मंडे स्पेशलदिव्या डील करती रही, नशा कारोबार फैलता गया:सबसे बड़े माफिया की 6 फर्जी कंपनियां, नशीली गोलियां-इंजेक्शन राजस्थान भर में पहुंचाया

जयपुर4 महीने पहलेलेखक: रणवीर चौधरी
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2 करोड़ रुपए के घूसकांड में पकड़ी गई SOG की ASP दिव्या मित्तल को जिस ड्रग नेटवर्क को एक्सपोज करना था, वो खास मेहरबानियों के चलते फलता फूलता रहा। छोटे-मोटे ड्रग डीलरों को तो जेल में डाला गया, लेकिन राजस्थान के सबसे बड़े ड्रग माफिया का नाम फाइलों के बीच ही दबा रहा।

2021 में पकड़ी गई 16 करोड़ रुपए की नशीली दवाइयों की जांच SOG की ASP दिव्या मित्तल के अंडर में ही थी। तब दिव्या ने प्रदेशभर में ड्रग रैकेट से जुड़े 27 मुकदमों की फाइलें खंगाली। इस जांच में दिव्या मित्तल को पता चल चुका था कि राजस्थान में मेडिकल नशे का नेटवर्क चलाने वाला एक ही मास्टरमाइंड है, सुशील करनानी। उस पर आज तक शिकंजा नहीं कसा गया था।

सुशील करनानी की कुंडली खंगालने के लिए भास्कर ने पड़ताल शुरू की। उन 27 मुकदमों की जांच करने वाले पुलिस-एसओजी के अफसरों से बात की तो राजस्थान में फैले ड्रग माफिया नेटवर्क का वो काला सच सामने आया जो बेहद खौफनाक है।

मंडे स्पेशल स्टोरी में पढ़िए, कैसे मेडिकल स्टोर पर नौकरी करने वाला राजस्थान में नशीली गोलियां-इंजेक्शन का सबसे बड़ा माफिया बन गया, कैसे उसने 8-8 शहरों में प्रॉपर्टी बना ली और आजतक SOG उसे पकड़ नहीं पाई है…

27 मुकदमों में एक ही नाम, SOG भी चौंक गई

वर्ष 2021 और मई का महीना। राजस्थान पुलिस ने जयपुर और अजमेर में तीन कार्रवाई कर 16 करोड़ की नशीली दवाइयां पकड़ीं। जब जांच SOG के पास पहुंची तो वह भी दंग रह गई। महज जनवरी से मई तक पांच महीनों में नशीली दवाइयों के 27 से ज्यादा मामले दर्ज हो रखे थे, हर मामले में एक ही शख्स का नाम बार-बार सामने आ रहा था। वो है सुशील करनानी, जिसने कभी जेल में बैठकर नेटवर्क की प्लानिंग की और राजस्थान में मेडिकल नशे का सबसे बड़ा सौदागर बन बैठा।

SOG की तत्कालीन ASP दिव्या मित्तल ने उत्तराखंड के जिस ड्रग कंपनी मालिक से 2 करोड़ रुपए की डील की थी, 16 करोड़ रुपए कि शेड्यूल एच ड्रग वहीं से सप्लाई हुई थी।
SOG की तत्कालीन ASP दिव्या मित्तल ने उत्तराखंड के जिस ड्रग कंपनी मालिक से 2 करोड़ रुपए की डील की थी, 16 करोड़ रुपए कि शेड्यूल एच ड्रग वहीं से सप्लाई हुई थी।

नौकरों के नाम कंपनियां, मर्डर तक से परहेज नहीं

ड्रग माफिया सुशील करनानी प्रतिबंधित दवाइयों को फैक्ट्री से मेडिकल स्टोर तक पहुंचाने के लिए अपने ड्राइवर, नौकर, मजदूरों के नाम पर कंपनी बनाकर ड्रग लाइसेंस लेता। फिर उसी फर्म से प्रतिबंधित दवाइयों को पूरे राजस्थान और यूपी में सप्लाई करता। प्रदेश के हर जिले में फर्जी फर्म बनाकर उसने अपने डिस्ट्रीब्यूटर्स बनाए।

