पतंग की सीख; जो आप हैं वो बने रहिए:जो पतंग हम उड़ा रहे हैं, वो हमें ऊंची उड़ान देती है, आज हमारे हाथों में 2300 सालों के गर्व की डोर है

जयपुर6 दिन पहलेलेखक: प्रेरणा साहनी
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लेखक रस्किन बॉन्ड। - Dainik Bhaskar
लेखक रस्किन बॉन्ड।

आज मकर संक्रांति। सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण होने का पर्व। पतंगबाजी के उल्लास का त्योहार। यह प्रकृति के बदलावों व गतिशीलता का संदेश देता है। इस बदलाव की सीख पतंग सबसे बेहतर तरीके से बताती है, क्योंकि ये 2300 सालों से लगातार उड़ रही है। इसे विज्ञान से भी समझा जा सकता है और मनोविज्ञान से भी। दुनिया में सबसे बड़े पतंगबाज न्यूजीलैंड के पीटर लिन्न और बच्चों के चहेते कहानीकार/लेखक रस्किन बॉन्ड पतंग का यही विज्ञान और मनोविज्ञान भास्कर के पाठकों को बता रहे हैं।

विज्ञान; फिजिक्स और मैथ्स के सर्वाधिक प्रयोग पतंग पर किए, पतंग का प्रैक्टिकल हर किताब से बेहतर है

न्यूजीलैंड से पीटर लिन्न : जमीन, पानी और बर्फ की पतंग बना चुके हैं। गिनीज बुक में नाम है।
मेरी पतंगों को 3 पेटेंट मिले हैं। फिजिक्स-मैथ्स के प्रैक्टिकल को जो मजा पतंग बनाने में था, वो किसी इन्वेंशन, किताबों से ज्यादा था। लोग कहते- एयरो डायनेमिक्स में महारत हासिल कर हवाई जहाज बनाऊं लेकिन 76 की उम्र में पतंगों को हर बार नई चुनौती के साथ डिजाइन करना, उड़ाना आसान बनाना, इससे ही फुर्सत नहीं है। मेरी सबसे बड़ी पतंग 1250 वर्गमीटर की है। पांच बार भारत में भी पतंग उड़ा चुका हूं। 5 साल की उम्र से पतंग उड़ाने लगा। पहली पतंग बनाई तो उड़ी ही नहीं। फिर यही करने की जिद कर ली। 1990 में पहली काइट बग्गी बनाई। काइट बग्गीइंग स्पोर्ट्स दिया। स्नो काइटिंग की स्लेड बनाई। पावर काइटिंग रोमांचक हुई। वॉटर स्कीइंग पतंग 100 किमी/ घंटे की रफ्तार से उड़ रही है। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से ड्राइवरलैस कार की तर्ज पर पतंगें भी खुद उड़ सकेंगी। ये जल्द होगा।

मनोविज्ञान; कला-तकनीक-ताकत और जिम्मेदारी सब है पतंग... सामाजिक है पतंग, इसे मिलकर ही उड़ाते हैं

लेखक रस्किन बॉन्ड : बाल मन पर कई किताबें लिखीं जिनमें पतंग खास किरदार।
कोरोना ने बच्चों की जिंदगी को सीमित कर दिया है। पतंगें, बारिश, खुला मौसम, इंद्रधनुष… खिड़की से बाहर कुछ तो दिखे जिससे बच्चे बाहर जाएं। पतंगें तो वैसे भी कुछ ही शहरों के आसमां को नसीब हैं, जब मौका मिले इन्हें उड़ाने से नहीं चूकना चाहिए। यह ताकत और जिम्मेदारी का अहसास कराती हैं। ताकत इसलिए क्योंकि डोर हमारे हाथ में है, उसकी उड़ान हमारी कला के साथ तकनीक पर निर्भर करती है।

जिम्मेदारी इसलिए क्योंकि पतंगों के साथ परिंदों का ख्याल रखना है। 85 की उम्र में मैं समझ चुका हूं कि पतंगें सामाजिक होती हैं। कोई पतंग चुने, कोई डोर बांधे, कोई छुट्‌टी दे, कोई चरखी पकड़े, कोई शोर मचाकर जीत का बिगुल बजाए...तब पतंग उड़ती है। मैं सबसे कहूंगा- बाहर जाओ, रंग बिरंगी पतंगों की डोर थामो और इस उत्सव का पूरा मजा लो। यह तजुर्बा आपके अंदर नए आसमानों के सिरे खोल देगा।

लंबी उड़ान; पतंग 2300 साल की

  • 200 ईस्वी पूर्व पहली बार चीन में रेशम की पतंग बनी।
  • 1232 में पहली बार चीन ने पतंगों पर संदेश लिख मंगोलिया के वॉर कैंप में गिरवाया।
  • प्रथम विश्व युद्ध में पहली बार सैनिक पतंगों के साथ उड़े और दुश्मन इलाकों की निगरानी की। दूसरे विश्व युद्ध में जर्मनी की पनडुब्बियों पर पतंगों से दुश्मन जहाजों की निगरानी की गई।
  • 1749 में पहली बार पतंग वैदर रिपोर्टर बनी। 1899 तक यूएस में 17 काइट स्टेशन बने।
  • 1887 में पहली बार ब्रिटेन के डग्लस आर्चीबाल्ड ने पतंग से एरियल फोटोग्राफी की।
  • 1853 में पहली बार फ्लाइंग मशीन बनी। 1900 में बाइप्लेन डिजाइन हुआ। फिर हवाई जहाज बन पाया।
  • 2008 में पहली बार जर्मनी में पतंग को 30 हजार टन भारी कार्गो जहाज और क्रूज लाइनर खींचने के लिए इस्तेमाल किया।
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