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गांवों का विकास करेंगी नगर पालिकाएं:पैराफेरी एरिया में बसी कॉलोनियों में पालिकाएं और परिषद को डवलपमेंट की जिम्मेदारी, स्वायत्त शासन विभाग ने दिए आदेश

जयपुर3 महीने पहले
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प्रतीकात्मक फोटो - Dainik Bhaskar
प्रतीकात्मक फोटो

राजस्थान में ऐसे गांव जिनका एरिया नगर परिषद या पालिका क्षेत्र के बाहर परिधि क्षेत्र या मास्टर प्लान एरिया में आ रहा है, उनमें बसी कॉलोनियों में विकास के काम संबंधित क्षेत्र की नगर पालिका या परिषद करवाएगी। इसके लिए स्वायत्त शासन विभाग ने सभी नगर पालिकाओं को आदेश जारी किया है। इनमें उन जिलों को भी शामिल किया गया है, जहां शहरी विकास न्यास (यूआईटी) नहीं है।

14 जिलों में यूआईटी और तीन जिलों में विकास प्राधिकरण है। उन जिलों के प्रमुख शहरों और उनके आस-पास के रूरल एरिया के विकास का जिम्मा इन्हीं एजेंसियों के पास है। शेष जिलों में नगर परिषद और नगर पालिकाएं हैं। बूंदी, बारां, टोंक, झालावाड़, झुंझुनूं, चूरू समेत कई ऐसे जिले हैं, जहां यूआईटी न होकर विकास के लिए नगर परिषद ही है। इन नगर परिषदों या पालिकाओं के क्षेत्र के अलावा आस-पास के क्षेत्र में ग्रामीण क्षेत्रों में आवासीय कॉलोनियां बस गई हैं। ऐसी कॉलोनियों में सड़क, सीवरेज और पार्क आदि के काम बहुत कम होते हैं। इसे देखते हुए सरकार ने नगर पालिकाओं व परिषदों को ऐसे इलाकों में विकास कार्य कराने को कहा है।

क्या होते है पैराफेरी एरिया

ऐसे ग्रामीण इलाके जो नगर निगम, पालिका, यूआईटी या विकास प्राधिकरण के क्षेत्राधिकार में आ जाते हैं। उन एरिया में जमीनों के भू-उपयोग परिवर्तन, कृषि भूमि पर बसी कॉलोनियों के नियमन का जिम्मा इन्हीं एजेंसियों के पास आ जाता है। हालांकि ऐसे एरिया में पंचायत समितियां व ग्राम पंचायतें भी होती हैं। बकायदा वहां चुनाव भी होते हैं। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए सरकार इन एरिया के डवलपमेंट की सारी प्लानिंग नगर निगम, पालिका, यूआईटी या विकास प्राधिकरण के जिम्मे सौंप देती है।

190 से ज्यादा शहरों के बने हैं मास्टर प्लान

वर्तमान में 200 से ज्यादा नगर पालिकाएं राजस्थान में हैं। इसमें से 190 नगर पालिका क्षेत्र ऐसे हैं, जिनका मास्टर प्लान बनकर तैयार है। मास्टर प्लान में आने वाले ग्रामीण इलाके पालिका के पैराफेरी क्षेत्र में आते हैं। इन गांवों में जमीन आवंटन, पट्‌टे देने, लीज राशि लेने समेत तमाम कार्यों की जिम्मेदारी नगर पालिकाओं के पास आ जाती है।

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