राजस्थान में सियासी उलझन:मंत्री नहीं छोड़ना चाहते तबादला पावर, कार्यकर्ताओं को खुश करने का यही जरिया

जयपुर10 महीने पहलेलेखक: विनोद मित्तल
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वर्तमान शिक्षामंत्री गोविंद सिंह डोटासरा और पूर्व शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी। - Dainik Bhaskar
वर्तमान शिक्षामंत्री गोविंद सिंह डोटासरा और पूर्व शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सामने तबादलों के लिए पैसे लिए जाने की शिक्षकों की स्वीकारोक्ति के बाद प्रदेश में एक बार फिर शिक्षक तबादला नीति बनाने की मांग जोर पकड़ने लगी है। प्रदेश में अब भी तबादलों की पावर मंत्रियों के पास ही है। देश के कई राज्यों में शिक्षक तबादलों की प्रक्रिया ऑनलाइन है। जबकि राजस्थान में 21वीं सदी में भी तबादला प्रक्रिया 19वीं सर्दी जैसी है।

प्रदेश में 27 साल पहले पहली बार तबादला नीति बनाई गई थी। जिसको आज तक लागू नहीं किया गया। पिछली भाजपा सरकार के समय भी तबादला नीति बनाने की पहल हुई और इस सरकार ने भी तबादला नीति बनाने के लिए दो साल पहले एक पूर्व आईएएस की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया था। लेकिन कमेटी की रिपोर्ट आज तक नहीं आई।

इसलिए तबादलों का पावर नहीं छोड़ना चाहते हमारे मंत्री

मंत्री तबादलों की पावर शिक्षा विभाग सहित सभी विभागों में मंत्रियों के पास रहती है। तबादले के समय मंत्रियों की पूछ बढ़ जाती है। विधायक भी मंत्रियों के चक्कर काटते हैं। सरकार चाहे किसी की भी हो, विधायकों का कोटा तय रहता है। वह उतने या उससे थोड़ा कम या अधिक तबादला करा लेता है। तबादले के जरिए ही विधायक अपने कार्यकर्ताओं को खुश रखता है।

संगठन : जिस राजनैतिक पार्टी की सरकार रहती है। उस पार्टी के नेता और कार्यकर्ताओं के अच्छे दिन आ जाते हैं। चुनाव के समय की गई मेहनत का फल वे तबादलों के जरिए ही वसूलते हैं। तबादलों में इन नेताओं की सिफारिश खूब चलती है। साथ ही संगठन भी कार्यकर्ताओं को राजी रखने के लिए उनकी सिफारिश पर तबादले किए जाते हैं।

प्रदेश में 27 साल में कब-कब तैयार की गई है तबादला नीति

  • 16 मार्च 1994 को अनिल बोर्दिया की अध्यक्षता में कमेटी गठित। कमेटी ने 5 अक्टूबर 1994 को सरकार को रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट 27 साल बाद भी धूल फांक रही।
  • भाजपा सरकार ने नवंबर 2015 में तत्कालीन गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया की अध्यक्षता में 5 सदस्यों की मंत्रिमंडलीय समिति का गठन किया था। लेकिन आज तक ना तो अंतिम रिपोर्ट आई और ना ही लागू किया गया।
  • वर्ष 2015 में 3 आईएएस को मध्यप्रदेश, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक और गुजरात की तबादला पॉलिसी का अध्ययन करने के लिए भेजा गया था। कोई नीति तैयार नहीं हुई।
  • वर्तमान सरकार ने जनवरी 2020 में रिटायर आईएएस औंकार सिंह की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया।

शिक्षकों के लिए जल्द ही तबादला नीति बनाई जाएगी। ताकि तबादलों में पारदर्शिता हो। शिक्षक को पहले ही पता रहे कि तबादला होने वाला है। तबादले के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया तो पहले ही शुरू कर चुके हैं। - गोविंद सिंह डोटासरा, शिक्षामंत्री

हमने तबादला नीति बनाकर सुझाव भी ले लिए थे, लेकिन समय के अभाव में इसको लागू नहीं किया जा सका। नीति बनकर तैयार पड़ी है, लेकिन मुझे कांग्रेस सरकार में तबादला नीति लागू होने की संभावना नजर नहीं आती। -वासुदेव देवनानी, पूर्व शिक्षामंत्री भाजपा