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झालाना की सल्तनत पर ‘राणा’ की नजर:डेढ़ साल के बघेरे का ऐसा अंदाज, पर्यटकों को भी पसंद आ रहा, राजाओं की तरह करता है व्यवहार

जयपुर3 महीने पहले
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(फोटो: जनेश्वर सिंह, धीरज कपूर) - Dainik Bhaskar
(फोटो: जनेश्वर सिंह, धीरज कपूर)

जब टाइगर रिजर्व के मुख्य जंगल बंद हो चुके हैं तो झालाना लेपर्ड रिजर्व में टूरिज्म की फिर से बहार है। बागडोर इन दिनों डेढ़ साल के युवा नर बघेरे ‘राणा’ के हाथ है। पर्यटकों को न केवल इसकी खूब साइटिंग हो रही है, बल्कि इसकी खास खूबी तस्वीरों में और जान भर देती है।

रेंजर जनेश्वर सिंह के मुताबिक राणा अपने नाम के मुताबिक राजाओं की तरह व्यवहार करता है, जो अक्सर वॉच टावर या फिर ऊंचाई पर खुले में बैठना पसंद करता है। कुछ समय से इसने जंगल के बीच बने वॉच टावर को अपना ठिकाना बनाया हुआ है, जहां से अपने भविष्य की सल्तनत पर नजर रखता है। स्वभाव से बेहद शर्मीली इस वन्यजीव प्रजाति में नर बघेरे का यह व्यवहार देशभर के पर्यटकों को यहां खींच कर ला रहा है।

जल्द भोजन की सबसे बड़ी कमी पूरी होने की उम्मीद

लेपर्ड से आबाद झालाना जंगल में जल्द ही लंबे समय से चली आ रही प्रेबेस यानी भोजन की कमी पूरी होने की उम्मीद है।वन विभाग यहां दूसरी जगहों से चीतल लाकर छोड़ने की प्लानिंग कर रहा है। इस संबंध में चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन मोहन लाल मीणा प्रयासरत हैं।

स्टेट वाइल्डलाइफ बोर्ड के सदस्य धीरेंद्र गोधा के मुताबिक यह प्रयास झालाना को आबाद करने में मील का पत्थर साबित होगा। जंतुआलयों के बजाय जंगल के चीतल छोड़ने का प्रयास ही सराहनीय बनेगा। इससे जंगल का संतुलन भी बनेगा। साथ में विभाग को निरंतर ग्रास लैंड पर भी काम आगे बढ़ाने की जरूरत है।