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सतर्कता:बर्ड फ्लू को लेकर सख्ती; चिड़ियाघराें में विशेष निगरानी और सतर्कता के निर्देश

जयपुर2 महीने पहले
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  • सभी जिलों में वेटलैंड पर संबंधित डीएफओ को विजिट कर रिपोर्ट मांगी गई

कोरोना महामारी का दंश झेल रहे इंसान बीमारी की घुटन और दर्द को महसूस कर सकते हैं, लेकिन परिंदों के दर्द को कौन समझे। देश की सबसे बड़ी सांभर पक्षी त्रासदी के बाद अब चारों ओर बर्ड फ्लू। करें भी तो क्या! केवल मौत का इंतजार। आखिर आसमान में कैसे इनको इलाज दें।

बस मरने के बाद बॉडी को दफन करने की जल्दी। ताकि ये फैल न सके और हमारा भी बचाव हो सके। अब मकर सक्रांति भी परिंदों के लिए आफत लेकर आने वाली है। कहने को सरकार ने सुबह शाम परिंदों के बाहर निकलने और लौटने के समय में पतंगबाजी पर पाबंदी लगा रखी है, लेकिन दिनभर आसमान छूती पतंगे परिंदों के लिए आफत ही रहती हैं। इस बीच अब जमीन पर कैद परिंदों की सुरक्षा के इंतजाम हो रहे हैं।

वन विभाग ने हायर लेवल बैठक कर सभी चिड़ियाघराें में विशेष निगरानी और सतर्कता बरतने के निर्देश हुए हैं। फिलहाल यहां बंद का मतलब है, बाहर पैनिक। इसलिए सख्त निर्देश हैं कि बतखों और दूसरे पक्षियों को अच्छे से कवर्ड कर रखा जाए। यदि कोई हताहत होता है तो तुरंत इसकी सूचना मुख्यालय को दें, ताकि बंद जैसे जरूरी उपाय किए जा सकें। इसके साथ ही थीम बेस्ड मॉनिटरिंग के तहत सभी जिलों में वेटलैंड पर संबंधित डीएफओ को विजिट कर रिपोर्ट मांगी गई है। ताकि खुले एरिया में मृत पक्षी और उनमें फ्लू की आशंका को पुख्ता किया जा सके।

माइग्रेटरी बर्ड्स का पीक सीजन, जलमहल पहुंचते हैं 20-25 प्रजातियाें के पक्षी
यह मौसम टूरिज्म के साथ ही माइग्रेटरी बर्ड्स के भी पीक पर्यटन का है। हमारे यहां साइबेरिया, भूटान और यूरोपियन कंट्री से हजारों की तादात में सैकड़ों पक्षियों की प्रजातियां इन दिनों आती है। इनमें वेडर्स और डक प्रजाति सर्वाधिक हैं। अकेले जलमहल एरिया में ही करीब 20-25 प्रजातियां देखी जाती हैं। कानोता डेम, शिवदासपुरा में चंदलाई, बरखेड़ा और जनता सागर हैं तो सांभर लेक, मुहाना वाटर बॉडीज, मूंडिया का तालाब (चाकसू) भी बर्डिंग के लिए काफी लोकप्रिय है। दौसा में कालख बांध और गेटेलाओ तालाब हैं।

फिलहाल माइग्रेटरी बर्ड सुरक्षित, लेकिन अब भी खतरा बरकरार

पक्षी विशेषज्ञ राज चौहान ने कहा कि सीजन में फ्लू ने डर तो पैदा किया ही है। पिछले दिनों ही बॉम्बे, अहमदाबाद, दिल्ली से कई पक्षी प्रेमी हमारे यहां आ रहे थे, लेकिन अब उन्होंने अपने प्रोग्राम रद्द कर लिए हैं। एक्सपर्ट रोहित गंगवाल कहते हैं कि माइग्रेटरी बर्ड में फ्लू आता है तो बड़ी मुसीबत का सामना करना पड़ेगा। वहीं हम ऐसी जगहों पर जाते हैं तो फ्लू के कैरियर बन सकते हैं।

  • चिड़ियाघरों में विशेष निगरानी के निर्देश हैं। बंद का मतलब तो पैनिक होगा। फिलहाल इसकी जरूरत नहीं। लेकिन कोई मामला आता है तो इस ओर भी निर्णय लेंगे। - एमएल मीणा, चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन
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