सुशील करनानी का नेटवर्क इतना खतरनाक है कि पकड़े जाने के डर से मर्डर तक करवा चुका है। NCB (नेशनल नारकोटिक्स ब्यूरो) और CNB (सेंट्रल नारकोटिक्स ब्यूरो) को फर्जी फर्म के मालिक का नाम पता लगने पर गिरोह ने अपने नौकर की भरतपुर में हत्या करवा दी थी। ताकि वो नारकोटिक्स के आगे अपना मुंह नहीं खोल दे।

आखिर कौन है सुशील करनानी?

बीकानेर के नोखा निवासी सुशील करनानी पुत्र छगनलाल करनानी ने स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई जोधपुर से की। इसके बाद उसने बीकानेर में ही मेडिकल की दुकान पर कई सालों तक काम किया। जहां नशे के एडिक्ट युवक बिना डॉक्टर की पर्ची के नशीली दवाइयां खरीदने आते थे।

राजस्थान पुलिस और SOG के पास रिकॉर्ड में सुशील करनानी का यही फोटो मौजूद है, जो उसके आधार कार्ड का है।
राजस्थान पुलिस और SOG के पास रिकॉर्ड में सुशील करनानी का यही फोटो मौजूद है, जो उसके आधार कार्ड का है।

यहां सुशील को नशीली दवाइयों की बिक्री में मुनाफे का खेल समझ में आया। सुशील ने भी नशीली दवाइयां बेचने के धंधे में पैर जमाने की सोची। करीब 15 साल पहले उसने अपने परिवार को सेफ रखने के लिए बीकानेर से नागालैंड शिफ्ट करवाया। सुशील भी कुछ समय असम के जोरहट जिले और नागालैंड में रहा। वहां रहकर उसने दवाइयां बनाने वाली कंपनियों से मेडिकल शॉप तक सप्लाई होने वाली शेड्यूल एच ड्रग के पूरे सिस्टम को समझा।

सिर्फ एक बार पकड़ा गया ड्रग माफिया सुशील

कुछ समय अपने परिवार के साथ रहने के बाद सुशील 2014 में जयपुर आ गया। यहां उसने अपने कॉलेज के साथी रहे कमलदीप मौर्य के साथ मेडिकल की दुकान खोली। लेकिन इस दौरान मालवीय नगर थाना पुलिस ने उसे नशीली दवाइयां बेचने के मामले में गिरफ्तार कर लिया।

दिसंबर 2015 से जनवरी 2020 तक सुशील जेल में रहा। इस दौरान सुशील को समझ आ गया कि वह खुद के नाम से मेडिकल दुकान या फर्म बनाकर प्रतिबंधित दवाइयां बेचेगा तो फिर से पकड़ा जाएगा।

जेल में बैठकर बनाया फुलप्रूफ ड्रग नेटवर्क का प्लान

  • ड्रग के अवैध कारोबार से रातोंरात अमीर बनने के सपने देखने वाले सुशील ने जेल में रहते पूरे राजस्थान में नेटवर्क तैयार करने का फुलप्रूफ प्लान तैयार कर लिया था।
  • उसने तय किया कि वह अब खुद के नाम से कोई भी मेडिकल दुकान या फर्म नहीं बनाएगा, नहीं तो पुलिस उसे फिर से पकड़ लेगी।
  • इसके लिए उसने अपने मेडिकल स्टोर पर काम करने वाले नौकर, मजदूरों की लिस्ट बनाई। जेल में उसकी शशि भारती नाम के शख्स से दोस्ती हुई।
  • जेल से बाहर आते ही उसने शशि भारती के नाम से ड्रग लाइसेंस लेकर रमैया एंटरप्राइजेज नाम की फर्म बनाई।
  • यहीं से सुशील ने अपने मास्टर प्लान पर काम करना शुरू कर दिया। ये वही कंपनी है, जिसका नाम उन 27 मामलों में सामने आया, जिसकी फाइलें SOG की ASP दिव्या मित्तल के अंडर में थी।

