पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Rajasthan
  • Jaipur
  • The Mining Mafia Earned More By Selling The River In Two Districts Than The Fine That The Government Did Not Collect In The Entire State.

अवैध बजरी खनन से भरा खजाना:सरकार ने पूरे राज्य में जितना जुर्माना नहीं वसूला, उससे ज्यादा खनन माफिया ने दो जिलों में नदी बेचकर कमाए

जयपुर11 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
नागौर जिले के जसनगर में लूणी नदी के घाव। - Dainik Bhaskar
नागौर जिले के जसनगर में लूणी नदी के घाव।
  • सरकार को पूरे राज्य में 229 करोड़ रु. मिले, खनन माफियाओं ने नागौर और बाड़मेर में अवैध बजरी से कमाए 250 करोड़

खातेदारी जमीन पर बजरी लीज की आड़ में नदियों में जो खनन हुआ है उससे सरकारी खजाने को जमकर चपत लगी है। नागौर (46) और बाड़मेर (27) यानि 73 खानों से पिछले चार साल में राज्य सरकार को महज 17 करोड़ रुपए का राजस्व मिला है जबकि इसके पास नदी बेचकर खनन माफियाओं ने 250 करोड़ रुपए से ज्यादा कमाए हैं।

सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार पिछले चार साल में नागौर के गोटन क्षेत्र की 46 लीज से 31.57 लाख टन बजरी निकाली गई जिससे सरकार को 11 करोड़ 50 लाख रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ। बजरी माफिया ने यहां अवैध रुप से बजरी बेचकर 160 करोड़ रुपए कमाए। इसी तरह बाड़मेर जिले की 27 खातेदारी लीज से 15.63 लाख टन बजरी निकाली गई है जिससे सरकार को 5 करोड़ 47 लाख रुपए का राजस्व मिला। यहां माफियाओं ने 90 करोड़ रुपए से ज्यादा कमाए हैं।

सीईसी व पर्यावरण मंत्रालय की आपत्तियां भी दरकिनार

वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने जनवरी, 2020 में राज्य सरकार को निर्देशित किया कि नदी के 5 किमी के क्षेत्र में आने वाले हर लीज का पुनर्भरण अध्ययन कराया जाए। इसके बाद ही उनकी खनन लीज को रिन्यू किया जाए। सरकार ने इन आदेशों को नजरंदाज कर दिया। 23 दिसंबर, 2020 को सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (सीईसी) ने राजस्थान की बजरी लीज पर सुप्रीम कोर्ट में अपनी रिपोर्ट पेश की और सुझाव दिया कि इन लीज की आड़ में हो रहे अवैध खनन को तुरंत प्रभाव से बंद किया जाए। सीईसी ने अक्टूबर, 2020 में राजस्थान का दौरा कर मौके पर ही भीलवाड़ा की चार बजरी लीज बंद करने के निर्देश दिए।

पर्यावरण एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज क्यों नहीं

सीईसी ने अपनी रिपोर्ट में यह कहा है कि अवैध बजरी परिवहन को लेकर पकड़े गए वाहनों पर पर्यावरण एक्ट के तहत कार्रवाई की जाए। राजस्थान में इस एक्ट के तहत अब तक एक भी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है। सीईसी ने यह भी सुझाव दिया कि अवैध बजरी परिवहन करने वाले वाहनों से 10 लाख रु. प्रति वाहन जुर्माना वसूलना चाहिए और खनन चोरी पर 5 लाख रु. प्रति क्यूबिक मीटर जुर्माना वसूलना चाहिए। यह जुर्माना पुराने जुर्माने के अतिरक्त होगा।

खबरें और भी हैं...