पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

राजस्थान में सियासी संग्राम का 26वां दिन:जिस राजद्रोह की धारा से पायलट भड़के, सियासी बवंडर उठा...एसओजी ने 24 दिन बाद उसे हटाया

जयपुर10 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • विधायकों की खरीद-फरोख्त के मामले में नया मोड़, एसओजी ने हाईकोर्ट मेंे कहा- लीगल राय के बाद राजद्रोह की धारा हटाई, केस एसीबी को ट्रांसफर
  • एसओजी ने केस एसीबी को सौंपा, कहा कि प्रथम दृष्ट्या ये भ्रष्टाचार का मामला है

राजस्थान के सियासी संग्राम के मंगलवार को उस वक्त नया मोड़ आ गया, जब विधायकों की खरीद-फरोख्त के मामले में स्पेशल अाॅपरेशन ग्रुप (एसअाेजी) ने 24 दिन (10 जुलाई से 3 अगस्त) बाद राजद्रोह की धारा 124 ए हटा ली। एसओजी की ओर से अधिवक्ता संत कुमार जैन ने सीएमएम कोर्ट में कहा कि इस मामले में दर्ज एफआईआर में राजद्रोह की धारा 124 ए का अपराध नहीं बनता। इसलिए यह फैसला किया गया। दरअसल, यह वही धारा है, जिसकी वजह से प्रदेश की सियासत में भूचाल आया था।

क्योंकि, गहलाेत सरकार में उपमुख्यमंत्री रहे सचिन पायलट व उनके समर्थक विधायकों को एसओजी ने राजद्रोह के तहत ही नोटिस दिया था। इसी से नाराज हाेकर पायलट ने बगावती तेवर अपना लिए थे। इसके अलावा एसओजी ने यह मामला भ्रष्टाचार विराेधी ब्यूराे (एसीबी) काे साैंप दिया है। तर्क दिया है कि विधिक राय के अनुसार प्रथम दृष्ट्या यह मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 8 व 12 के तहत पाया गया है। ऐसे मेंं भ्रष्टाचार से जुड़े केसों की सुनवाई करने का अधिकार एसीबी कोर्ट को है। इसलिए तीनाें मामलों की पत्रावलियों को एसीबी कोर्ट भेजा जाए। इस पर सीएमएम कोर्ट ने कहा कि ऐसा करना उनके अधिकारिता क्षेत्र में नहीं है। एसीबी कोर्ट एक विशेष कोर्ट है। इस पर एसओजी ने कहा कि उन्होंने तो इस संबंध में कोर्ट को सूचना दी है। बाद में एसओजी ने इन तीनों मामलों की पत्रावलियों को एसीबी को सौंप दिया।

बड़ा सवाल... एसओजी ने राजद्राेह में 3 केस दर्ज कर 3 लोगों काे गिरफ्तार किया, 20 दिन विधायकों की तलाश में मानेसर में रहे...तब होश आया- ये राजद्रोह का केस नहीं

करीब एक महीने तक विधायकों की खरीद-फरोख्त में राजद्राेह की धाराएं लगा जांच करने वाली एसओजी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए।

1. जब मामला राजद्राेह का था ही नहीं ताे मुख्य सचेतक महेश जोशी की शिकायत पर पहले लीगल राय लेने के बजाय अानन-फानन में मामला दर्ज करके जांच क्यों शुरू कर दी गई?

2. जिन दाे लागों के माेबाइल नंबर तीन महीने पहले सर्विलांस पर लिए गए थे उनकी माेबाइल पर सुनी बातचीत के अाधार पर इस पूरे केस को राजद्राेह का मामला कैसे मान लिया गया?

3. चर्चा है कि भंवरलाल शर्मा की ओर से जांच एनआईए से करवाने का प्रार्थना पत्र काेर्ट पेश करने के बाद एसअाेजी मामले में बैकफुट पर अा गई थी। डर था कि जांच एनआईए ले लेगी?