जेल के साथी, ड्राइवर, मजदूरों के नाम पर उसने एक नहीं 6 फर्में बना डाली और पूरे राजस्थान में ड्रग सप्लाई का माफिया बन गया।

सुशील करनानी इस तरह से नौकर-ड्राइवरों के आइडी प्रूफ से कंपनी के एग्रिमेंट बनवाता था। ताकि खुद का नाम कहीं भी उजागर नहीं हो।
सुशील करनानी इस तरह से नौकर-ड्राइवरों के आइडी प्रूफ से कंपनी के एग्रिमेंट बनवाता था। ताकि खुद का नाम कहीं भी उजागर नहीं हो।

सुशील पूरे राजस्थान में नशीली दवाइयों की सप्लाई करने के लिए ये 6 कंपनियां तैयार की…

1. खुद के नाम से फर्म बनाई, लेकिन इससे कभी बिजनेस नहीं किया

मोनटेक्स फार्मास्युटिकल्स - सुशील ने खुद के नाम से मोनटेक्स फार्मास्युटिकल्स, सी - 225 स्कीम नंबर 4 माचड़ा, जयपुर फर्म बनाई थी। होलसेल ड्रग लाइसेंस- JPR/2016/28945, 21B/JPR/2016/28946 की यह फर्म 28 मार्च 2016 को बनी थी और इसकी वैलिडिटी 27 मार्च 2021 थी।

2. नागालैंड में फर्जी फर्म बनाई

सुशील ने HUMANITIES GENICS नागालैंड नाम से फर्जी फर्म बनाई। एसओजी ने जब इस फर्म की जांच की तो नागालैंड ड्रग कंट्रोल अथॉरिटी ने बताया कि यह फर्म फर्जी है, लेकिन इस फर्म के नाम से एक 25 लाख रुपए का चेक जारी हुआ था। यह चेक सुशील करनानी की मोनटेक्स फार्मास्युटिकल्स फर्म को फिर से शुरू करने के नाम पर दिया था।

3. जेल के साथी के नाम से फर्म बनाई

सुशील जब जेल में रहा था तब उसकी दोस्ती जयपुर के मालवीय नगर निवासी शशि भारती पुत्र समा भारती से हुई थी। दोनों जेल में साथ रहते थे। जब जेल से बाहर आए तो सुशील ने शशि भारती के नाम से रमैया इंटरप्राइजेज दुकान नंबर 135, कालावाड़ रोड, तिरुपति विहार गोविंदपुरा, जयपुर नाम से फर्म बनाई।

पैसों के ट्रांजेक्शन के लिए उसने शशि भारती का आंध्रा बैंक में खाता खुलवाया। पूरे राजस्थान में सबसे ज्यादा इसी फर्म के नाम से दवाइयां सप्लाई करता था।
पैसों के ट्रांजेक्शन के लिए उसने शशि भारती का आंध्रा बैंक में खाता खुलवाया। पूरे राजस्थान में सबसे ज्यादा इसी फर्म के नाम से दवाइयां सप्लाई करता था।

पुलिस जब भी नशीली दवाइयां पकड़ती तो सप्लायर में रमैया एंटरप्राइजेज का ही नाम आता था। पुलिस के पास एक दर्जन से ज्यादा दर्ज मामलों में इसी फर्म का नाम टॉप लिस्ट पर है।

