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आईपीडी टावर:राज.ट्रांसपेरेंसी एक्ट के खिलाफ है सिंगल फर्म का टेंडर, 21 माह की शर्त भी गलत

जयपुर4 दिन पहले
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रिपोर्ट में उदाहरण रखा गया है कि 2016 में आरएसआरडीसी ने भीलवाड़ा मेडिकल कॉलेज में भी सिंगल फर्म के टेंडर का मसला कई महीने अटकने के बाद खारिज किया गया था।  - Dainik Bhaskar
रिपोर्ट में उदाहरण रखा गया है कि 2016 में आरएसआरडीसी ने भीलवाड़ा मेडिकल कॉलेज में भी सिंगल फर्म के टेंडर का मसला कई महीने अटकने के बाद खारिज किया गया था। 
  • 6 डायरेक्टर इंजीनियर- फाइनेंस अफसरों की रिपोर्ट

405 करोड़ के आईपीडी टावर का काम सिंगल फर्म को देना ‘राजस्थान ट्रांसपेरेंसी इन पब्लिक प्रिक्योरमेंट एक्ट 2013’ के खिलाफ है। ऐसा करने से एक्ट के नियम-68 की पालना नहीं हो रही, जो कि काम में प्रतिस्पर्धा वाली बात कहता है। लेकिन चूंकि सिंगल फर्म ही टेक्नीकल और फाइनेंशियल बिड में पास होती है तो प्रतिस्पर्धा होगी कैसे?

यह बात आईपीडी टावर के टेंडर को लेकर बनाई गई 6 डायरेक्टर इंजीनियर और डायरेक्टर फाइनेंस की सब-कमेटी ने रिपोर्ट में कही है। 3 पन्ने की रिपोर्ट 3 आईएएस वाली कमेटी को दी गई है। यही नहीं 21 माह में ही प्रदेश की सबसे ऊंची बिल्डिंग के काम की शर्त टेंडर में है, उसे भी कमेटी ने गलत माना।

बताया गया है कि इस कंडीशन के चलते कई फर्मों ने टेंडर में भाग नहीं लिया। चूंकि इस समय में इतना काम मुमकिन नहीं लगता। रिपोर्ट में उदाहरण रखा गया है कि 2016 में आरएसआरडीसी ने भीलवाड़ा मेडिकल कॉलेज में भी सिंगल फर्म के टेंडर का मसला कई महीने अटकने के बाद खारिज किया गया था।

बिल्डिंग वर्क पर शर्तें हेरिटेज की

टेंडर डॉक्यूमेंट में कई शर्तें स्पष्ट नहीं मानी गई हैं। इसके चलते कॉम्पीटिशन नहीं हुआ। इसमें हेरिटेज फसाड़, सौ साल लाइफ आदि बातें शामिल हैं। जबकि ये इस नेचर के बिल्डिंग/हॉस्पिटल वर्क से संबंधित होना है।

इधर, मंगलवार की शाम को हुई बैठक के दौरान तीनों आईएएस कमेटी की रिपोर्ट से सहमत दिखे। लेकिन चूंकि मसला राज्य सरकार का है तो यूडीएच और चिकित्सा मंत्री को ब्रीफ करना है। इसके बाद रि-टेंडर की सिफारिश करेंगे।

किसके दबाव में जल्दबाजी और बार-बार नेगोशिएशन
राज्य सरकार ने मेडिकल सर्विसेज में इजाफे के लिए पांच विभागों से पाई-पाई जुटा आईपीडी टावर का प्लान किया है। अव्वल तो प्रदेश की सबसे ऊंची बिल्डिंग की मेंटिनेंस, सर्विसेज आदि से जुड़े सवाल पहले ही उपजे हैं, इससे अलग सिंगल फर्म से जिस तरह बार-बार नेगोशिएशन किया उसने इसमें कई अंदेशे पैदा कर दिए हैं। अब भी सवाल आईपीडी टावर के लिए फाइनल की जाने वाली दरों को लेकर बना रहेगा।

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