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भारत पहुंचा ओमिक्रॉन, एक्सपर्ट से जानें कैसे करें बचाव:वैक्सीन की दोनों डोज ले चुके लोगों के लिए भी खतरनाक है नया वैरिएंट

जयपुर2 महीने पहले
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कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन ने भारत में भी दस्तक दे दी है। बेंगलुरू (कर्नाटक) में इसके दो मरीज मिले हैं। दोनों विदेशी नागरिक हैं। भारत 29वां देश है, जहां ओमिक्रॉन पहुंचा है। हेल्थ मिनिस्ट्री के जॉइंट सेक्रेटरी लव अग्रवाल ने इसके तेजी से फैलने की आशंका जताई है। दैनिक भास्कर ने ओमिक्रॉन के खतरे और बचाव के तरीकों को लेकर जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. सुधीर भण्डारी से बात की।

डॉ. भण्डारी ने नए वैरिएंट से भारत में तीसरी लहर की आशंका जताई है। उन्होंने कहा- ये इतना खतरनाक है कि डबल डोज लगाकर इम्युनिटी डेवलप कर चुके व्यक्ति को भी काफी नुकसान पहुंचा सकता है। इस विषय पर अभी शोध चल रहा है, जिसकी वास्तविकता का पता आने वाले कुछ हफ्तों में ही चलेगा। उन्होंने बताया कि नए वैरिएंट में 30 से ज्यादा स्पाइक्स का म्युटेशन पाया गया है, जो लंग्स को बहुत तेजी से डैमेज कर सकता है।

सवाल : ये वायरस कैसा है और इसे इतना खतरनाक क्यों माना जा रहा है?
जवाब : अभी हम कोरोना की दूसरी लहर गुजर जाने और अच्छा वैक्सीनेशन होने के बाद काफी कंफर्टेबल थे। नए वैरिएंट का जब से पता लगा और इसके खतरे सामने आए, तब से हालात चिंताजनक हैं। जब भी कोरोना का नया वैरिएंट आता है, तो सबसे पहले उसे वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट माना जाता है। इसका मतलब ये होता है कि पहले उस वायरस को समझना होता है, लेकिन ओमिक्रॉन का खतरा और जल्दी संक्रमण फैलाने की क्षमता को देखते हुए WHO ने पहले दिन से ही वैरिएंट ऑफ कंसर्न घोषित कर दिया है।

सवाल : इस वायरस की चपेट में कोई आता है तो क्या होगा?
जवाब : नए वैरिएंट में 30 से ज्यादा स्पाइक्स का म्यूटेशन मिला है। यही स्पाइक्स शरीर में लंग्स की झिल्ली पर जाकर चिपक जाते है और उसे तेजी से डैमेज करना शुरू कर देते हैं। इसी कारण निमोनिया और दूसरे कॉम्प्लीकेशन पैदा होते हैं। ज्यादा स्पाइक्स होने के कारण यह लंग्स को डेल्टा वैरिएंट से कई गुना ज्यादा तेजी से डैमेज कर सकता है। 30 से ज्यादा स्पाइक्स में म्यूटेशन होने के और भी कई दुष्परिणाम हो सकते हैं। इसके अलावा अभी यह भी स्टडी की जा रही कि यह वायरस थेराप्यूटिक और इम्यून एस्केप फिनोमेना तो क्रॉस नहीं कर रहा। इसकी जानकारी अगले कुछ हफ्तों में ही पता चल पाएगा।

सवाल : वैक्सीन की दोनों डोज लगवा चुके लोग क्या इससे पूरी तरह सुरक्षित है?
जवाब : इम्यून एस्केप फिनोमेना का मतलब है कि अगर कोई व्यक्ति वैक्सीन की डबल शॉट (डोज) लेकर इम्यूनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) बना लेता है तो क्या यह इम्यूनिटी इस नए वैरिएंट को कवर कर पाएगी। ये एक बड़ा सवाल है? अगले कुछ हफ्तों में यह साफ हो जाएगा। ऐसा माना गया है कि डबल वैक्सीनेशन अभी तक का फुल प्रूफ प्रोटेक्शन है। हालांकि यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या कोई ऐसी वैक्सीन है, जो इस वैरिएंट को ओवर कम यानी इसके असर को कम कर पाएगी।

सवाल : अगर इस नए वायरस से भारत में लोग बीमार होते हैं तो हमारा लाइन ऑफ ट्रीटमेंट क्या होगा?
जवाब : अभी तक जो स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल और एंटी वायरल ड्रग है वो कोरोना के बाकी के स्ट्रेन को काफी इफेक्टिवली कंट्रोल कर रही है। मरीज उस लाइन ऑफ ट्रीटमेंट से रिकवर भी हुए हैं। नए वैरिएंट पर अभी कोई क्लियरिटी नहीं है कि जो बदलाव कोरोना के स्ट्रक्चर में आए और जिनसे नया वैरिएंट ओमिक्रॉन आया वो इससे खत्म हो पाएगा या नहीं।

तस्वीर में बाईं तरफ डेल्टा वैरिएंट का स्पाइक प्रोटीन और दाईं तरफ ओमिक्रॉन वैरिएंट का स्पाइक प्रोटीन है।
तस्वीर में बाईं तरफ डेल्टा वैरिएंट का स्पाइक प्रोटीन और दाईं तरफ ओमिक्रॉन वैरिएंट का स्पाइक प्रोटीन है।

सवाल : क्या इस वायरस को RT-PCR जांच से डिटेक्ट किया जा सकता है? जवाब : पूरी दुनिया में अभी कोरोना वायरस डिटेक्ट करने के लिए सबसे ज्यादा भरोसा अभी RT-PCR पर ही होता है। इस जांच को 70 फीसदी तक सही माना जाता है। हालांकि कोरोना की दूसरी लहर में एचआर सीटी से भी कोरोना को डिटेक्ट किया गया था। अगर किसी व्यक्ति की RT-PCR रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, तो वह किस वैरिएंट से संक्रमित हुआ है इसकी जांच केवल जीनोम सीक्वेंसिंग के जरिए ही हो पाएगी।

सवाल : इस वायरस से कैसे बचा सकता है?
जवाब :
कोरोना से बचने का अब तक का सबसे अच्छा और स्टैंडर्ड तरीका कोविड एप्रोप्रियेट बिहेवियर का पालन करना ही है। दूसरी लहर खत्म होने और वैक्सीनेशन के बाद मास्क लगाना छोड़ दिया है, वह मास्क जरूर लगाएं। इसके अलावा भीड़-भाड़ वाले इलाकों में जाने से बचें। जो लोग उन देशों से ट्रैवल कर रहे हैं, जहां इस वैरिएंट के केस मिल रहे हैं, ऐसे लोगों की मॉनिटरिंग काफी गहनता से करनी होगी। ऐसे लोगों को एयरपोर्ट से ही सैंपल लेने के तुरंत बाद 7 दिनों के लिए इंस्टीट्यूशन क्वारैंटाइन रखें। अगर किसी की रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो उसके सैंपल की तुरंत जीनोम सीक्वेंसिंग करवाई जाए। साथ ही, उस व्यक्ति का स्पेशल ट्रीटमेंट करें और उसकी रिपोर्ट नेगेटिव आने और उसके ठीक होने के बाद भी उसके हेल्थ स्टेटस को दो हफ्ते तक मॉनिटरिंग करें। इसके अलावा वैक्सीनेशन के डबल डोज जिनके रह गए हैं, उन्हें डबल डोज जरूर लगाने चाहिए।

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