4. ड्राइवर के नाम से फर्म बनाई

सुशील ने अपने ड्राइवर झुंझुनूं निवासी बाबूलाल सैनी पुत्र हीरालाल सैनी के नाम से मोनटेक्स फार्मास्युटिकल्स, दिल्ली रोड, गुड़गांव के नाम से फर्म बनाई। इस फर्म का लाइसेंस नंबर HR-661158-OW/H है। इसमें सुशील की 51 प्रतिशत और बाबूलाल सैनी की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। पार्टनरशिप का कांट्रैक्ट 30 अगस्त 2020 को तैयार हुआ। इसके लिए सुशील ने अपने पेटीएम से 19 लाख रुपए और चेक से 26 लाख रुपए दिए। इस फर्म का इस्तेमाल ज्यादातर ट्रांजेक्शन के लिए होने लगा।

5. मजदूर महिला के नाम से भी खड़ी कर दी कंपनी

सुशील ने बायोमेक्सचर फार्मास्युटिकल्स, हाउस नंबर-226 सुपर मार्केट, दीमापुर, नागालैंड के नाम से फर्जी फर्म बनाई। इस फर्म की मालिक खेलेखानो लिथु पुत्र वारहेल लिथु, ओल्ड मिनिस्टर हिल कॉलोनी, कोहिमा, सदर कोहिमा, नागालैंड को बनाया। जांच करने गई टीम वहां पहुंची तो पता लगा कि जिस महिला के नाम से फर्म बनाई गई वह मजदूरी करती थी।

6. इन दो फर्मों से आज भी नशीली दवाइयां सप्लाई हो रहीं

सुशील ने पेसिफिक फार्मास्युटिकल और बायोमेक्चर फार्मास्युटिकल्स (एक ही नाम की दूसरी फर्म) नाम से दो फर्म बनाई। इनमें पेसिफिक फार्मास्युटिकल्स बीकानेर के प्रशांत पारीक नाम से बनाई। आज सबसे ज्यादा ड्रग सप्लाई इन्ही दो फर्मों से होती है।

ड्रग के इस रैकेट को पूरे राजस्थान में चलाने के लिए सुशील ने अपने पुराने दोस्तों को साथ मिलाया। फिर उनकी बदौलत राजस्थान के 33 जिलों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में नशीली दवाइयों को बेचने का नेटवर्क खड़ा किया।

कॉलेज के साथी को पार्टनर बनाया

ड्रग माफिया सुशील करनानी कॉलेज की पढ़ाई के समय जोधपुर रहा था। वहां उसकी दोस्ती कमलदीप मौर्य पुत्र पूनाराम मौर्य से हुई थी। नागौर के गोटन निवासी कमलदीप मौर्य भी मेडिकल की दुकान पर काम करता था। इसके बाद दोनों ने पार्टनरशिप में ड्रग सप्लाई का नेटवर्क पूरे राजस्थान में बनाने का प्लान बनाया।

  • कमलदीप मौर्य को जोधपुर, अजमेर, कोटा, उदयपुर, बाड़मेर, जैसलमेर जिले सौंपे गए।
  • कमलदीप ने अपने अंडर में आए हर जिले में मेडिकल स्टोर संचालकों से संपर्क किया और नशीली दवाइयां सप्लाई करने लगा।
  • सुशील के बताए अनुसार कमलदीप मौर्य ने भी मजदूरों और ड्राइवरों के नाम पर फर्जी फर्में बनानी शुरू कर दी।

नौकर की हत्या करवाई

कमलदीप मौर्य ने अपने नेटवर्क में धीरज खंडेलवाल को साथ मिलाया। फिर धीरज खंडेलवाल की मेडिकल शॉप महादेव फार्मा पर काम करने वाले मनीष परिहार और बंटी चौधरी के नाम पर दो फर्में बनाईं।

