जयपुर के पूर्व राजपरिवार की संपत्ति पर कब्जा:सिटी पैलेस के बाहर नगाड़ा बजाने वाले ने रिटायरमेंट के बाद भी नहीं छोड़ा कब्जा, फर्जी दस्तावेजों के सहारे बिजली-पानी कनेक्शन भी लिए

जयपुर6 महीने पहले
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प्रतीकात्मक तस्वीर - Dainik Bhaskar
प्रतीकात्मक तस्वीर

जयपुर के पूर्व राजपरिवार की संपत्ति पर कब्जा किए जाने का मामला सामने आया है। नगाड़ा बजाने वाले ने सिटी पैलेस के बाहर मिले कमरों पर कब्जा कर बिजली और पानी के कनेक्शन भी ले लिए हैं। माणक चौक थाने में प्रमोद यादव पुत्र श्यामसुंदर यादव निवासी महाराजा सवाईमानसिंह द्वितीय म्यूजियम ट्रस्ट सिटी पैलेस जयपुर की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया है। मामले की जांच एएसआई ग्यारसीलाल को दी गई है। उन्होंने रिपोर्ट में बताया जलेबी चौक के पास लगी सिरही डयोड़ी है। बड़े दरवाजे एवं सिटी पैलेस के दरवाजे पर गणेशजी और अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित हैं। पहले यहीं से राजपरिवार की एंट्री होती थी। इसी एंट्रीगेट पर नगाड़े बजाने वालों को रखा जाता था। नगाड़े बजाने वालों को रहने के लिए कमरे भी यहीं दिए जाते थे। रिटायरमेंट होने तक उन्हें इसी जगह पर रहने की अनुमति रहती थी।

उन्होंने बताया कि ट्रस्ट ने पुरानी नीति के अनुसार नगाड़ा बजाने के लिए कर्मचारी अब्दुल सलाम पुत्र चांद खां को रखा था। राजशाही समाप्त होने के बाद भी अब्दुल सलाम को नहीं हटाया गया। 31 मई 2018 को वह रिटायर हो गया। उसने ट्रस्ट ग्रेच्युटी एवं सेवा के अन्य लाभ भी चेक के जरिए प्राप्त कर लिए थे। अब्दुल सलाम को यह संपत्ति सेवा में रहने तक के लिए दी गई थी। रिटायर होने के बाद भी अब्दुल सलाम और उसके परिवार ने कब्जा नहीं छोड़ा है। करीब 5 कमरे और वहां का काफी बड़ा हिस्सा पर कब्जा जमाए बैठे हैं।

नगर निगम और ट्रस्ट के बीच कोर्ट में मामला विचाराधीन
केंद्र सरकार एवं महाराजा मानसिंह के बीच में एग्रीमेंट हुआ था। महाराजा मानसिंह के ही कब्जे में संपत्ति रखने की बात हुई थी। महाराजा सवाई मानसिंह का स्वर्गवास 24 जून 1970 को हुआ गया। इसके बाद महाराज सवाई भवानी सिंह सिटी पैलेस एरिया की संपत्ति व जलेबी चौक की संपत्ति 30 जुलाई 1972 को ट्रस्ट में दी गई। ट्रस्ट ही संपत्ति की देखभाल कर रहा है। हालांकि उस संपत्ति को लेकर नगर निगम राज्य सरकार एवं महाराजा सवाई मान सिंह द्वितीय म्यूजियम ट्रस्ट के बीच में मुकदमेबाजी भी चल रही है।
बिजली-पानी के कनेक्शन जारी किए
प्रमोद यादव ने रिपोर्ट में बताया कि अब्दुल सलाम ने अपने भाई इस्लाम खां व मा मुन्नू बेगम के साथ मिलीभगत करके फर्जी दस्तावेज तैैयार कर लिए। ये संपत्ति महाराजा सवाई मान सिंह द्वितीय म्यूजियम ट्रस्ट की है। उसने खुद का कब्जा दिखाकर बिजली और पानी के कनेक्शन ले लिए। दोनों ही विभागों ने कनेक्शन लगाने से पहले ट्रस्ट से संपर्क भी नहीं किया। बिजली और पानी का कनेक्शन देने वाले विभाग की इस मेहरबानी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

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