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गहलोत सरकार के काम से दुखी कांग्रेस विधायक:चीफ इंजीनियर के सामने फर्श पर बैठ MLA गुढ़ा बोले- हमने गहलोत सरकार को यह सोचकर थोड़े ही बचाया था कि ये दिन देखने पड़ेंगे

जयपुर8 महीने पहले
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जलदाय विभाग के चीफ इंजीनियर के ऑफिस में फर्श पर बैठकर धरना दे रहे कांग्रेस विधायक राजेंद्र गुढ़ा ने सरकार के खिलाफ नाराजगी का संकेत दे दिया है।
  • बसपा से कांग्रेस में आए छह विधायकों को सत्ता में भागीदारी का आश्वासन मिला था, वह तो दूर अब काम भी नहीं हो रहे, इसलिए नाराजगी जताई
  • डेढ़ साल गुजर जाने के बाद भी राजेंद्र गुढ़ा और उनके साथी विधायक मंत्री बनने या राजनीतिक नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं

बसपा से कांग्रेस में शामिल हुए उदयपुरवाटी विधायक राजेंद्र सिंह गुढ़ा कल जलदाय विभाग के चीफ इंजीनियर के चैंबर में जमीन पर धरने पर बैठ गए थे। इसके पीछे उनकी सियासी नाराजगी को वजह बताया जा रहा है। गुढ़ा ने चीफ इंजीनियर के सामने धरने के दौरान ही खुलकर सियासी नाराजगी जाहिर भी कर दी। गुढ़ा ने कहा कि हमने सरकार को बचाया था। यह सोचकर थोड़े ही बचाया था कि ये दिन देखने पड़ेंगे। चुना हुआ विधायक जमीन पर बैठा है और अफसर सुनवाई ही नहीं कर रहे हैं।

गुढ़ा की इस एक लाइन के बयान ने पूरी राजनीतिक तस्वीर साफ कर दी। जानकारों का मानना है कि राजेंद्र गुढ़ा सरकार में काम नहीं होने, सत्ता में भागीदारी नहीं मिलने और स्थानीय राजनीति में भी अपने हिसाब से फैसले सरकार से नहीं करवा पाने के कारण नाराज हैं। जनता जल मिशन में उदयपुरवाटी के गांवों को शामिल नहीं करने पर गुढ़ा को धरने पर बैठकर सरकार को अलार्मिंग सिग्नल देने का मौका मिल गया।

गुढ़ा के इस बयान में दर्द और चेतावनी दोनों
राजेंद्र गुढ़ा का यह कहना कि ये दिन देखने के लिए सरकार नहीं बचाई थी। इससे साफ है कि वे सरकार में काम नहीं होने से दुखी हैं। गुढ़ा ने इस बयान के जरिए अपना दर्द भी बयां किया तो सरकार को भी चेतावनी दे दी है कि अनदेखी की गई और वादे के मुताबिक भागीदारी नहीं मिली तो आगे वे असतुंष्ट विधायकों की राह भी पकड़ सकते हैं। राजेंद्र गुढ़ा ने गहलोत सरकार के पिछले कार्यकाल में भी खुद सहित बसपा के सभी 6 विधायकों के कांग्रेस में विलय में बड़ी भूमिका निभाई थी। उस वक्त गुढ़ा को राज्य मंत्री बनाया गया था।

बसपा से कांग्रेस में आए छह विधायकों को डेढ़ साल से सत्ता में भागीदारी का इंतजार
गुढ़ा ने 6 विधायकों के साथ सितंबर 2019 में बसपा छोड़कर कांग्रेस में विलय की घोषणा की थी। इस विलय के बाद ही अशोक गहलोत सरकार में कांग्रेस विधायकों की संख्या 107 हुई थी। बताया जाता है कि बसपा से कांग्रेस में शामिल होने वाले विधायकों से मंत्री बनाने, राजनीतिक नियुक्तियां देने ओर उनके निर्वाचन क्षेत्र में काम होने सहित तमाम वादे किए गए थे। हालांकि मुख्यमंत्री गहलोत सहित कांग्रेस के बड़े नेता ​बिना शर्त विलय की बात कहते आए हैं। विलय को डेढ़ साल से ज्यादा वक्त बीत चुका है। अब तक छहों में से किसी भी विधायक को न मंत्री बनाया, न राजनीतिक नियुक्ति में न किसी माध्यम से सरकार में भागीदारी दी। गुढ़ा के दर्द को इससे भी जोड़कर देखा जा रहा है।

विधानसभा में 8 मार्च को कहा था- कौन मंत्री भ्रष्ट है एक-एक का नाम सदन में बता दूंगा
राजेंद्र गुढ़ा ने इससे पहले 8 मार्च को विधानसभा में कहा था कि कौन मंत्री भ्रष्ट है सदन में एक-एक का नाम बता दूंगा। अब वाले मंत्रियों का भी और पुरानी सरकार के मंत्रियों का भी। जो मंत्री भ्रष्ट हैं उनका एक एक करके विस्तार से नाम बता सकता हूं। कौन सा आईपीएस भ्रष्ट है। कौनसा मंत्री भ्रष्ट है। यह जनता को सब जानकारी रहती है। सब जानते हैं। लोगों में इसकी चर्चा रहती है।