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सियासत:दूसरे राज्यों के विधायकों की प्रदेश में हुई थी ‘बाड़ाबंदी’, अब यहां संकट में ‘सरकार’

जयपुर10 महीने पहले
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कांग्रेस व भाजपा के बीच कई राज्यों में हुए सत्ता संघर्ष के लिए अब ‘बाड़ाबंदी’ अब राजनीतिक जरूरत हो गई है। कांग्रेस आलाकमान दूसरे प्रदेशों में सत्ता बचाने व बनाने के लिए करने वाली बाड़ाबंदी के लिए राजस्थान को  ही चुनती रही है। पिछले डेढ़ साल में कांग्रेस ने राजस्थान के होटल व रिसोर्ट में महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश व गुजरात के विधायकों की चार बार बाड़ाबंदी की है। इन बाड़ाबंदी से कांग्रेस केवल महाराष्ट्र में शिवसेना के सहयोग से सरकार बना पाई है। 

बाड़ाबंदी का ट्रेंड पुराना, 1996 से होटलों में टूरिज्म

प्रदेश में सत्ता संघर्ष के साथ ही बाड़ाबंदी का ट्रेड भी पुराना है। व्यास व सुखाडिय़ा के बीच सत्ता के लिए हुई वोटिंग के समय भी दोनों गुटों के विधायक एक जगह एकत्रित हुए थे। लेकिन 1996 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत ने सत्ता पर संकट की आशंका के बाद चोखी ढाणी रिसोर्ट में भाजपा विधायकों की बाड़ाबंदी की थी। तब शेखावट  सत्ता बचा पाए थे। इसके बाद प्रदेश में झारखंड, उत्तराखंड, गोवा, महाराष्ट्र, गुजराज व मध्यप्रदेश के विधायकों की बाड़ाबंदी हो चुकी है।

राज्यसभा-आरसीए चुनावों में हो चुकी है स्थानीय बाड़ाबंदी 

राज्यसभा चुनाव में विधायकों को एकजुट रखने के लिए कांग्रेस ने दिल्ली रोड स्थित पांच सितारा होटल में बाड़ाबंदी की थी। यहां वोटिंग लिए रिहर्सल भी की गई थी। यहां पर विधायक महेश जोशी व महेंद्र चौधरी ने प्रबंधन संभाला था। राज्यसभा में कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल व नीरज डांगी को जीत मिली है। आरसीए चुनाव में वैभव गहलोत को अध्यक्ष बनाने के लिए अचरोल के एक रिसोर्ट में बाड़ाबंदी हुई थी। इसमें भी गहलोत को जीत हासिल हुई थी।

महाराष्ट्र के विधायकों की दो बार हुई थी बाड़ाबंदी

महाराष्ट्र विधानसभा परिणामों के बाद कांग्रेस विधायकों को जयपुर के ब्यूना रिसोर्ट में पॉलिटिकल टूरिज्म के तहत बाड़ाबंदी की थी। लेकिन रातों-रात भाजपा ने सरकार बना  ली थी। बाड़ेबंदी  खत्म कर दी। लेकिन भाजपा व शिवसेना का गठबंधन टूटने के बाद कांग्रेस ने दुबारा महाराष्ट्र के विधायकों की बाड़ाबंदी की। वहां पर भाजपा की सरकार गिरने में कांग्रेस सफल रही।

बाड़ाबंदी की, लेकिन एमपी में नहीं बचा पाए सरकार

मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया की बगावत के बाद  कांग्रेस की कमलनाथ सरकार संकट में आ गई थी। आलाकमान ने गहलोत पर विश्वास करते हुए एमपी के विधायकों को जयपुर शिफ्ट किया। गहलोत खुद एमपी विधायकों को रिसीव करने एयरपोर्ट पहुंचे। दो होटल-रिसोर्ट में विधायकों को ठहराया। राजनैतिक घटनाक्रम के बाद एमपी में कांग्रेस सरकार को नहीं बचाया जा सका।

राज्यसभा चुनावों के लिए माउंट आबू आए थे विधायक

राज्यसभा चुनावों के दौरान गुजरात में विधायकों में तोड़फोड़ की आशंका के बाद कांग्रेस आलाकमान ने जून के पहले सप्ताह में माउंट आबू के एक रिसोर्ट में बाड़ाबंदी की। विधायकों को रिसोर्ट में रखा  गया। इसे पॉलिटिकल टूरिज्म  का नाम दिया।

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