पायलट गुट के 3 विधायकों का सीएम पर सीधा हमला

‘गहलोत का तानाशाही रवैया नागवार है’
मौजूदा सियासी घटनाक्रम पिछले डेढ़ साल से गहलोत सरकार में हमारे लीडर पायलट के सार्वजनिक अपमान का परिणाम है। प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे ने भी पक्षपात किया। गहलोत का तानाशाही रवैया हमें नागवार है। - हेमाराम चौधरी, विधायक, गुडामलानी

हम अपने आत्मसम्मान के लिए लड़ रहे
राजनीतिक नियुक्तियों, राज्य सरकार के आधिकारिक कार्यक्रमों, नौकरशाहों के तबादलों और पोस्टिंग में पायलट के करीबियों को निशाना बनाया। हम सिर्फ आत्मसम्मान और पार्टी में अपनी जगह के लिए लड़ रहे हैं। - वेदप्रकाश साेलंकी, विधायक, चाकसू

धारा लगाकर हटाना बड़ी हार

राजद्राेह की जाे धारा पायलट गुट के विधायकाें पर लगाई गई थी, वाे अंग्रेजाें के जमाने की है। सरकार के इशारे पर ये धारा पहले लगाना, फिर हटाना सरकार की एक बड़ी हार है। - सतीश पूनियां, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष

पायलट के साथ आवाज उठाने वालों को दरकिनार नहीं कर सकते: इंद्राज

हमारी लड़ाई एक व्यक्ति को पार्टी से दरकिनार करने से उपजे गुस्से और तकलीफ का नतीजा है। पायलट के साथ आवाज उठाने वालों में कैबिनेट मंत्री, एक पूर्व स्पीकर और एक वरिष्ठ कांग्रेस कांग्रेस नेता शामिल हैं। किसी एक इंसान के लिए इन्हें दरकिनार नहीं कर सकते। - इंद्राज गुर्जर, विधायक, विराटनगर

बचने के लिए धारा वापस ली

एनआईए द्वारा मामले की निष्पक्ष जांच होने पर सरकार की किरकिरी के डर से एसओजी ने राजद्रोह का केस वापस लिया है। सभी प्रकरण फर्जी दर्ज कराए गए हैं। - राजेंद्र राठौड़, उपनेता प्रतिपक्ष

हाईकोर्ट ने खरीद-फरोख्त से लेकर होटल में रुकने तक के मामले भी सुने...

1. विधायक भंवरलाल शर्मा मामले में महेश जोशी से 13 तक जवाब तलब

हाईकोर्ट ने विधायकों की खरीद-फरोख्त मामले में बागी विधायक भंवरलाल द्वारा जांच एसओजी से लेकर एनआईए से कराने से जुड़े मामले में महेश जोशी से जवाब मांगा है। साथ ही भंवरलाल की चारों याचिकाओं को एक साथ सूचीबद्द करते हुए मामले की सुनवाई 13 अगस्त को तय की है। जस्टिस एसके शर्मा

2. कांग्रेस में 6 बसपा विधायकों के विलय पर खंडपीठ में आज सुनवाई

हाईकोर्ट में मंगलवार को बसपा के छह एमएलए के कांग्रेस में विलय मामले में भाजपा विधायक मदन दिलावर व बसपा पार्टी ने एकलपीठ के अंतरिम आदेश को खंडपीठ में चुनौती दी। इन अपीलों पर बुधवार को सुनवाई होगी। दिलावर ने याचिका में कहा था कि यह कानूनन सही नहीं है।

3. राज्यपाल को हटाने वाली याचिका सारहीन है, हाईकोर्ट ने खारिज कर दी

प्रदेश के राज्यपाल कलराज मिश्र द्वारा कैबिनेट की ओर से मांग के बावजूद भी विधानसभा सत्र न बुलाए जाने से संबंधित दो पीआईएल को सारहीन मानते हुए खारिज कर दिया। सीजे इन्द्रजीत महान्ति व जस्टिस प्रकाश गुप्ता की खंडपीठ ने यह आदेश शांतनु पारीक व अन्य की पीआईएल पर दिया।

4. होटल में रुके विधायकों के वेतन रोकने पर कहा-सक्षम अफसर से मिलें

हाईकोर्ट ने सीएम अशोक गहलोत और पायलट खेमे के होटलों में रुके हुए एमएलए के वेतन-भत्ते रोकने से संबंधित पीआईएल मंगलवार को यह कहते हुए निस्तारित कर दी कि प्रार्थी इस संबंध में सक्षम अधिकारी के समक्ष प्रतिवेदन दें। यह अादेश विवेक सिंह जादौन की पीआईएल पर दिया गया।

खबरें और भी हैं...