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डायबिटीज पीड़ितों को राहत:चिप शरीर में इंसुलिन की मात्रा बताएगी, पंप उतनी ही इंसुलिन देगा... प्रदेश में पहली बार 16 लोगों को लगाया इक्विपमेंट

जयपुरएक महीने पहलेलेखक: संदीप शर्मा
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सीजीएम व इंसुलिन पंप की कनेक्टिविटी से डवलप किया इक्विपमेंट - Dainik Bhaskar
सीजीएम व इंसुलिन पंप की कनेक्टिविटी से डवलप किया इक्विपमेंट

डायबिटीज पीड़ित लोगों के राहत की खबर है। प्रदेश में पहली बार 16 लोगों को आर्टिफिशियल पेनक्रियाज इक्विपमेंट लगाया गया है। पिछले 17 दिन में लगाए गए इस इक्विपमेंट के बाद लोगों को इंसुलिन कम-ज्यादा होने और इंसुलिन को इंजेक्ट करने से छुटकारा मिला है। ऐसा कंटीन्यूस ग्लूकोज मॉनिटरिंग (सीजीएम) और इंसुलिन पंप के बीच कनेक्टिविटी करने से संभव हो पाया है।

हालांकि सीजीएम और इंसुलिन पंप पिछले एक दशक से उपयोग में लाए जा रहे हैं लेकिन दोनों एक साथ काम करें और शरीर को उसी समय पर्याप्त इंसुलिन मिल सके, इस पर शोध चल रहा था। इक्विपमेंट अभी महंगा (करीब 5 लाख रुपए) होने के कारण सभी नहीं लगा पाएंगे लेकिन इस दिशा में कई कंपनियां काम कर रही हैं।

संभावना है कि नवम्बर तक कई कंपनियां इस तरह का प्रोडक्ट बाजार में ले आएंगी। बता दें कि डायबिटीज के मरीजों को रोजाना दिन में एक से दो बार इंसुलिन के उपयोग के लिए शरीर में पंक्चर (छोटा छेद) करना होता है। इस उपकरण से शरीर को जरूरत के अनुसार इंसुलिन मिल सकेगा।

दवा भूलने और विकट परिस्थितियों में भी शरीर को इंसुलिन की पूर्ति होती रहेगी।
सप्ताह में एक ही बार इंसुलिन देने पर भी शोध : यह शोध भी चल रहा है कि सप्ताह में एक बार ही इंसुलिन दिया जाए और वह पर्याप्त होे। यानी कितनी शुगर पर कितना इंसुलिन और किन तरीकों से दिया जाए, इस पर कई देश और कंपनियां काम कर रही हैं। इस साल के अंत तक इस तरह की दवा और उपकरण भी बाजार में आने की उम्मीद है।

अब तक का ट्रायल मंजूर, यूएसएफडीए से एक-डेढ़ माह में एप्रुवल मिलने की उम्मीद
अभी तक डायबिटीज के मरीजों को इंसुलिन पंप और सीजीएम (कंटीन्यूस ग्लूकोज मॉनिटरिंग) से ही बार-बार इंसुलिन लेना पड़ता था। अब दोनों की कनेक्टिविटी कर आर्टिफिशियल पेनक्रियाज क्रिएट किया गया है। यानी सेंसर चिप से शरीर में इंसुलिन की मात्रा बताएगा और इंसुलिन पंप उतनी ही मात्रा में शरीर में इंसुलिन दे देगा। अभी तक चल रहे ट्रायल को मंजूरी मिली है और राजस्थान में भी यह 16 लोगों को लगाया गया है। कंपनी के आर्टिफिशियल पेनक्रियाज इक्विपमेंट को यूएसएफडीए से एक-डेढ़ माह में एप्रुवल मिलने की उम्मीद है।

फिर डायबिटीज के लोगों को बार-बार इंसुलिन लगाने से निजात मिल सकेगी। वहीं एसएमएस अस्पताल भी पिछले वर्षों से सीजीएम और इंसुलिन पंप का उपयोग कर रहा है और यूएसएफडीए से एप्रुवल मिलने के साथ ही अस्पताल में भी यह लगाना शुरू होगा।

  • सीजीएम और इंसुलिन पंप मिलकर ऐसा काम करें कि शरीर को जरूरत पड़ते ही इंसुलिन मिल सके, इस पर लंबे समय से काम हो रहा है। अभी कुछ लोगों को लगाया है, काफी हद तक वे गुड फील भी कर रहे हैं। यूएसएफडीए से एप्रुवल मिलने पर लोगों को राहत मिलेगी। कई कंपनियों के आने से कीमतों में भी कमी होगी। - डॉ. पुनीत सक्सेना, सीनियर प्रोफेसर, मेडिसिन, एसएमएस
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