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आरयूएचएस डेंटल कॉलेज:सिस्टम का दर्द; बिना बेहोश किए ही ब्लैक फंगस के मरीजों के जबड़े का ऑपरेशन

जयपुर3 महीने पहलेलेखक: सुरेन्द्र स्वामी
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यहां पर एनीस्थिसिया कंसल्टेंट है लेकिन रेजिडेंट नहीं होने से दर्द कम नहीं हो रहा है। - Dainik Bhaskar
यहां पर एनीस्थिसिया कंसल्टेंट है लेकिन रेजिडेंट नहीं होने से दर्द कम नहीं हो रहा है।
  • एनीस्थिसिया देने की जिम्मेदारी भी सर्जन के पास है

प्रदेश के एकमात्र सरकारी आरयूएचएस कॉलेज ऑफ डेंटल इन दिनों दर्द का सबब बना हुआ है। ब्लैक फंगस के कारण मरीजों का जबड़ा सिर्फ लोकल एनीस्थिसिया देकर निकाला जा रहा है जबकि जबड़े जैसे ऑपरेशन बेहोश किए बिना संभव नहीं हैं। यहां पर एनीस्थिसिया कंसल्टेंट है लेकिन रेजिडेंट नहीं होने से दर्द कम नहीं हो रहा है। यहां सालभर से एनीस्थिसिया का डॉक्टर ही नहीं है।

एनीस्थिसिया देने के लिए कंसल्टेंट टेम्पररी बेसिस पर है पर रेजिडेंट नहीं होने से मरीजों की परेशानी बढ़ गई है

24 घंटे ऑपरेशन होते हैं पर जनरेटर खराब : आरयूएचएस कॉलेज ऑफ डेंटल साइंस में बिजली जाने के बाद जनरेटर लगा था लेकिन मशक्कत के बाद भी खराब होने से चालू ही नहीं हुआ। ऐसे में मरीजों का जान आफत पर बन आती है। लापरवाही तो देखिए आज दिनांक तक जनरेटर ठीक नहीं हुआ। जबकि जिम्मेदार ये कहकर पल्ला झाड़ रहे है कि पिछले कुछ समय से ऑपरेशन भी नहीं हो रहे है।

आक्सीजन सिलेंडर का संकट

ब्लैक फंगस के मरीजों के लिए आक्सीजन सिलेंडर के लिए मारामारी है। कारण टेंडर खत्म हो गया है। अब जरूरत पड़ने पर डॉक्टरों को अपनी जेब से पैसे देकर आक्सीजन सिलेंडर लाना पड़ रहा है। रोजाना 15 से 20 आक्सीजन सिलेंडर की डिमांड रहती है। सरकार को तीसरी लहर को देखते यहां पर भी आक्सीजन जनरेशन प्लांट बनाना चाहिए।

रेजिडेंट क्यों नहीं है, दिखवाता हूं

एनीस्थिसिया, फार्माकोलोजी, एनाटॉमी,पैथोलोजी माइक्रोबायलोजी का डॉक्टर तो होना चाहिए। फिर भी मैं दिखवाता हूं। -वैभव गालरिया, मेडिकल शिक्षा सचिव

एनीस्थिसिया का कंसल्टेंट है। रेजिडेंट के लिए आरयूएचएस को पत्र लिखा है।
-डॉ.संदीप टंडन, प्राचार्य, आरयूएचएस डेंटल कॉलेज

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