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मेयर-कमिश्नर की तनातनी:सरकार तक पहुंची विवाद की आंच; यूडीएच मंत्री धारीवाल ने जांच के दिए आदेश, कर्मचारियों की हड़ताल से नहीं हुई जयपुर की सफाई

जयपुर2 महीने पहले
जयपुर नगर निगम मुख्यालय पर धरने पर बैठे कर्मचारियों को समझाते कमिश्नर यज्ञमित्र देव सिंह।

जयपुर नगर निगम ग्रेटर में शुक्रवार को मेयर सौम्या गुर्जर और निगम कमिश्नर यज्ञमित्र सिंह के बीच हुए विवाद की आंच सरकार तक पहुंच गई है। नगरीय विकास मंत्री (यूडीएच) शांति धारीवाल ने इस पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं। यह जांच स्वायत्त शासन निदेशालय की क्षेत्रीय निदेशक को सौंपी गई है। उधर, कमिश्नर के समर्थन में शनिवार (आज) को नगर निगम के सभी 10 हजार हजार सफाई कर्मचारी हड़ताल पर रहे और नगर निगम मुख्यालय पर धरना दिया। कर्मचारियों की हड़ताल और शहर की स्थिति को देखते हुए कमिश्नर खुद निगम मुख्यालय पहुंचे और उन्होंने कर्मचारियों से हड़ताल वापस लेने की गुजारिश की। इसके बाद कर्मचारियों ने धरना खत्म किया।

डोर टू डोर कचरा कलेक्शन का काम कर रही कंपनी BVG के ऑपरेशन हेड संदीप चौधरी का कहना है कि कंपनी को नगर निगम ने फरवरी, मार्च, अप्रैल और मई में एक भी रुपए का भुगतान नहीं किया। इस कारण हमने 3 दिन से काम बंद कर रखा है। पैसा नहीं मिलने से कर्मचारियों को सैलरी और गाड़ियों में ईंधन नहीं भरवा पा रहे। सफाई कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष नंद किशोर डंडोरिया ने कहा कि जब तक इस मामले के आरोपी पार्षदों की गिरफ्तारी नहीं हो जाती, तब तक कर्मचारी काम पर नहीं लौटेंगे।

इस कारण खड़ा हुआ पूरा बवाल
जयपुर क्षेत्र में डोर टू डोर कचरा कलेक्शन का काम BVG कंपनी के पास है। इस कंपनी ने भुगतान नहीं मिलने की बात पर पिछले 3 दिन से शहर में काम बंद कर रखा है। मेयर और पार्षद इस कंपनी के काम से खुश नहीं हैं। इस कंपनी को हटाकर दूसरी वैकल्पिक व्यवस्था करना चाहते हैं। कमिश्नर कंपनी को हटाने की बजाए भुगतान करवाकर उसी कंपनी से काम जारी रखवाना चाहते हैं। इसी बात को लेकर आयुक्त और मेयर के बीच शुक्रवार को विवाद हुआ और मामला मारपीट तक पहुंच गया।

विवाद पुराना है
आयुक्त और मेयर के बीच विवाद इस साल फरवरी से शुरू हुआ, जब नगर निगम की साधारण सभा में बनी संचालन समितियाें को कमिश्नर ने नियम विरुद्ध बताया था। आयुक्त की इस कार्यशैली से मेयर और भाजपा के पार्षदों में खासी नाराजगी थी। जिस समय साधारण सभा में समितियों के बनाने का प्रस्ताव रखा गया था, उस समय आयुक्त ने प्रस्ताव को लेकर कोई आपत्ति नहीं जताई थी। बैठक के मिनट्स तैयार हुए और समितियों का प्रस्ताव मंजूरी के लिए राज्य सरकार के पास भेजा गया। इस प्रस्ताव पर ही कमिश्नर ने डिसेंट नोट लगाकर समितियों का गठन नियम विरुद्ध बताया था। आयुक्त के इसी पत्र को आधार मानकर सरकार ने निगम में बनी सभी समितियों को निरस्त कर दिया था। इसके बाद 24 मई जब आयुक्त ने विद्याधर नगर से कच्ची बस्ती को खाली करवाया था, तब मेयर ने आयुक्त की इस कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। इस कदम को अमानवीय करार दिया था।

आज नहीं हुई शहर में सफाई
आयुक्त के समर्थन में उतरे सफाई कर्मचारियों ने काम नहीं किया। डोर टू डोर कचरा कलेक्शन का काम 3 दिन से बंद पड़ा है। इस कारण पूरे शहर में सफाई व्यवस्था ठप पड़ी है। शहर में जगह-जगह डिपो पर कचरा भरा पड़ा है। शहर के लोग भी पिछले 3 दिन से कचरा गाड़ी नहीं आने से परेशान हैं।

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