क्लास से भगा देते थे टीचर, मिला राष्ट्रपति सम्मान:चित्रकारी का जुनून ऐसा, घर से 10 रुपए लेकर निकल गए

जयपुर2 महीने पहले

टीचर जब क्लास में पढ़ा रहे होते थे, 7वीं क्लास का बच्चा उनका चित्र बनाता। टीचर ने कई बार पकड़ा और उसे क्लास के बाहर निकाला। आज उसकी कला का जादू हर कोई देखना चाहता है। राई और खस के दाने इतने छोटे कि पकड़ो तो फिसल जाए, लेकिन वही छात्र उन पर चित्रकारी करता है। कलाकारी ऐसी की हाथ का स्पर्श पाकर रंग और चित्र बोल उठते हैं। शायद आप भी देखने के बाद यही बोलेंगे- यह कैसे संभव है?

आपने कैनवास पर चित्रकारी के बारे में खूब सुना और पढ़ा होगा। खस के बीज पर चित्रकारी शायद ही देखी होगी। डोडा का बीज (खस) सबसे छोटा होता है। इस पर मीरा का पूरा भक्तिमय चित्र बनाया है, आर्टिस्ट किशन शर्मा ने। चित्तौड़गढ़ के बेगूं के रहने वाले हैं। राई पर चित्रकारी का रिकॉर्ड इन्हीं के नाम से दर्ज है। कलाकारी के लिए 1994 में राष्ट्रपति से सम्मान प्राप्त कर चुके हैं। वहीं 4 राज्य पुरस्कारों सहित कई मंचों पर सम्मानित किया गया है। अब इनका नाम पद्मश्री सम्मान के लिए भेजा गया है।

किशन शर्मा के जीवन और चित्रकारी को जानने व समझने के लिए जब हम बेगूं के नया बस स्टैंड स्थित उनके घर पहुंचे, तो वहां एक कमरा पूरा आर्ट गैलरी और एक एग्जीबिशन की तरह था। दीवार के सहारे राजस्थान की विभिन्न शैलियों की पेंटिंग्स रखी हुई थीं। इन सब को देखने के बाद उन्होंने राई और खस के दाने पर की गई चित्रकारी दिखाई।

किशन शर्मा द्वारा निर्मित राई के दाने पर मीरा की कलाकृति का अवलोकन करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला।
किशन शर्मा द्वारा निर्मित राई के दाने पर मीरा की कलाकृति का अवलोकन करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला।

किशन शर्मा को कला के संस्कार न तो विरासत में मिले और न ही परिवार में कोई कला का माहौल था। पिता पंडित सीताराम कथावाचक और ज्योतिषी थे। वह इनको भी ज्योतिषी बनाना चाहते थे, लेकिन हाथ की रेखाएं देखने की जगह, उनको कागज पर रेखाओं से आकार देने का शौक था। पढ़ाई में कोई खास रुचि नहीं थी। भागवत कथा और रामायण के चित्रों को खुद की प्रेरणा से उकेरते थे। साल 1986 में गांव के ही शिव लाल सोनी के कहने पर भीलवाड़ा के बिजौलिया में मशहूर चित्रकार रमेश चंद्र सोनी से चित्रकारी सीखने चले गए। उस समय घर से जेब में 10 रुपए लेकर निकले थे।

गांव की पहाड़ी चढ़कर दूसरी तरफ पहुंचे और वहां से बस में बैठकर भीलवाड़ा के बिजौलिया पहुंचे। किशन शर्मा ने रमेश चंद्र सोनी से 6 साल तक चित्रकारी की विभिन्न शैलियों की ट्रेनिंग ली और रंग व शैलियों की बारीकियां सीखीं। वहां से वापस बेगूं आए और गौतम चित्रशाला की शुरुआत की। इसके बाद चित्रकला में नए आयाम स्थापित किए।

2006 कालीदास अकादमी उज्जैन की राष्ट्रीय चित्र प्रदर्शनी में रघुवंशम् कृति का चयन हुआ।
2006 कालीदास अकादमी उज्जैन की राष्ट्रीय चित्र प्रदर्शनी में रघुवंशम् कृति का चयन हुआ।

सूक्ष्म चित्रकारी की बात करें तो किशन शर्मा ने खस, राई, तिल, दाल, मक्का, गेहूं, इमली आदि के दानों पर सूक्ष्म चित्रकारी की है। गुलमोहर, इमली, गुलेकन, मोगरा, पीपल, गुलेल आदि पेड़ पौधों की हरी पत्तियों को सुखाकर उनके ऊपर भी चित्रकारी की है।

