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यह कैसा भेदभाव?:सरकार ने 3200 महिलाओं की मौत कोरोना से मानी, एक भी परिवार को मुआवजा नहीं, सिर्फ 8822 पुरुषों की मौत पर ही क्षतिपूर्ति

जयपुर6 महीने पहलेलेखक: हर्ष खटाना
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राजस्थान में अब तक करीब 9 हजार लोगों को मुआवजा मिला है। लेकिन सिर्फ पुरुषों की मौत पर। - Dainik Bhaskar
राजस्थान में अब तक करीब 9 हजार लोगों को मुआवजा मिला है। लेकिन सिर्फ पुरुषों की मौत पर।

प्रदेश की सबसे महत्वाकांक्षी सरकारी योजना चिरंजीवी हैल्थ बीमा का लाभ तब मिलता है, जब परिवार की महिला मुखिया का जनआधार हो। लेकिन उसी महिला मुखिया की काेराेना से माैत पर सरकार मुआवजा नहीं दे रही। राजस्थान में अब तक करीब 9 हजार लोगों को मुआवजा मिला है। लेकिन सिर्फ पुरुषों की मौत पर। प्रदेश में कोरोना से 8967 मौतें रजिस्टर्ड हैं, जिनमें 3200 से अधिक महिलाएं हैं।

जिन्हें मुआवजा दिया गया, उनमें 8822 ऐसी महिलाएं हैं, जिनके पति की मौत कोरोना या संक्रमण के बाद एक माह के दौरान हुई। भले ही रिपोर्ट निगेटिव रही हो। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सचिव डाॅ. समित शर्मा ने स्वीकारा, ‘जिस कैटेगरी के निर्देश मिले, उस पर अमल हुआ। महिलाओं की मौत पर विभागीय स्तर पर काेई मुआवजा नहीं दिया है।’

केंद्र से आपदा राहत के 1481 करोड़ पिछले वर्ष मिले, सभी महिलाओं को मुआवजा देते तो भी सिर्फ 16 करोड़ खर्च होते

नियम: आपदा कानून के तहत मुआवजे में जेंडर या उम्र मायने नहीं रखती
सुप्रीम काेर्ट में वकीलाें की दलील है कि ये आपदा है। इसमें जेंडर या उम्र मायने नहीं रखती। सभी काे समान आर्थिक मदद मिलनी चाहिए। वहीं, राज्य सरकार काेर्ट में हलफनामा देकर मुआवजे काे लेकर बड़ा फैसला या घाेषणा कर सकती हैं।

वजह: आर्थिक खर्च न बढ़े इसलिए प्रदेश सरकार ने निकाला यह रास्ता
सरकार महिलाओं का मुआवजा देगी ताे घोषित मौतों की संख्या बढ़ जाएगी। दूसरी ओर, केंद्र से 2020-21 में 1481 करोड़ आपदा राहत के मिले हैं और कुल 3200 महिलाओं का मुआवजा 50 हजार के हिसाब से 16 करोड़ होता है।

तर्क : मप्र, यूपी, दिल्ली ने मुआवजा नहीं दिया, इसलिए यहां भी नहीं दे रहे
मुआवजा राशि देने के लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अफसरों ने मप्र, यूपी, हरियाणा, दिल्ली और दक्षिण भारत के राज्यों का अध्ययन किया। बड़ी बात यह है कि दूसरे राज्यों में भी महिलाओं और बच्चाें की माैत पर मुआवजे का कोई प्लान नहीं था। इसलिए राजस्थान के ब्यूराेक्रेट्स ने भी इस पर कोई ध्यान नहीं दिया।

  • प्रदेश में पुरुष की माैत पर 8822 परिवारों को मुआवजा मिला। बच्चाें समेत 14,540 को सहायता दी गई। 98 कराेड़ खर्च हुए।
  • राज्य में सरकारी रिकाॅर्ड में 8967 कुल माैते हुई हैं। इसमें करीब 64% पुरुष कैटेगरी में हैं और महिलाएं 36% हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने न्यूनतम मुआवजा देने को कहा था, तब केंद्र ने 50 हजार रु. तय किए
सुप्रीम काेर्ट ने राजस्थान सहित अन्य राज्यों को मुआवजा देने के संबंध में फटकार लगाई थी। कहा था- देश में सबसे खराब हाल राजस्थान में हैं। दरअसल, कोर्ट मुआवजे को लेकर एक याचिका पर सुनवाई कर रही है। जानिए मुआवजे के मामले में क्या हुआ है अब तक-