  • जयपुर के मनीष परिहार के नाम पर यूनिवर्सल डिस्ट्रीब्यूटर्स फर्म और भरतपुर के कुम्हेर निवासी बंटी चौधरी के नाम पर मैसर्स राजस्थान ट्रेडर्स नाम पर होलसेल फर्म बनाई।
  • इन दोनों ही फर्मों से कुलदीप मौर्य ने हनुमानगढ, श्रीगंगानगर, भरतपुर जिलों के साथ-साथ राजस्थान बॉर्डर से सटे उत्तर प्रदेश के कई जिलों में नशीली दवाइयां सप्लाई करना शुरू कर दिया।
  • सीएनबी (केन्द्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो) को इसकी भनक लग गई और 30 जनवरी 2020 को जयपुर ऑफिस में रेड की गई।
  • कमलदीप मौर्य और धीरज खंडेलवाल ने पकड़े जाने के डर से अपने नौकर बंटी चौधरी की उसके ही बुआ के लड़के को सुपारी देकर हत्या करवा दी।
कुम्हेर पुलिस की गिरफ्त में ड्रग डीलर धीरज खंडेलवाल और कमलदीप मौर्य, दोनों को 6 महीने पहले बंटी चौधरी मर्डर केस में गिरफ्तार कर लिया गया।
कुम्हेर पुलिस की गिरफ्त में ड्रग डीलर धीरज खंडेलवाल और कमलदीप मौर्य, दोनों को 6 महीने पहले बंटी चौधरी मर्डर केस में गिरफ्तार कर लिया गया।

6 साल में कमाई बेशुमार दौलत, आठ शहरों में करोड़ों के मकान

सुशील करनानी ने महज 6 सालों में राजस्थान और उत्तरप्रदेश में नशीली दवाइयां सप्लाई का नेटवर्क खड़ा किया। उसके जाल में फंसे सैकड़ों युवा और मेडिकल स्टोर संचालक नशा बेचते हुए पकड़े गए। लाखों युवा नशे की जद में आए। लेकिन खुद सुशील बेशुमार दौलत का मालिक बनता गया। उसने करोड़ों रुपए कमाए और ऐशो-आसाम के लिए कई जगह संपत्तियां खरीदीं।

असम के जोरहट जिले में एक फार्म हाउस, नागालैंड के दीमापुर में फार्म हाउस, असम में मकान, नागालैंड में मकान, जोधपुर के चौपासनी हाउसिंग बोर्ड में मकान और प्लॉट, जयपुर के कालवाड़ रोड पर एक घर, दो प्लॉट, दिल्ली में फ्लैट ले रखे हैं।

सुशील सोशल मीडिया पर एक्टिव नहीं रहता। राजस्थान में 27 से ज्यादा दर्ज मामलों में उसका नाम आ रखा है। लेकिन 2020 से ही वह फरार है। उसके असम, नागालैंड और राजस्थान में अलग-अलग ठिकाने होने के कारण टीम उसे अभी तक गिरफ्तार नहीं कर पाई।

सुशील करनानी के ड्रग नेटवर्क के 2 खास गुर्गे

गुर्गा नंबर-1 कमलदीप मौर्य

कमलदीप मौर्य भी सुशील करनानी की तरह हिडन लाइफ जीता है, वह सोशल मीडिया पर एक्टिव नहीं रहता। नागौर के गोटन में जहां मौर्य का मकान है, वहां आस-पड़ोस में भी उसका कम ही आना जाना है। लेकिन नशे की दलाली से हुई कमाई पर करोड़पति बन चुका है।

एसओजी की एडिशनल एसपी दिव्या मित्तल 16 करोड़ की नशीली दवाइयों के प्रकरण की जांच कर रही थी। उसमें कमलदीप मौर्य भी आरोपी है।

कमलदीप मौर्य ने अपने नौकर बंटी चौधरी के नाम से फर्जी फर्म बनाई और बाद में पकड़े जाने के डर से उसकी हत्या करवा दी। इसी मामले में भरतपुर जिले की कुम्हेर थाना पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