खस के दाने पर उन्होंने मीरा का जो चित्र बनाया है उसमें मीरा के ललाट पर चंदन, कानों में बाली, गले में माला, एक हाथ में वीणा दूसरे हाथ में करताल एवं भगवा वस्त्र पहने भक्ति में लीन दिखाई देती है। इसके अलावा महात्मा गांधी, स्वामी विवेकानंद, रामकृष्ण परमहंस और महाराणा प्रताप का चित्र भी बनाया है।

राई के दाने पर मीरा, भगवान श्रीराम, श्रीकृष्ण, महाराणा प्रताप, सरदार भगत सिंह, स्वामी विवेकानंद, रामकृष्ण परमहंस, महात्मा गांधी, शिवाजी आदि देवी देवताओं और महान पुरुषों के चित्र बनाए। सूक्ष्म चित्रकला के साथ मेवाड़, कोटा, बूंदी, किशनगढ़ और नाथद्वारा शैली के सिद्धहस्त आर्टिस्ट है। इनके लिए राष्ट्रपति सम्मान के साथ तीन बार राज्य स्तर पर सम्मान मिल चुका है।

चित्तौड़गढ़ सांसद सीपी जोशी के साथ किशन शर्मा ने राज्यपाल कलराज मिश्र को श्रीकृष्ण की पेंटिंग भेंट की।
चित्तौड़गढ़ सांसद सीपी जोशी के साथ किशन शर्मा ने राज्यपाल कलराज मिश्र को श्रीकृष्ण की पेंटिंग भेंट की।
2012 मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने किशन शर्मा को राई के दाने पर सूक्ष्म चित्रकारी कला को राज्य स्तरीय हस्तशिल्प दक्षता पुरस्कार से सम्मानित किया।
2012 मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने किशन शर्मा को राई के दाने पर सूक्ष्म चित्रकारी कला को राज्य स्तरीय हस्तशिल्प दक्षता पुरस्कार से सम्मानित किया।

पारंपरिक शैलियों की चित्रकारी
कागज, बसली, सीट, हाथीदांत, सिल्क, प्लास्टिक प्लेट आदि माध्यम पर। भारतीय पारंपरिक शैलियों के चित्र मुख्य रूप से राजस्थानी शैली, मेवाड़, किशनगढ़, बूंदी, नाथद्वारा आदि। कलर-वाटर कलर, पोस्टर कलर, फ्यूजी कलर, ऑयल कलर, फैब्रिक कलर के साथ कुछ प्राकृतिक रंग। शैली चित्रांकन में गोल्ड, सिल्वर का भी उपयोग किया जाता है।

राम के जीवन चरित्र, कृष्ण की विभिन्न लीलाओं के चित्र, सवारी, महफिल, राग-रागिनियां, छत-झरोखे, शिकार, युद्ध, अट्टहास, राज प्रासाद, नृत्यांगना आदि चित्रों में प्रकृति का इतनी बारीकी से चित्रण किया जाता है कि चित्रों में समय, ऋतु, स्थान अर्थात सत्यम शिवम सुंदरम का आभास कराते हैं।

आजादी के किसान आंदोलन में शहीद हुए बेगूं के रुपाजी और करपाजी के काल्पनिक चित्र बनाकर उनका साकार रूप दिया। इन्हीं चित्रों के आधार पर दोनों शहीदों की मूर्तियां बनाई हैं, जो गोविंदपुरा शहीद स्थली पर लगाई गई है।

2006 में राई के दाने पर सूक्ष्म चित्रकारी के उल्लेखनीय कार्य के लिए किशन शर्मा को महाराणा सज्जनसिंह अवॉर्ड से सम्मानित किया।
2006 में राई के दाने पर सूक्ष्म चित्रकारी के उल्लेखनीय कार्य के लिए किशन शर्मा को महाराणा सज्जनसिंह अवॉर्ड से सम्मानित किया।
2020 कालीदास अकादमी उज्जैन की राष्ट्रीय चित्र प्रदर्शनी में ऋतुसंहार कृति का चयन हुआ।
2020 कालीदास अकादमी उज्जैन की राष्ट्रीय चित्र प्रदर्शनी में ऋतुसंहार कृति का चयन हुआ।

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