1. आपदा प्रबंधन कानून 2005 के तहत बाढ़, सुनामी, सूखा, भूकंप, भूस्खलन और चक्रवात जैसी 12 आपदाओं से तबाही के मामलों में राहत कार्य व मुआवजे का कानून है। 2015 में गृह मंत्रालय ने इस कानून के तहत आपदा से मरने वालों के परिजन को 4 लाख रुपए के मुआवजे का नियम बनाया था।

2. केंद्र ने 2020 में कोरोना को आपदा प्रबंधन कानून के तहत आपदा घोषित किया। इसकी धारा 12 (iii) में कहा गया है- प्रशासन को आपदा प्रभावित को मिलने वाली मदद को लेकर गाइडलाइन तय करनी चाहिए। इसमें मृतक के परिजन को मिलने वाली मुआवजा राशि भी शामिल है। उधर, मार्च 2020 में गृह मंत्रालय ने राज्यों को सूचित किया कि कोरोना आपदा है।

3. सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर हुई। इसमें कहा गया कि कोरोना आपदा है तो इससे हुई मौत के मामलों में भी 4 लाख का मुआवजा मिले। पर सरकार ने अधिक मृतक संख्या के चलते मुआवजा देने से इंकार किया।

4. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के दावे खारिज किए। साथ ही केंद्र को आदेश दिए- कोरोना से हुई मौतों का विवरण मृत्यु प्रमाणपत्र में जरूरी तौर पर दर्ज करने की सरल प्रक्रिया हो। आपदा प्रबंधन कानून के तहत कोरोना से हुई मौतों के मामलों में न्यूनतम मुआवजे के लिए गाइडलाइन जारी हो।

5. इसके बाद राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अथॉरिटी (एनडीएमए) ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी कि। हर मौत के लिए परिवार को 50 हजार रुपए का मुआवजा मिलेगा, जो राज्यों के आपदा प्रबंधन कोष से दिया जाएगा।

6. जिसके बाद अन्य राज्यों के साथ ही राजस्थान में भी सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग और स्वास्थ्य विभाग ने मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू हुई। गौर करने लायक बात यह है कि केंद्रीय और प्रदेश के आपदा नियमाें में लिंग के आधार पर मुआवजा देने का कोई प्रावधान नहीं है, यानी महिला की मृत्यु पर भी मुआवजे का प्रावधान शामिल है।

कामकाजी थीं, पति नहीं थे तो भी मृत्यु पर मुआवजा नहीं

केस-1: झालाना डूंगरी की इंदिरा देवी की 3 नवंबर 2020 काे मृत्यु हुई। उनके पति की 2004 में मृत्यु हुई थी। बेटे राकेश ने बताया, ‘अफसर मुआवजे के लिए ऑनलाइन आवेदन को कहते हैं। पर ऑनलाइन आवेदन सबमिट नहीं हाेता। ई-मित्र वाले कहते हैं इसका ऑप्शन ही नहीं मिल रहा है।’

केस-2: मालवीय नगर की सविता का एसएमएस में 15 अप्रैल 2021 काे काेराेना से देहांत हुआ। पति ओम प्रकाश ने आर्थिक सहायता के लिए आवेदन किया, पर नहीं मिली। उन्होंने बताया, ‘हम दाेनाें प्राइवेट नौकरी करते थे। पत्नी 14 अप्रैल काे भर्ती हुई थी। काेई अधिकारी बताने को तैयार नहीं आर्थिक मदद मिलेगी या नहीं।’

केस-3: बदनपुरा के रामकिशन शर्मा की पत्नी शकुंतला शर्मा की 15 अगस्त 2020 काे तबीयत बिगड़ी। 19 अगस्त काे मेट्रो मास अस्पताल में भर्ती हुईं, 23 की सुबह देहांत हुआ। रिपोर्ट में मौत का कारण काेराेना दर्ज है। मुआवजे के लिए पति निगम-जिला प्रशासन के चक्कर लगा रहे हैं पर आर्थिक सहायता नहीं मिल रही।

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