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रेमडेसिविर की कालाबाजारी:डॉक्टर ने गैंग के साथ मिलकर जयपुर में बेचे 1000 नकली इंजेक्शन, सेंट्रल लैब की जांच रिपोर्ट में खुलासा; अब तक चार गिरफ्तार

जयपुर3 महीने पहले
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रेमडेसिविर की कालाबाजारी के आरोप में डॉ. जितेश को 21 मई को गिरफ्तार किया गया था। - Dainik Bhaskar
रेमडेसिविर की कालाबाजारी के आरोप में डॉ. जितेश को 21 मई को गिरफ्तार किया गया था।

कोरोना महामारी में रेमडेसिविर इंजेक्शन की काला बाजारी करने वाले फरीदाबाद के डॉ. जितेश अरोड़ा और उसकी गैंग का जयपुर में एक और काला कारनामा सामने आया है। इस गैंग ने कोरोना मरीजों के उपचार के लिए 1000 से ज्यादा रेमडेसिविर इंजेक्शन कोरोना मरीजों के उपचार के लिए बेचे थे। ये सभी नकली थे। यह खुलासा जयपुर में सेठी कॉलोनी स्थित ड्रग डिपार्टमेंट की सेंट्रल लैब ने अपनी जांच रिपोर्ट में किया है।

रिपोर्ट में दावा है कि कोतवाली थाना पुलिस ने कालाबाजारी करने वाली गैंग सदस्य रामावतार यादव के कब्जे से जो रेमडेसिविर इंजेक्शन बरामद किया था। उसे सेंट्रल लैब में टेस्टिंग के लिए भेजा गया था। सामने आया कि इंजेक्शन में रेमडेसिविर दवा नहीं पाई गई है। रिपोर्ट आने के बाद कोतवाली थाना पुलिस ने बुधवार को पहले से दर्ज मुकदमे में ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट की धारा 27 ए भी जोड़ दी है। इसमें 10 साल की सजा प्रावधान है। फिलहाल तीनों आरोपी जयपुर जेल में हैं।

अप्रैल में पकड़ा गया था पहला आरोपी और 21 मई को गैंग का सरगना डॉक्टर
कोतवाली थानाप्रभारी विक्रम सिंह ने बताया कि जांच में जो रेमडेसिविर इंजेक्शन नकली पाया गया है। वह अप्रैल में सबसे पहले चौड़ा रास्ता से गिरफ्तार रामावतार यादव से जब्त किया गया था। पूछताछ में रामावतार ने बताया था कि उसे यह इंजेक्शन जयपुर में श्याम मित्र मंडल नगर मुरलीपुरा के रहने वाले शंकर सैनी की मदद से मिले थे। तब शंकर सैनी को गिरफ्तार कर पूछताछ की गई तो उसने बताया कि करीब 750 इंजेक्शन गैंग के सरगना डॉक्टर जितेश अरोड़ा (27) से लिए थे।

इसके बाद 21 मई को कोतवाली पुलिस ने हरियाणा में फरीदाबाद स्थित एमजीएम नगर के रहने वाले डॉक्टर जितेश अरोड़ा को गिरफ्तार किया। वह रामावतार और शंकर सैनी के पकड़े जाने पर फरार हो गया था। वह पुलिस से बचने के लिए मोबाइल बंद रखने लगा। अपनी लोकेश बदलने लगा था। लेकिन, पुलिस से बच नहीं सका था।

पुलिस को अंदेशा: जयपुर में बेचे गए सभी 1000 इंजेक्शन नकली थे
सेंट्रल लैब की रिपोर्ट में रेमडेसिविर इंजेक्शन के नकली होने के खुलासे के बाद पुलिस का दावा है कि डॉ. जितेश अरोड़ा ने शंकर सैनी और रामातवार के माध्यम से जिन 1000 इंजेक्शन को जयपुर में बेचा। वे सभी नकली थे। एडिशनल डीसीपी धर्मेंद्र सागर ने बताया कि पुलिस पड़ताल में और भी नाम सामने आए है। ऐसे में नकली इंजेक्शन बेचने और रेमडेसिविर की कालाबाजारी करने के मामले को पुलिस गंभीरता से ले रही है। अब इस पूरे मामले में और भी गिरफ्तारी होना संभव है।

21 अप्रेल को पकड़ा गया था दवा विक्रेता और दो अन्य कर्मचारी
एडिशनल डीसीपी धर्मेंद्र सागर के मुताबिक गत 21 अप्रेल को कोतवाली थाना पुलिस ने चौड़ा रास्ता स्थित फिल्म कॉलोनी दवा बाजार में मयूर टावर में दक्ष डिस्ट्रीब्यूटर के मालिक रामावतार यादव को महंगे दामों पर रेमडेसिविर की कालाबाजारी करते हुए गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद गिरोह के अन्य सदस्य शंकर दयाल सैनी व विक्रम सिंह गुर्जर को भी गिरफ्तार किया गया था। फिर डॉक्टर जितेश गिरफ्तार हुआ। अभी ये चारों आरोपी जयपुर जेल में बंद चल रहे है। अब पुलिस टीम फिर से राजस्थान के बाहर कार्रवाई के लिए भेजी जाएगी।

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