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मप्र में सिंधिया काे ताकत मिलने का असर यहां तक:विधायकों काे फिर खरीदने की काेशिश, सीएम गहलोत के पास पहुंची शिकायत

जयपुरएक महीने पहले
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राजस्थान में राज्यसभा चुनाव के दौरान उठी विधायकों की खरीद-फराेख्त की चिंगारी अब 22 दिन बाद फिर भड़कने लगी है। बताया जा रहा है कि जिन निर्दलीय व कांग्रेस विधायकों को राज्यसभा चुनाव में 25 करोड़ रु. तक का ऑफर दिया गया है, उन्हीं से अब दोबारा संपर्क हो रहा है। इस संबंध में कुछ विधायकों ने दो दिन पहले सीएम अशोक गहलोत से फिर शिकायत की है।

विधायकों की खरीद-फरोख्त के पीछे बड़ा कारण मध्यप्रदेश में हाल ही कैबिनेट में हुए बदलाव को माना जा रहा है। इसमें कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए ज्योतिरादारित्य सिंधिया खेमे के 9 विधायकों सहित कुल 12 पूर्व कांग्रेसी विधायकों को मंत्री बनाया गया। इससे 34 सदस्यीय मंत्रिमंडल में 11 सिंधिया समर्थक हो गए, यानी दखल 32% हो गया। मैसेज यह भी गया कि कांग्रेस छोड़कर आ रहे विधायकों को भाजपा में सम्मानजनक जगह दी जा रही है।

अब राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को मिली शिकायतों में कहा गया है कि विधायकों को फिर से प्रलोभन देने की कोशिशें की जा रही हैं। उनसे यह भी कहा गया है कि यदि वे ‘जोखिम’ उठाते हैं तो चुनाव लड़ने में भाजपा और आरएलपी उनकी मदद करेगी।

बता दें कि राजस्थान में राज्यसभा चुनाव के दाैरान कांग्रेस ने बाड़ाबंदी और प्रदेश की सीमाएं सील कर सियासी उठापटक को काबू में कर लिया गया था लेकिन अब खरीद फरोख्त की नई शिकायतें बता रही हैं कि यहां अभी सब कुछ ठीक नहीं और नए सिरे से फिर से कोशिशें शुरू हो गई हैं। हालांकि, राजस्थान का जैसा सियासी मिजाज है, उसकाे देखते हुए यहां एमपी-कर्नाटक जैसी उठापटक की गुंजाइश कम है।

बसपा के सभी छह विधायक कांग्रेस में आए लेकिन उनके आने पर किसी को हैरत नहीं हुई क्योंकि उनमें से ज्यादातर की पृष्ठभूमि कांग्रेस की ही थी। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सियासी कद, राजनैतिक अनुभव-लोकप्रियता को देखते हुए कांग्रेस के भीतर इस तरह का जोखिम शायद फिलहाल कोई न उठाए। दूसरी और प्रदेश में कोरोना का भी प्रकोप है और ऐसी स्थिति में अदला-बदली का जोखिम विधायकों के हित में भी नहीं होगा।

विधायकों ने कहा क्षेत्र में जाना मुश्किल हो गया

खरीद-फरोख्त की शिकायत करने गए विधायकों ने सीएम से कहा कि इस तरह के आरोपों ने उन्हें अपने क्षेत्र में बदनाम कर दिया है। कई विधायकों ने कहा कि जब वे अपने क्षेत्र में जाते हैं तो लोग उन्हें कहते हैं कि आपके लिए तो 25 करोड़ की बोली लग गई। उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से उनकी छवि पर असर पढ़ रहा है।

राजस्थान में क्यों देखी जा रही सियासी तोड़फोड़ की संभावना, जानिए 4 कारण

  • मध्यप्रदेश में भाजपा में शामिल होने के बाद सिंधिया को लेकर माना गया कि वे कमजोर हो गए। लेकिन हाल ही हुए मंत्रिमंडल फेरबदल में उनके 9 समर्थक मंत्री बने। खुद सिंधिया भी भाजपा से राज्यसभा सांसद बन गए हैं।
  • कांग्रेस, कुछ निर्दलीय व भाजपा में विधायकों का बड़ा वर्ग है जो उम्र के चलते राजनीति के अंतिम पड़ाव पर है। इनमें से कुछ चाहते हैं कि ‘कुछ जोखिम’ उठा लिया जाए। मध्यप्रदेश में भी यही हुआ।
  • राजस्थान में भाजपा का एक धड़ा अपनी लीडरशिप स्थापित करना चाहता है। यह धड़ा चाहता है कि मध्यप्रदेश की तर्ज पर यहां भी उठापटक हो जाए तो उनकी लीडरशिप स्थापित हो जाए।
  • राजस्थान में सत्ता और संगठन के दो ध्रुव होने से भी इन अटकलों को और हवा मिल रही है।
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