जेसीटीएसएल घूसकांड:एमडी को 6 घंटे तक रिश्वत की रकम नहीं पकड़ा सका एजेंसी मालिक; फलों की टोकरी में देते धरा

जयपुर9 महीने पहले
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घूस का फल जेल होता है; दोनों 2 दिन की रिमांड पर - Dainik Bhaskar
घूस का फल जेल होता है; दोनों 2 दिन की रिमांड पर
  • एमडी वीरेंद्र वर्मा ने 10 लाख रुपए मांगे थे और चार लाख में डील फाइनल हुई थी
  • आठ महीने से जेसीटीएसएल में नहीं लगाया गया स्थायी एमडी

जेसीटीएसएल के एमडी वीरेन्द्र वर्मा और पारस ट्रेवल एजेंसी के मालिक नरेश सिंघल एसीबी कार्रवाई से पहले 6 घंटे साथ रहे। एसीबी दाेनाें का लगातार पीछा करती रही और एमडी ने भी पकड़े जाने के डर से रास्ते में रिश्वत नहीं ली। दिन बीता तो दोनों ने राहत की सांस ली। शाम को नरेश सिंघल को एमडी वीरेंद्र वर्मा ने घर पर चाय पीने के लिए बुलाया। बेसमेंट में जैसे ही नरेश ने वीरेंद्र को फलों की टोकरी में चार लाख रखकर दिए, तभी एसीबी ने ट्रेप कर लिया।

इस कार्रवाई से हड़कंप मच गया। इधर, गिरफ्तारी के बाद एसीबी ने एमडी वीरेन्द्र वर्मा और ट्रेवल्स कंपनी के संचालक नरेश सिंघल काे रविवार काे काेर्ट में पेश कर दाे दिन केे रिमांड पर लिया है। इधर, सहायक लेखा अधिकारी महेश गाेयल काे जेल भेज दिया। गौरतलब है कि घूस लेने को लेकर लगातार एसीबी को सूचनाएं मिल रही थीं।

घूस का फल जेल होता है; दोनों 2 दिन की रिमांड पर
एसीबी को यकीन हो गया कि शनिवार को वीरेंद्र घूस लेगा तो दोनों पर नजर रखनी शुरू कर दी। एमडी ने दस लाख रुपए मांगे थे लेकिन सौदा चार लाख रुपए में हुआ। बसाें काे हरी झंडी दिखाने के दाैरान एसीबी की टीम वहीं मौजूद थी। कार्यक्रम के बाद एमडी वीरेन्द्र और नरेन्द्र सिंघल आगरा राेड स्थित बगराना में बने नए डिपाे पर गए। शाम 4 बजे नरेश सिंघल श्याम नगर स्थित हाेटल पहुंचा तो एसीबी की टीम वहां भी पहुंच गई।

सिंघल हाेटल से चार लाख रुपए लेकर निकला और फलाें की टाेकरी में पैसे रख दिए। अजमेर राेड जनकपुरी स्थित एमडी वीरेन्द्र वर्मा के आवास पर पहुंचा। वीरेन्द्र और सिंघल दाेनाें बेसमेंट में पहुंच गए। सिंघल ने जैसे ही फलों की टोकरी वीरेंद्र वर्मा को दी 10 मिनट बाद एसीबी ने गिरफ्तार कर लिया। हालांकि दाेनाें ने एक दूसरे से रुपए उधार लेने-देने की बात कहने लगे। एसीबी साेमवार काे आमने सामने बिठाकर पूछताछ करेगी।

आठ महीने से जेसीटीएसएल में नहीं लगाया गया स्थायी एमडी
जयपुर |
जेसीटीएसएल सबकुछ अच्छा नहीं चल रहा था। लगातार यहां आईएएस अफसरों की एमडी पद पर नियुक्ति की जाती रही लेकिन किसी भी अफसर ने जॉइन नहीं किया। हालय यह हो गई कि आठ महीने से शहर के पब्लिक ट्रांसपोर्ट में अहम भूमिका निभाने वाली इस विभाग में कोई स्थाई एमडी नहीं लगाया गया था। ऐसे में बसों के टेंडर से लेकर भुगतान तक सभी काम वर्मा के ही जिम्मे था। जुलाई 2020 में तत्कालीन एमडी नरेंद्र कुमार गुप्ता के सेवानिवृत्त होने के बाद राज्य सरकार ने इस पद पर किसी एक आईएएस को लगाया, लेकिन उन्होंने रुचि नहीं ली।

बमुश्किल एमडी का चार्ज रोडवेज के तत्कालीन सीएमडी नवीन जैन के पास दिया। लेकिन नवीन जैन ने पास भी एक-दो महीने ही चार्ज रहा। इस दौरान भी वीरेंद्र वर्मा ही जेसीटीएसएल में एमडी स्तर के सभी काम कर रहे थे। नवीन जैन के बाद इस पद पर आईएएस यज्ञमित्र देव सिंह को लगाया गया, लेकिन वे जॉइन करने के बाद अवकाश पर चले गए। इसके बाद यहां से इनका तबादला आयुक्त नगर निगम- ग्रेटर के पद पर सरकार ने कर दिया। इसके बाद से वीरेंद्र कुमार वर्मा को डीएलबी की तरफ से पत्र जारी करके एमडी का चार्ज दे दिया गया, तब से वर्मा ही एमडी के पद लगे हुए हैं।

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