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राजस्थान कांग्रेस में सिर्फ डोटासरा और 39 पदाधिकारी:16 जुलाई 2020 से किसी भी जिले में न जिलाध्यक्ष और न ब्लाक अध्यक्ष; गहलोत-पायलट की खींचतान के कारण राज्य में खड़ा नहीं हो पा रहा संगठन

जयपुर6 महीने पहले
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अशोक गहलोत और सचिन पायलट (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
अशोक गहलोत और सचिन पायलट (फाइल फोटो)

राहुल गांधी के अध्यक्ष पद से इस्तीफे के बाद कांग्रेस अपना अध्यक्ष नहीं खोज पाई है। सोनिया गांधी अंतरिम अध्यक्ष के तौर पर पार्टी की कमान संभाले हुए हैं। अध्यक्ष का संकट सिर्फ पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व में ही नहीं, बल्कि राजस्थान के सभी जिलों का भी है। सभी जिले और ब्लाॅक की कार्यकारिणी 10 महीने से भंग हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट में खींचतान की वजह से कांग्रेस में 16 जुलाई 2020 से जिलाध्यक्ष, ब्लॉक अध्यक्ष, जिला और ब्लॉक कार्यकारिणी नहीं है।

कांग्रेस में कई बार बड़े नेता जल्द संगठन विस्तार का दावा कर चुके हैं, लेकिन हर बार डेडलाइन निकल जाती है। जनवरी में प्रदेश प्रभारी अजय माकन ने जल्द जिला और ब्लॉक कार्यकारिणी बनाने की बात कही थी ले​किन बीच में विधानसभा का बजट सत्र आने का तर्क देकर मामले का टाल दिया गया। इसके बाद उपचुनावों के कारण मामला टल गया। अभी कोरोना की दूसरी लहर का तर्क देकर मामले को आगे खिसका दिया है।

अभी पूरे राजस्थान में कांग्रेस के अध्यक्ष सहित केवल 40 पदाधिकारी

पिछले साल जुलाई में सचिन पायलट खेमे की बगावत के समय 15 जुलाई 2020 को कांग्रेस की प्रदेश से लेकर जिला-ब्लॉक तक टॉप टू बॉटम सभी कार्यकारिणी भंग कर दी गई थीं। छह महीने तक तो कांग्रेस में प्रदेशाध्यक्ष ही अकेले पदाधिकारी रहे। 6 जनवरी को 39 पदाधिकारियों की प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा की गई, जिसमें 7 उपाध्यक्ष, 8 महासचिव और 24 सचिव बनाए गए। अभी प्रदेश की पूरी कांग्रेस 40 पदाधिकारियों के भरोसे चल रही है। कांग्रेस में 39 जिलाध्यक्ष और जिला कार्यकारिणी, 400 ब्लॉक अध्यक्ष और ब्लॉक कार्यकारिणी का गठन होना है।

पायलट खेमा सत्ता-संगठन में पर्याप्त भागीदारी पर अड़ा

कांग्रेस में सचिन पायलट खेमे से सुलह भले ही हो गई हो लेकिन दोनों खेमों के बीच कोल्ड वॉर जारी है। सचिन पायलट खेमा सरकार से लेकर संगठन तक अपनी पर्याप्त भागीदारी पर अड़ा है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खेमा भी अपनी जगह अड़ा है, इसकी वजह से राजनीतिक नियुक्तियों से लेकर जिला-ब्लॉक स्तर के संगठन में नियुक्तियों पर ही ब्रेक लगा हुआ है।

गहलोत-पायलट खेमे में अब भी टकराव बरकरार

सचिन पायलट खेमे के विधायक और नेता आक्रामकता से अपनी मांगें उठा रहे हैं। विधानसभा के बजट सत्र के दौरान पायलट खेमे के विधायकों ने सरकार की खामियों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। हाल ही वरिष्ठ विधायक हेमाराम चौधरी ने अपने इलाके के विकास से भेदभाव का मुद्दा उठाते हुए इस्तीफा दे चुके हैं, हालांकि हेमाराम के तेवर अब कुछ नरम हैं। पायलट खेमे के विधायक वेदप्रकाश सोलंकी भी तल्ख अंदाज में खुलकर संगठन स्तर की ​नियुथ्क्तयों में देरी पर सवाल उठा चुके हैं।

डोटासरा बोले, संगठनात्मक और राजनीतिक नियुक्तियों पर काम चल रहा है, कुछ वक्त तो लगता ही है

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भास्कर से कहा, जिला-ब्लॉक अध्यक्षों और राजनीतिक नियुक्तियों पर काम चल रहा है। संगठन स्तर पर इसकी कवायद चल रही है, सबकी राय से काम होगा। इसमें थोड़ा समय तो लगता है लेकिन कोरोना कम होते ही जिला, ब्लॉक स्तर पर संगठन और राजनीतिक नियुक्तियां दोनों का काम पूरा कर लिया जाएगा।

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