जयपुर में बीआरटीएस कॉरिडोर पर बुल्डोजर चलाने की तैयारी:डीपीआर बनाने वाली कंपनी सरकार को बताएगी, यह काम का है या नहीं

जयपुर3 महीने पहले

जयपुर में करीब 7 साल से धूल खा रहे बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टस (बीआरटीएस) कॉरिडोर को अब सरकार हटाने की तैयारी कर रही है। दो चरणों में बनकर तैयार हुए इस कॉरिडोर को हटाने से पहले सरकार इसकी उपयोगिता और फायदे को लेकर एक स्टडी करवाएगी। खास बात ये है कि ये स्टडी और कोई नहीं बल्कि वहीं कंपनी कर रही है, जिसने इसकी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनाई थी और उसके अनुसार ही जेडीए ने इस प्रोजेक्ट को तैयार किया था। नगरीय विकास विभाग (यूडीएच) ने पिछले महीने जेडीए को लैटर लिखकर इस प्रोजेक्ट की उपयोगिता की स्टडी करवाने के लिए कहा है। ये स्टडी भी डीपीआर बनाने वाली कंपनी पीडी कोर से करवाने के लिए कहा है। ऐसे में सवाल खड़े होते है कि क्या कंपनी अपने ही प्रोजेक्ट की स्टडी करने के बाद उसे फेल बताएगी? क्योंकि अगर कंपनी इसकी उपयोगिता को फेल बताती है तो इतना तय है कि इसकी डीपीआर बनाने से पहले कंपनी ने उस समय इसके भविष्य की उपयोगिता को लेकर कोई आंकलन या स्टडी नहीं की होगी। कंपनी को अपनी इस रिपोर्ट को 60 दिन में तैयार करके देना है।

सीएसआईआर की रिपोर्ट के आधार पर हटाया था दिल्ली में कॉरिडोर
विशेषज्ञों की माने तो दिल्ली में जब केजरीवाल सरकार ने जेबी टीटो मार्ग से बीआरटीएस कॉरिडोर को हटवाया था। करीब 5.8KM के इस कॉरिडोर को हटाने से पहले सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीएसआईआर) से एक स्टडी करवाई थी। सीएसआईआर ने इसे हटाने के लिए ही सरकार को सिफारिश की थी, जिसका मुख्य आधार इस कॉरिडोर के बनने से यहां लगने वाले एक्स्ट्रा ट्रेवल टाइम को माना था। वहीं कुछ साल पहले भाेपाल में भी जब शिवराज सिंह सरकार ने भोपाल में बने कॉरिडोर को हटाने की तैयारी की थी, तब इसी संस्थान से स्टडी करवाई थी। हालांकि इस स्टडी में कंपनी ने भोपाल से कॉरिडोर हटाने से मना कर दिया था।

150 करोड़ रुपए में बनकर हुआ है तैयार
जयपुर में 4 पैकेज में इस प्रोजेक्ट के तहत कॉरिडोर विकसित करने थे। सरकार ने साल 2007 में इसका काम शुरू करवाया और तब से अब तक केवल 2 ही कॉरिडोर बनाए हैं। एक सीकर रोड और दूसरा अजमेर रोड से न्यू सांगानेर रोड मानसरोवर। इस प्रोजेक्ट पर करीब 150 करोड़ रुपए सरकार ने खर्च किए थे, जिसमें 50 फीसदी राशि केन्द्र सरकार, 20 फीसदी राज्य सरकार और 30 फीसदी जेडीए ने लगाई थी। सीकर रोड पर बने कॉरिडोर का उद्घाटन साल 2010 में यूपीए सरकार के समय अशोक गहलोत ने किया था, जबकि न्यू सांगानेर रोड कॉरिडोर को साल 2015 में एनडीए सरकार के समय वसुंधरा राजे ने किया था।