गुर्गा नंबर-2 श्याम सुंदर मूंदड़ा

दिखावे के लिए समाज सेवा, भाई को मिनिस्टर ने सम्मानित किया

ड्रग माफिया सुशील करनानी और कमलदीप मौर्य ने अजमेर में नशीली दवाइयों की सप्लाई का पूरा काम अजमेर के ही श्याम सुंदर मूंदड़ा को दे रखा था। श्याम सुंदर मूंदड़ा की रेलवे स्टेशन रोड पर विमल मार्केट में विनायक मेडिकल स्टोर है। इसे वह अपने भाई के साथ मिलकर चलाता था।

प्रतिबंधित नशीली दवाओं की तस्करी का अजमेर को ट्रांजिट पाइंट बनाने वाले कारोबारी श्याम सुंदर मूंदड़ा। पुलिस ने आरोपी को मेड़ता के एक होटल से गिरफ्तार किया था।
प्रतिबंधित नशीली दवाओं की तस्करी का अजमेर को ट्रांजिट पाइंट बनाने वाले कारोबारी श्याम सुंदर मूंदड़ा। पुलिस ने आरोपी को मेड़ता के एक होटल से गिरफ्तार किया था।

समाज में अपनी अच्छी इमेज बनाने के लिए श्याम सुंदर गरीब और असहाय लोगों को निशुल्क दवाइयां बांटता था। शहर के मंदिर में पानी की व्यवस्था, पौधरोपण जैसे कई समाज सेवा के कार्य करता था। 26 जनवरी 2020 को जिला स्तरीय सरकारी समारोह में जिला प्रशासन की अनुशंसा पर पूर्व चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा ने श्याम मूंदड़ा के भाई कमल किशोर मूंदड़ा को सेवा कार्य के लिए सम्मानित भी किया था।

ई-रिक्शा ड्राइवरों से दवाइयां सप्लाई करवाता था

श्याम सुंदर मूंदड़ा अजमेर और पुष्कर में मेडिकल दुकानों पर नशीली दवाइयों की सप्लाई ई-रिक्शा ड्राइवरों से करवाता था। रोजाना पांच सौ रुपए कमाने वाले ई-रिक्शा ड्राइवरों को मूंदड़ा एक से दो हजार रुपए देता था। ई-रिक्शा ड्राइवरों को भी पता नहीं होता था कि वे प्रतिबंधित नशीली दवाइयों की सप्लाई कर रहे हैं।

3 दिन में पकड़ी गई 16 करोड़ की नशीली दवाइयां

  • 23 मई 2021 को जयपुर की विश्वकर्मा थाना पुलिस ने ट्रांसपोर्ट कंपनी के पास टैंपो पकड़ा और मोहम्मद ताहिर को गिरफ्तार किया गया। इसमें करीब 5 करोड़ की दवाइयां थीं।
  • 24 मई 2021 को अजमेर के रामगंज के ट्रांसपोर्ट नगर स्थित एक गोदाम में छापेमारी कर 114 कार्टन नशीली दवाएं बरामद की। इसकी कीमत 5.5 करोड़ रुपए बताई गई थी।
  • फिर 1 जून 2021 को अजमेर की ही रामगंज व अलवर गेट थाना पुलिस ने करीब 5 करोड़ 53 लाख रुपए कीमत की अवैध दवाओं के 110 कार्टन बरामद किए। इसमें 35 लाख टेबलेट, इंजेक्शन और सिरप थे।
ड्रग माफिया सुशील करनानी का सहयोगी अजमेर का श्याम सुंदर मूंदड़ा की वो शॉप जहां से पुलिस ने 11 करोड़ की नशीली दवाइयां पकड़ी थी।
ड्रग माफिया सुशील करनानी का सहयोगी अजमेर का श्याम सुंदर मूंदड़ा की वो शॉप जहां से पुलिस ने 11 करोड़ की नशीली दवाइयां पकड़ी थी।

इस कार्रवाई के बाद पुलिस ने श्यामसुंदर मूंदड़ा और उसके साथियों को तो गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन आज भी सुशील करनानी SOG और पुलिस की पकड़ से दूर है। जबकि उसकी फर्मों से नशे की सप्लाई जारी है।

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