय हुआ। ट्रेप की यह कार्रवाई पुलिस इंस्पेक्टर अजीत बागड़ोलिया के नेतृत्व में हुई।

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