फर्जी स्पोर्ट्स सर्टिफिकेट बनाने की ‘फैक्ट्री’:गिरोह ने दिव्यांग का फर्जी स्पोर्ट्स सर्टिफिकेट बना दिया, कहा- डरिए नहीं, सत्यापन भी हम ही कराते हैं

जयपुरएक वर्ष पहलेलेखक: संदीप शर्मा
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नौकरी दिलाने के लिए गिरोह राजस्थान, यूपी आदि फेडरेशन के फर्जी स्पोर्ट्स सर्टिफिकेट दे रहे हैं। - Dainik Bhaskar
नौकरी दिलाने के लिए गिरोह राजस्थान, यूपी आदि फेडरेशन के फर्जी स्पोर्ट्स सर्टिफिकेट दे रहे हैं।

भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक व नकल के मामलों के बीच भास्कर ऐसे गिराेह की परतें उधेड़कर लाया है, जिसने खेल कोटे से सरकारी नौकरी दिलाने के लिए स्टेट और नेशनल लेवल के फर्जी स्पोर्ट्स सर्टिफिकेट बनाने की ‘फैक्ट्री’ लगा रखी है। वजह- सरकारी भर्तियों में 3-5% स्पोर्ट्स कोटा तय है। इसी में नौकरी दिलाने के लिए गिरोह राजस्थान, यूपी आदि फेडरेशन के फर्जी स्पोर्ट्स सर्टिफिकेट दे रहे हैं।

सर्टिफिकेट मांगने वाला दिव्यांग हो या ऐसा व्यक्ति जिसने कभी स्पोर्ट्स न खेला हो, उसका भी यह गिरोह चंद घंटे में फर्जी स्पोर्ट्स सर्टिफिकेट बना देते हैं। इनमें कबड्डी, खो-खो, क्रिकेट के सबसे अधिक फर्जी सर्टिफिकेट हैं। यही नहीं, सरकारी तन्त्र में घुसपैठ कर सर्टिफिकेट का सत्यापन भी खुद ही करा रहे हैं। बेधड़क दावा करते हैं कि कहीं कोई दिक्कत नहीं आएगी। बल्कि नौकरी भी आसानी से मिल जाएगी।

तंत्र नींद में और ये उसे जगाने वाला खुलासा : पहली बार भास्कर पहुंचा उस ‘फैक्ट्री’ तक, जहां सरकारी नौकरी दिलाने के लिए फर्जी स्टेट, नेशनल स्पोर्ट्स सर्टिफिकेट बनते हैं; सीकर में नीम का थाना के पास गावडी मोड़ पर ठिकाना

भास्कर पहुंचा तो... गिरोह ने प्रति मेंबर 10 हजार मांगे, फिर सौदा 9500 में तय कर 2 घंटे में बना दिए प्रमाण पत्र

भास्कर रिपोर्टर सीकर के नीम का थाना के पास गावडी मोड़ पहुंचा। यहां समर स्पोर्ट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के नाम से सर्टिफिकेट बनने की सूचना मिली थी। भास्कर ने एक दिव्यांग सहित 3 डमी अभ्यर्थी बनाए। गिरोह के दीपक सैनी ने प्रति मेंबर 10,000 रु. मांगे। बाद में 9500 रु. में तैयार हो गया। एडवांस पेमेंट के बाद 2 घंटे में सर्टिफिकेट वॉट्सएप कर दिए। सहयोगी भरत व सुरेश के साथ रिपोर्टर मौके पर पहुंचे तो दीपक ने सर्टिफिकेट दे दिए। दीपक ने दावा किया- ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन भी कल हो जाएगा। रिपोर्टर ने चेक किया तो ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन हो भी गया था।

3 लोगों के 28,500 रुपए लिए, इन फेडरेशन के नाम से बनाकर दिए स्टेट और नेशनल लेवल के फर्जी सर्टिफिकेट-

1- स्टेट और नेशनल, दोनों लेवल के दिए

तनुज शर्मा के नाम फेडरेशन यूथ गेम एथलेटिक्स एसो. इंडिया की ‘चतुर्थ यूथ गेम्स नेशनल चैम्पियनशिप’ का क्रिकेट सर्टिफिकेट बनाया। फर्जीवाड़ा इस कदर कि स्टेट और नेशनल लेवल के सर्टिफिकेट बना दिए।

2- क्रिकेट के साथ फुटबॉल का भी

सुरेशकुमार के नाम से स्कूल स्पोर्ट्स एसो. ऑफ इंडिया फेडरेशन का ‘प्रथम नेशनल स्कूल स्पोर्ट्स चैंपियनशिप 2021’ फुटबाॅल सर्टिफिकेट दिया।

3- चल फिर नहीं सकता, प्रमाण पत्र बना दिया

मोहम्मद ताहिर चल-फिर नहीं सकता। कबड्डी का सर्टिफिकेट समर स्पोर्ट्स फेड. ऑफ इंडिया का ‘5वीं ओपन स्टेट समर गेम चैंपियनशिप’ का बनाकर दिया।

मेरा भाई साई में जनरल सेक्रेट्री है, हम 6 साल से ऐसे सर्टिफिकेट दे रहे हैं, 90% की नौकरी लग जाती है

गिरोह के दीपक ने बताया- हम 6 साल से सर्टिफिकेट दे रहे हैं। 90% लोगों की नौकरी लग जाती है। सत्यापन भी हम ही कराके देते हैं। केंद्र सरकार से आए लेटर दिखाते हुए उसने कहा- सत्यापन के लिए हमारे पास सैकड़ों लेटर आते हैं। हम वैरिफाई कर देते हैं। 10वीं पास तक के लिए जो भी आवेदन निकलते हैं, उनमें हमारे सर्टिफिकेट चलते हैं। आर्मी, पुलिस, फायरमैन आिद की जिन भर्तियों में भी स्पोर्ट्स कोटा होता है, उनमें काम आते हैं। हमारे पास 25,000 आवेदन आए होंगे, 1500 सर्टिफिकेट दिए हैं।

भास्कर रिपोर्टर ने पूछा- फेडरेशन से गेम खिलवा दोगे?

दीपक बोला- अक्टूबर में गोवा में फेडरेशन के टूर्नामेंट हैं, खिलवा देंगे। मेरा भाई किशन सैनी स्कूल स्पोर्ट्स एसो. ऑफ इंडिया फेडरेशन में जनरल सेक्रेट्री और यूथ गेम एथलेटिक्स एसोसिएशन इंडिया फेडरेशन में मैंबर है।

गिरोह के खुलासे से खड़े हुए ये गंभीर सवाल

  • गिरोह 1500 सर्टिफिकेट दे चुका। इनमें से 90% को नौकरी मिलने का दावा कर रहा है। क्या पुलिस-सेना भर्तियां फर्जी सर्टिफिकेट के जरिए हुई?
  • वेरिफिकेशन उसी गिरोह से कराया जा रहा है, जो सर्टिफिकेट दे रहा है, क्या इस गिरोह के जनक फेडरेशनों और सरकार में ही बैठे कुछ लोग हैं?