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इस नवरात्रि भी कोरोना का खतरा:आमेर, मेहरानगढ़, समेत कई मंदिर आज से श्रद्धालुओं के लिए बंद, कैला माता-जीण माता मंदिर खुले रहेंगे; गरबा और जगराता भी नहीं होगा

जयपुर2 महीने पहले
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आमेर महल स्थित शिला माता। - Dainik Bhaskar
आमेर महल स्थित शिला माता।

प्रदेश में कोरोना के केस कंट्रोल में आ गए हैं, लेकिन खतरा अब भी बरकरार है। शारदीय नवरात्र में राज्य के प्रमुख मंदिरों में लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मेले का आयोजन होता है। इन मंदिरों में कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए राज्य सरकार ने गाइडलाइन जारी की है। सरकार ने बड़े धार्मिक आयोजनों के साथ मेलों पर भी रोक लगा रखी है।

जयपुर के लोग आमेर किले पर बने सबसे पुराने मंदिरों में से एक शिला माता के दर्शन भी नहीं कर सकेंगे। यह मंदिर आज से 15 अक्टूबर तक के लिए बंद कर दिया है। कोरोनाकाल से पहले की स्थिति देखें तो यहां नवरात्रि में हर साल जबरदस्त मेला भरता था। खासकर छठ और अष्टमी के दिन। दो दिनों में हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते थे और दर्शन के बाद मेले का लुत्फ लेते थे।

इसी तरह जोधपुर स्थित मेहरानगढ़ किले में सुप्रसिद्ध चामुंडा माता मंदिर को भी श्रद्धालुओं के लिए बंद रखने का निर्णय लिया गया है। इस मंदिर की भी बहुत मान्यता है। यहां हर साल नवरात्रि पर हजारों की संख्या में लोग दर्शन के लिए आते हैं। इसके अलावा बीकानेर के देशनोक स्थित करणी माता मंदिर के द्वार भी भक्तों के लिए बंद रहेंगे।

साल 2020 में जब से कोरोना संक्रमण शुरू हुआ, तब से राज्य के सभी मंदिर नवरात्रि पर बंद रहे हैं। मार्च 2020 में नवरात्रि से पहले प्रदेश में लॉकडाउन लग गया था। इसके बाद यह चौथी बार है, जब नवरात्रि पर मंदिर बंद रहेंगे। हालांकि सामान्य दिनों में मंदिर खुले थे।

ये है सरकार की गाइडलाइन
राजस्थान सरकार ने कोरोना को लेकर गाइडलाइन जारी कर रखी है। इसके मुताबिक किसी भी प्रकार के भीड़ भाड़ संबंधी आयोजन नहीं होंगे। इनमें सार्वजनिक सभाएं, सांस्कृतिक और धार्मिक समारोह, जुलूस ,त्योहारों पर होने वाले मेले, हाट बाजार पर रोक रहेगी। इसी आदेशों के तहत सभी जिलों में कलेक्टर ने मेलों और धार्मिक आयोजनों की अनुमति नहीं दी। इस बार भी नवरात्रि पर हर साल होने वाले मेले, गरबा कार्यक्रम, जगराता और नवरात्रि से शुरू होने वाले रामलीला मंचन नहीं देखने को मिलेंगे। 10 जुलाई 2021 को गृह विभाग एक आदेश जारी हुआ था। इसी आदेश का हवाला देकर यह निर्णय किए गए हैं।

इन मंदिरों के द्वार दर्शन के लिए खुले
करौली स्थित कैला माता मंदिर को दर्शनार्थियों के लिए सामान्य दिनों की तरह खोल रखा है। हालांकि यहां हर साल नवरात्रि में बड़ा मेला भरता है, लेकिन उसकी अनुमति जिला प्रशासन ने नहीं दी। सीकर स्थित जीण माता मंदिर को भी देर शाम को मंदिर प्रबंधन ने आमजन के लिए खोले रखने का निर्णय किया। हालांकि यहां भी कोरोना की गाइडलाइन का पालन करते हुए ही मंदिर में श्रद्धालुओं को दर्शन करवाए जाएंगे।

जयपुर के दुर्गापुरा स्थित कालीमाता मंदिर भी दर्शन के लिए खुला रहेगा। यह मंदिर करीब 300 साल पुराना है, जो जयपुर की स्थापना होने से पहले का बना है। जयपुर कलेक्टर अंतर सिंह नेहरा ने बताया कि जयपुर में किसी भी तरह के आयोजन की अनुमति नहीं दी जाएगी। मंदिरों में प्रबंधन कमेटी कोविड गाइडलाइन की पालना करवाते हुए अगर श्रद्धालुओं को दर्शन करवाते हैं तो इस पर किसी तरह की रोक नहीं है।

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